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Delhi Riots 2020 : किसी "वीआईपी" के प्रभाव में ना आए पुलिस, बिना डरे जांच पूरी करें : दिल्ली हाईकोर्ट

Janjwar Desk
16 March 2022 7:52 AM GMT
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किसी वीआईपी के प्रभाव में ना आए पुलिस, बिना डरे जांच पूरी करें : दिल्ली हाईकोर्ट

Delhi Riots 2020 : साल 2020 के दिल्ली दंगों में मारे गए युवक की मौत के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को फटकार लगायी है। कोर्ट ने पुलिस को कहा है कि दो बीत गए अब तक मामले में चार्जशीट क्यों नहीं दाखिल की गयी। कोर्ट ने यह भी कहा है कि चाहे दोषी कितना भी प्रभावशाली या वीआईपी हो पुलिस बिना डरे और बिना किसी के प्रभाव में आए अपनी जांच पूरी करे।

Delhi Riots 2020 : साल 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडिओ वायरल हुआ था। वीडिओ में जमीन पर गिरे एक जख्मी युवक पर सुरक्षाकर्मी वंदे मातरम और राष्ट्रगीत गाने का दबाव बनाते दिख रहे थे। जमीन पर लेटे बुरी तरह से जख्मी उस युवक का नाम फैजान था। उसकी उम्र महज 23 साल थी। इस वीडियो के शूट किए जाने के कुछ घंटों बाद ही दिल्ली के एक अस्पताल मे फैजान की मौत हो गयी थी।

अब इसी मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा है कि, "इस मामले की जांच बिना डर और बिना ​किसी विचारधारा के प्रभाव में आकर करें। कोर्ट को सख्त लहजे में पुलिस से कहा है कि आखिर क्या कारण है कि मामले के दो वर्ष बीतने के बाद भी अब तक इस मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं की गयी है।" मामले में जनवरी महीने में पुलिस की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि उसने इस मामले मे एक हेड कांस्टेबल को चिह्नित कर उससे पूछताछ भी की है।

इस मामले में जस्टिस चंद्रधारी सिंह ने पुलिस को निर्देश देते हुए कहा है कि, "चाहे कितना भी महत्वपूर्ण व्यक्ति या वीआईपी इस मामले में शामिल हो आपको इस मामले की जांच बिना किसी के प्रभाव में आए बिना करनी होगी। इस मामले के रिट पीटीशन को इस कोर्ट में अब तक पेंडिंग रखने का एक मकसद है। यह मकसद पूर होना चाहिए। कोर्ट पुलिस की जांच में किसी तरह का कोई हस्तक्षेप नहीं करना चाहती है, पर अगर अदालत की नजर में यह बात आयी कि पुलिस इस मामले की जांच में कोई ढुलमुल रवैया अपना रही है तो फिर कोर्ट इस मामले की जांच में हस्क्षेप कर सकती है।" जस्टिस चंद्रधारी सिंह साल 2020 में इस मामले में कोर्ट की निगरानी में एसआईटी की जांच के लिए फैजान की मां की ओर से दाखिल की गयी याचिका की सुनवाई कर रहे थे।

इस बीच दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि 2020 के दंगों के दौरान दिल्ली पुलिस की अलग-अलग युनिट के पुलिसकर्मी उत्तर पूर्वी दिल्ली में तैनात किए गए थे। तकनीकी सबूतों के आधार पर पुलिस ने एक व्यक्ति पर जांच को केन्द्रित किया है। जो कि ​हमारी दिल्ली पुलिस में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात है। उसके खिलाफ और अधिक सबूत जुटाकर जरूरी कानूनी कार्रवाई जल्द से जल्द की जाएगी।

इसके जबाव में कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि केवल कानूनी कार्रवाई नहीं बल्कि दोषियों पर सीआरपीसी के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। कानूनी कार्रवाई मामूली सी बात होगी क्योंकि जो भी इस मामले में दोषी हैं वे अपराधी हैं। उनपर आपराधिक कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने पुलिस से कहा है कि, आप यह समझ लें कि एक मां ने अपना बेटा खोया है। मैं ये नहीं जानता यह घटना कहां और कैसे हुई, क्योंकि मामले की जांच चल रही है पर इस मामले को पूरी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि देश के हर व्यक्ति को जांच एजेंसियों पर बराबर भरोसा होना चाहिए। कोर्ट में किसी रिट ज्यूरिडिक्शन का मतलब ही है ​कि पीड़ित को न्याय मिलनी चाहिए।

पुलिस ने इस मामले में कोर्ट से अपनी आगे की जांच पूरी करने के लिए आठ हफ्ते का समय मांगा है। पुलिस की ओर से यह भी मांग की गयी कि मामले में संदिग्ध पुलिसकर्मी की भूमिका होने पर रिपोर्टिंग करने से मीडिया पर रोक लगायी जाए। हालांकि कोर्ट ने कहा कि सभी को जिसमें मीडिया भी शामिल है सभी को ​जिम्मेदार बनाना चा​हिए।

उससे पहले फैजान की मांग की ओर से अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने कोर्ट को बताया​ कि मामले में दोषियों पुलिसकर्मियों की जांच में वॉयस सेंपलिंग अब तक पेंडिंग है। ग्रोवर ने कोर्ट को यह भी बताया कि मामले में ज्योति नगर पुलिस स्टेशन की भूमिका भी संदिग्ध है। पुलिस स्टेशन की ओर से मामले की जांच को भटकाने की कोशिश की गयी है। आप को बता दें कि 24 फरवरी 2020 को ज्योति नगर पुलिस थाने में ही फैजान ​की गिरफ्तारी की ​गयी थी। उसके कुछ घंटों बाद ही एक अस्पताल में इलाज के दौरान फैजान की मौत हो गयी थी। ग्रोवर ने कोर्ट ने मामले की जांच पूरी होने तक संदिग्ध पुलिसकर्मी की कस्टडी की भी मांग की।

उससे पहले कोर्ट ने अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर के उस बात पर आपत्ति दर्ज की थी जिसमें उन्होंने ​पीड़ित के लिए मुस्लिम युवक शब्द का प्रयोग किया था। कोर्ट ने कहा था कि मुस्लिम युवक शब्द का प्रयोग ना करें केवल देश का युवा कहें चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम। न्याय पर सभी का अधिकार है। अधिवक्ता ग्रोवर की ओर से कहा गया कि इस में नफरत फैलाने वाला अपराध हुआ है। पीड़ित को नफरत फैलाने के लिए निशाना बनाया गया। पीड़ित की अधिवक्ता ने कहा कि इस मामले और सच वाकई में परेशान करने वाला है। जिसकी गहराई से जांच होनी चाहिए।

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