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देवासः 48 दिनों बाद 8 फीट गड्ढे से मिले लापता 5 आदिवासियों के कंकाल, पुलिस बोली- देर आये-दुरुस्त आये

Janjwar Desk
1 July 2021 5:37 AM GMT
देवासः 48 दिनों बाद 8 फीट गड्ढे से मिले लापता 5 आदिवासियों के कंकाल, पुलिस बोली- देर आये-दुरुस्त आये
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13 मई से लापता एक आदिवासी परिवार के पांच सदस्यों के कंकाल मिलने पर मध्य प्रदेश पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही है, वही दिग्विजय सिंह ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है

जनज्वार ब्यूरो। डेढ़ महीने से भी ज्यादा समय से लापता एक आदिवासी परिवार के पांच सदस्यों का कंकाल 8 फीट नीचे गड्ढे से मिला है। एक ओर जहां आदिवासी समाज के लोग पूरे मामले में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। वही एमपी के देवास की पुलिस खुद ही अपनी पीठ थपथपा रही है। पुलिस अधिकारी का कहना है कि देर आये-दुरुस्त आये। इधर पूरे मामले को क्रूर और जघन्य अपराध बताते हुए राज्य के पूर्व सीएम और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने की मांग की है।

13 मई से लापता था परिवार

13 मई की रात से देवास के नेमावर कस्बे से आदिवासी परिवार के पांच सदस्य लापता हो गए थे। नेमावर बस स्टैंड के पीछे रहने वाले मोहन लाल कास्ते की पत्नी ममता बाई कास्ते (45), बेटी रूपाली (21), दिव्या (14) और रवि ओसवाल की बेटी पूजा (15) एवं बेटा पवन (14) लापता हो गए थे। अब घटना के 48 दिनों बाद आदिवासी परिवार के पांच सदस्यों के कंकालों को पुलिस ने मंगलवार 29 जून को बरामद किया है। पांचों नर कंकाल एक खेत में गहरे गड्ढे में लगभग आठ फीट नीचे दबे थे। पुलिस ने जेसीबी मशीन से खुदाई करवाकर शवों को बाहर निकलवाया है। कंकाल मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई।

इतने लम्बे समय से गायब आदिवासी परिवार की बरामदगी की मांग आदिवासी समाज लगातार उठाता रहा। कुछ लोग इसे स्थानीय प्रशासन की अनदेखी और घटिया राजनीतिक दबाव के कारण हुई देरी बता रहे हैं। वहीं पुलिस का कहना है कि वो करीब दो महीने से इन लोगों की तलाश में थी।


इधर मामले की जानकारी होने पर सुनील कुमार आदिवासी नामक एक यूजर के ट्वीट को री-ट्वीट कर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने उचित कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा- यह अत्याधिक विभत्स घटना है जिसमें पूरा आदीवासी परिवार की क्रूर हत्या कर दी गई। मुझे उम्मीद है पुलिस प्रशासन इसे पूर्ण गंभीरता से लेते हुए दोषियों को सख़्त से सख़्त कार्रवाई कर सज़ा दिलवाएगी।

पुलिस खुद थपथपा रही अपनी पीठ

13 मई की रात से नेमावर कस्बे से लापता आदिवासी परिवार के पांच सदस्यों को खोजने के मामले में पुलिस खुद ही अपनी पीठ थपथपा रही है। 29 जून मंगलवार को पुलिस ने मेला रोड स्थित एक खेत के गड्ढे से कंकालों को बरामद किया। पूरे मामले में लोग जहां प्रशासन की अनदेखी की बात कर रहे हैं, वहीं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सूर्यकांत शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि एमपी पुलिस देर आयी-दुरुस्त आय़ी। उन्होंने बताया कि लापता आदिवासी परिवार के पांचों लोगों के कंकाल आठ फीट गहरे गड्ढे से निकाले गए हैं। जिस खेत से ये कंकाल मिले है, प्राथमिक जांच में खेत से चार से पांच लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। आगे उन्होंने कहा कि हम बहुत सक्रिय थे। पूरे केस की जांच के लिए पांच टीमें बनायी गयी थी। होसांगबाद, खड़वा, जैसी जगहों पर भी तलाश किया गया। आखिर में कोरलडेम से लोकेशन आय़ा था। एएसपी ने कहा कि ये पुलिस की मेहनत है कि आरोपी से उगलवाकर लाशों को निकाल पाये है। वरना इतने गहरे गड्ढे में लाशे थी कि जबतक पिन प्वाइंट इनवेस्टिगेशन नहीं होती तो इन्हें खोज पाना मुश्किल होता। हम देर आये दुरुस्त आय़े।


बता दें कि पिछले दो माह से लापता आदिवासी परिवार की खोजबीन के लिए आदिवासी संगठन सहित अनेक संगठनों ने प्रशासन से लापता लोगों को ढूंढने की मांग रखी थी। पिछले दिनों पुलिस ने पांचों आदिवासी परिवार के लोगों का पता लगाने वालों को उचित इनाम देने की घोषणा की थी।

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