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Delhi Riots 2020 : दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी मोहम्मद इब्राहिम की जमानत याचिका को किया खारिज

Janjwar Desk
28 Sep 2021 1:21 PM GMT
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दिल्ली दंगों के मामले में दोषी दिनेश यादव को पांच साल की जेल

रतन लाल हत्या के आरोपी ने जमानत याचिका दर्ज बताया, वो दंगों में शामिल नहीं था। कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा, दिल्ली दंगें पूर्वनियोजित थे।

जनज्वार। दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने साल 2020 में उत्तर पूर्वी दंगो (North East Delhi Riots) से जुड़े मामले में एक आरोपी को जमानत देने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा, शहर में कानून-व्यवस्था बिगड़ने के लिए यह पूर्व नियोजित साजिश थी। यह सारी घटना पलभर के आवेश में नहीं हुई है, बल्कि इसे सोची समझी साजिश के तहत अंजाम दिया गया था। जस्टिस (Justice) सुब्रमण्यम प्रसाद ने हेड कांस्टेबल रतन लाल की हत्या (Murder) के मामले में आरोपी मोहम्मद इब्राहिम की तरफ से दाखिल जमानत याचिका पर विचार करते हुए उसे ख़ारिज कर दिया। साथ ही जस्टिस सुब्रमण्यम ने कहा कि घटना स्थल के आसपास के सभी सीसीटीवी कैमरे (CCTV Camera) को व्यवस्थित रूप से तोड़ दिया गया था।

जस्टिस प्रसाद ने खारिज की याचिका

जस्टिस सुब्रमण्यम कहा कि, 'इलाके के सीसीटीवी कैमरों को नियोजित तरीके से बंद करना या उन्हें नुकसान पहुंचाना बताता है कि सब पहले से प्लान्ड (Planned) था। ये शहर की कानून-व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के लिए किया गया। ये भी दिख रहा है कि कैसे असंख्य दंगाई लाठी-डंडों और बैट्स के साथ निकले और पुलिस अधिकारियों पर भारी पड़ गए'। इब्राहिम की जमानत याचिका को ख़ारिज करते हुए कोर्ट ने कहा याचिकाकर्ता को तलवार के साथ दिखने वाला उपलब्ध वीडियो काफी भयानक था, जो उसे हिरासत में रखने के लिए पर्याप्त है।

बता दें, याचिकाकर्ता इब्राहिम (Ibrahim) को दिसंबर 2020 में दिल्ली दंगों में रतन लाल के हत्या (Murder) के आरोप ने गिरफ्तार किया गया था। इब्राहिम ने याचिका में कहा की उसने कभी किसी विरोध प्रदर्शन या दिल्ली दंगों में भाग नहीं लिया। लेकिन कोर्ट ने उपलब्ध वीडियो (Video) फुटेज के आधार पर सुनवाई के बाद इब्राहिम समेत 3 लोगो को जमानत देने से मना कर दिया। हालांकि 8 लोगो को बरी करने आदेश भी दिया।

कोर्ट ने कहा की फरवरी 2020 में राजधानी दिल्ली (Delhi) को हिला देने वाल दंगे अचानक नहीं हुए, और वीडियो फुटेज (Video Footage) में मौजूद प्रदर्शनकारियों का आचरण, जिसे अभियोग पक्ष की ओर से रिकॉर्ड में रखा गया है, जो स्पष्ट रूप से चित्रित करता है कि, यह दंगे पूर्वनियजित थे। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि यह सरकार के काम को अस्त व्यस्त करने के साथ साथ शहर में लोगो के सामान्य जीवन को बाधित करने के लिए सोचा -समझा प्रयास था।

बता दे, जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने ही 8 सितंबर को दिल्ली दंगों के एक मामले में 5 लोगों को जमानत देते हुए कहा था कि सिर्फ विरोध करने को किसी के खिलाफ हथियार बनाकर उसे जेल में नहीं डाला जा सकता। विरोध करना उनका अधिकार है।

स्पेशल इनवेस्टिगेटिव सेल का गठन

गुरुवार को दिल्ली पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना ने दिल्ली दंगों की जाँच के लिए एक स्पेशल इनवेस्टिगेटिव सेल ( special investigative cell)का गठन किया ताकि दंगो की जाँच गंभीरतापूर्वक जल्द से जल्द हो सके। दिल्ली दंगो में पुलिसकर्मी सहित 53 लोगो की मौत हो गयी थी और सैकड़ों घायल हो गए थे। दंगों पर काबू पाने के बाद पुलिस द्वारा ताबड़तोड़ FIR दर्ज की गयी जिसमे सैकड़ों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिसमें आम आदमी पार्टी के पूर्व निगम पार्षद ताहिर हुसैन की दंगों को भड़काने में मुख्य भूमिका बताई गयी और भी गिरफ्तार किया गया, जो आज तक जेल में बंद है।

ताहिर हुसैन पर आरोप था कि 24 और 25 फरवरी 2020 को दंगों के दौरान ताहिर हुसैन ने ही चांद बाग इलाके में मौजूद दंगाइयों की भीड़ को हमले के लिए उकसाया था, जिसके फलस्वरूप थाना दयालपुर इलाके में भीड़ ने आईबी (खुफिया विभाग) कर्मी अंकित शर्मा को घेर लिया। उन्हें घर के बाहर की गली से घसीटकर चाकूओं और गोलियों से हमला करके मार डाला गया था। दो दिन बाद अंकित का सड़ा गला शव नाले से बरामद किया गया था। उस मामले में ताहिर हुसैन के खिलाफ 26 फरवरी को दयालपुर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था।

हाईकोर्ट के फैंसले पर कपिल मिश्रा की टिप्पणी

हाईकोर्ट द्वारा इब्राहिम के जमानत याचिका को खारिज करने और दिल्ली दंगों को पूर्वनियोजित बताने के फैसले पर कपिल मिश्रा ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वो दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सही बताते हुए कह रहे है, 'दिली के दंगों में जो हाईकोर्ट ने कहा है,वो हम पिछले डेढ़ साल से वही कह रहे थे। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है के ये दंगें सोची समझी साजिश के तहत किये गए है। और हम भी यही कह रहे थे कि, हथियार इक्कठे किये गए, बम इक्कठे किये गए, पूरी योजना बनाई गयी। सुनियोजित तरीके से दिल्ली को जलाया गया, दिल्ली में लोगों को मारा गया। यदि हम लोग मौजपुर नहीं जाते तो,रात में सोते हुए हज़ारों लोगों के कत्ले-आम करने की तैयारी कर ली गयी थी, ताहिर हुसैन के घर पर ओर स्कूलों में हथियार इक्कठे किये गए थे।

भजनपुरा, चांदबाग, मौजपुर का इलाका पूरी तरह घेर लिया गया था। ये केस कांस्टेबल रतन लाल की हत्या का केस है जिसमें हाईकोर्ट ने ये टिप्प्पणी की है कि ये सब पूर्वनियोजित था। वीडियो में कपिल मिश्रा ये कहते हुए दिख रहे है कि, आज हाईकोर्ट के फैसले के बाद, बड़े - बड़े पत्रकार, नेता जो इन आतंकवादियों को बचाने के लिए कपिल मिश्रा के ऊपर इल्ज़ाम लगा रहे थे, उन्हें दिल्ली वासियों से माफ़ी मांगनी चाहिये। दिल्ली दंगों का सच अब सब के सामने आने लगा है।'

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