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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, सेंट्रल विस्टा परियोजना पैसा बचाने वाली, बर्बाद करने वाली नहीं

Janjwar Desk
3 Nov 2020 4:29 PM GMT
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, सेंट्रल विस्टा परियोजना पैसा बचाने वाली, बर्बाद करने वाली नहीं
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सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि लगभग सौ साल पुरानी संसद संकट के संकेत दे रही है और कई सुरक्षा मुद्दों का सामना कर रही है, इसलिए संसद के एक नए आधुनिक भवन के निर्माण की आवश्यकता है......

नई दिल्ली। सेंट्रल विस्ता परियोजना को लेकर केंद्र सरकार ने आज सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यह परियोजना पैसा बचाती है, इसे बर्बाद नहीं करती है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कहा कि यह वास्तव में 1000 करोड़ रूपये वार्षिक किराए के खर्च को बचाता है। मेहता ने शहरी विकास मंत्रालय, दिल्ली विकास प्राधिकरण और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग का प्रतिनिधित्व करते हुए यह बात कही।

केंद्र सरकार ने सेंट्रल विस्ता परियोजना का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बचाव किया है। सरकार ने कहा है कि लगभग सौ साल पुरानी संसद संकट के संकेत दे रही है और कई सुरक्षा मुद्दों का सामना कर रही है, इसलिए संसद के एक नए आधुनिक भवन के निर्माण की आवश्यकता है।

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में संसद भवन में जगह की कमी का भी हवाला दिया और साथ ही कहा कि इसके कारण हर साल कार्यालय किराए के रूप में लगभग एक हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। सरकार ने कहा कि 51 मंत्रालयों के लिए एक सामान्य सचिवालय के साथ इस तरह के खर्चे से बचा जा सकता है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट अब तक तीन बार इस परियोजना पर रोक लगाने से इनकार कर चुका है।

सॉलिसिटर जनरल मेहता ने बेंच के समक्ष कहा कि परियोजना समकालीन जरूरतों को पूरा करती है और धरोहर इमारतों संरक्षित किया जाएगा, ध्वस्त नहीं किया जाएगा। मेहता ने दलील दी कि वर्तमान संसद भवन जैसा है वैसा ही रहेगा। समारोह सेंट्रल हॉल में ही आयोजित किए जाएंगे।

मेहता ने कहा कि यह निर्णय लेने के लिए एक नई संसद की आवश्यकता है, एक अलग अध्ययन की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि नीतिगत निर्णय यह है कि सभी केंद्रीय मंत्रालयों को एक स्थान पर रहना होगा और साथ ही मेट्रो स्टेशनों के माध्यम से लिंकेज भी होगा जो दोपहिया और चार पहिया वाहनों के उपयोग को कम करेगा। उन्होंने कहा कि हमें विभिन्न मंत्रालयों में जाने के लिए शहर के चारों ओर चक्कर लगाने पड़ते हैं जिससे यातायात और प्रदूषण में वृद्धि होती है।

उन्होंने आगे कहा कि नए भवन से पैसे की बचत होगी। डीडीए ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि राष्ट्रपति भवन, उत्तर और दक्षिण ब्लॉक, संसद भवन और राष्ट्रीय अभिलेखागार जैसे ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट सेंट्रल विस्ता परियोजना को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है जिसमें आरोप लगाया गया है कि इस परियोजना में भूमि उपयोग को लेकर एक अवैध बदलवा किया जा रहा है। इसमें कोर्ट से परियोजना को रद्द करने का आग्रह किया गया है।

सेंट्रल विस्ता पर काम नवंबर 2021 तक पूरा होने की संभावना है जिसे 2022 में भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सौंपे जाने की तैयारी है। सेंट्रल विस्ता में संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, उत्तरी और दक्षिणी ब्लॉक की इमारते हैं जिनमें महत्वपूर्ण मंत्रालय और इंडिया गेट भी हैं।

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