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सरकारी खरीददारी का सच: स्टोर में पड़े-पड़े सड़ गए 35 लाख के चिकित्सकीय उपकरण

Janjwar Desk
15 Dec 2020 1:01 PM GMT
सरकारी खरीददारी का सच: स्टोर में पड़े-पड़े सड़ गए 35 लाख के चिकित्सकीय उपकरण
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मशरक सरकारी अस्पताल के स्टोर में सड़ रहे हैं 35 लाख के चिकित्सकीय उपकरण। फोटो:जनज्वार।
सारण के मशरक पीएचसी में सबकुछ होते हुए भी मरीज रेफर हो जाते हैं, क्योंकि 35 लाख के चिकित्सकीय उपकरण खरीदे तो गए, पर घोटालों के सदके ये स्टोर में रखे-रखे सड़ गए, यह मामला सरकारी खरीददारी के सच का ज्वलंत उदाहरण है....

जनज्वार ब्यूरो/ पटना। लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपये फूंके जाते हैं, पर क्या उनसे लोगों को वास्तव में लाभ मिल पाता है, ऐसे सवाल अक्सर उठते रहते हैं। इन सवालों के पीछे वाजिब कारण भी होते हैं।

सरकारी अस्पतालों में कभी डॉक्टरों की कमी तो कभी चिकित्साकर्मियों की कमी, कभी आवश्यक उपकरणों का अभाव तो कभी कोई और समस्या, यानि कोई न कोई ऐसे कारण हर जगह मौजूद होते हैं, जिससे सरकारी अस्पतालों में लोगों को समय पर जरूरी चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाती। थक-हारकर लोग निजी अस्पतालों की शरण लेते हैं।

हालांकि सारण जिला के मशरक पीएचसी का मामला अपने आप में अनूठा है। यहां सबकुछ होते हुए भी मरीजों को रेफर करना पड़ता है, क्योंकि लगभग 35 लाख के चिकित्सकीय उपकरण खरीदे तो गए, पर घोटालों के सदके ये स्टोर में रखे-रखे सड़ गए। यह मामला सरकारी खरीददारी के सच का ज्वलंत उदाहरण भी है।

मशरक पीएचसी में स्वास्थ्य सुविधाओं का आज कल घोर अभाव बना हुआ है। पहले यहां चिकित्सकों की कमी थी, जिसकी मांग यहां के स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने की। इसके बाद सारण के जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन और सिविल सर्जन ने पहल की तथा दो चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति यहां की गई। पर अब इस पीएचसी में चिकित्सकीय उपकरणों की कमी का रोना है। इस कारण से मरीजों को निजी क्लीनिक में भेज दिया जाता है या बेहतर इलाज के लिए उच्च संस्थान में रेफर कर दिया जाता है।

हालांकि आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि मशरक पीएचसी के स्टोर में लगभग 35 लाख रुपए के चिकित्सकीय उपकरण विभागीय झंझट के कारण पड़े हुए सड़ रहे हैं। अब तो खैर ये उपकरण कबाड़ की हालत में नजर आ रहे हैं।

उपकरणों के बिना उपयोग के जंग लगने के बारे में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक से जानकारी ली गयी तो उन्होंने बताया कि वे अभी नये आये हैं। मामले में फार्मासिस्ट अरबिंद कुमार ने बताया कि लगभग 35 लाख रुपए के नये स्वास्थ्य उपकरण स्टोर में पड़ें हुए हैं, जो विभागीय अधिकारियों के आपसी दांव-पेच के कारण एक तरह से जब्त हालत में हैं।

वहीं रोगी कल्याण समिति के सदस्य राजेन्द्र प्रसाद सिंह ने बताया कि वर्ष 2016-17 में बिहार सरकार द्वारा मशरक पीएचसी में लगभग 35 लाख रुपए के विभिन्न चिकित्सकीय उपकरण खरीदने के लिए राशि भेजी गई थी। जिसके बाद पीएचसी के तत्कालीन प्रभारी डॉ ए आर अंसारी द्वारा पीएचसी के लिए इन 35 लाख रुपए के जरूरी उपकरण न खरीदकर उसमें भारी अनियमितता बरती गई।जिससे पीएचसी में उपकरणों की कमी से इलाज का घोर अभाव बना रहा।

बाद में स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता महेश्वर सिंह ने लोक शिकायत निवारण विभाग में मामले की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद इस खरीददारी की जांच कराई गई। जांच में सामने आया कि खरीददारी में अनियमितता बरती गई है। इसके बाद पीएचसी प्रभारी पर कारवाई भी की गई। उसी जांच के दौरान पीएचसी प्रभारी द्वारा बाकी बचे उपकरणों की भी खरीद कर ली गई और मामला जांच में रहने के कारण सभी समान स्टोर में रख दिया गया।

उसी समय से 35 लाख के ये चिकित्सकीय उपकरण रद्दी की तरह पीएचसी के स्टोर में पड़े हुए हैं। इनकी हालत अब ऐसी हो गई है कि ये उपयोग के लायक भी नहीं रह गए हैं। वहीं किसी इमरजेंसी में इलाज के लिए पीएचसी में लाए गए मरीजों को उपकरण की कमी की वजह से निजी क्लीनिक पर आश्रित होना पड़ता है।

सोमवार को जिलाधिकारी सारण के निर्देश के आलोक में लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी मढ़ौरा ने पीएचसी स्टोर का निरीक्षण किया तो वे भी स्टोर में उपलब्ध समानों को देख आश्चर्यचकित रह गए। उन्होंने मामले को जिलाधिकारी सारण के संज्ञान में लाने की बात कही।

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