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Ghaziabad News : जमीन के मुआवजे के लिए बीते 5 सालों से धरना दे रहे किसानों ने ली 'समाधि'

Janjwar Desk
16 Sep 2021 11:34 AM GMT
Ghaziabad News : जमीन के मुआवजे के लिए बीते 5 सालों से धरना दे रहे किसानों ने ली समाधि
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(प्रदर्शनकारी किसानों खुद गड्ढे खोदे और उनमें लेट गए। पुलिस ने मिट्टी डालने से रोका)

17 किसानों (Farmers) खुद गड्ढे खोदे और उनमें लेट गए। वहीं सुरक्षा (Security) के लिहाज से इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया। मौजूद पुलिसकर्मियों गड्ढे में लेटे किसानों के ऊपर मिट्टी नहीं डालने दी....

जनज्वार। किसान आवास विकास परिषद (Awas Vikas Parishad) के दिए मुआवजे से असंतुष्ट 17 किसानों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इन किसानों की उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद (Ghaziabad) के लोगनी इलाके में आवास विकास परिषद की मंडोला विहार योजना के तहत भूमि अधिग्रहित की गई थी। मुआवजे की मांग को लेकर छह गांवों के किसान बीते पांच साल से लगातार धरने पर बैठे हुए हैं। लेकिन इनकी समस्या का समादान अब तक नहीं हुआ है। किसानों ने प्रदर्शन करते हुए सांकेतिक समाधि (mausoleum) ले ली है।

जानकारी के मुताबिक करीब छह गांव के किसानों की 2614 एकड़ जमीन को आवास विकास परिषद ने अधिग्रहित किया था। किसानों का कहना है कि उन्हें जो मुआवजा दिया गया है वह पुराने रेट के आधार पर दिया गया है। यानि उचित मुआवजा नहीं मिल पाया है, जिसके चलते वह पिछले पांच साल से धरने पर बैठे हुए हैं। किसानों के मुताबिक समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान कोई हल नहीं निकल पाया तो भाजपा सरकार से किसानों को उम्मीद थी।

इन किसानों की तरफ किसी का कोई ध्यान नहीं गया लिहाजा उन्होंने मजबूर होकर आमरण अनशन कर प्रतिकात्मक जिंदा समाधि लेने की चेतावनी दी थी। एसडीएम, एडीएम, सीओ और आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने किसानों से समस्या का हल निकालने की अपील की थी। लेकिन तमाम वार्ता असफल रही और बुधवार को 17 किसानों ने योजना के तहत सांकेतिक समाधि लेकर विरोध जताया।

जानकारी के मुताबिक 17 किसानों खुद गड्ढे खोदे और उनमें लेट गए। वहीं सुरक्षा के लिहाज से इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया। मौजूद पुलिसकर्मियों गड्ढे में लेटे किसानों के ऊपर मिट्टी नहीं डालने दी। सांकेतिक समाधि लेने वाले किसानों ने बताया कि इस समस्या का समाधान न होने तक वह गड्ढों में लेटे रहेंगे।

प्रदर्शनकारी किसानों ने बताया कि इलाके के छह गांवों के किसानों की 2614 एकड़ जमीन है जिसका उचित मुआवजा नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि करीब दो हजार किसान इससे प्रभावित हैं।

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