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सरकार ने किसानों की दो मांगें मानीं, पर मुख्य मांग पर क्यों है जिच

Janjwar Desk
31 Dec 2020 3:30 AM GMT
सरकार ने किसानों की दो मांगें मानीं, पर मुख्य मांग पर क्यों है जिच
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Photo: social media

30 दिसंबर की वार्ता के बाद जहां सरकार द्वारा कहा गया कि बातचीत सकारात्मक रही और जल्द ही इसका अच्छा निष्कर्ष सामने आएगा, लेकिन किसान नेता इससे इत्तेफाक नहीं रखते..

जनज्वार। नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन आज 36 वें दिन तक पहुंच गया है। केंद्र सरकार के साथ किसान संगठनों की अबतक हुई वार्ता का कोई खास फलाफल नहीं दिख रहा। वैसे 30 दिसंबर को छठे दौर की जो वार्ता हुई, उसमें केंद्र सरकार द्वारा किसानों की दो बड़ी मांगों को मानने की बात कही गई है, हालांकि दो प्रमुख मांगों, जो एमएसपी पर कानून बनाने और कृषि कानूनों को वापस लेने से संबंधित हैं, उनपर कोई सहमति नहीं बन सकी है।

ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि किसान नए साल में भी दिल्ली बार्डर पर डटे रहेंगे, चूंकि अगली वार्ता अब नए साल के पहले हफ्ते यानि 4 जनवरी को होनेवाली है। सवाल उठता है कि आखिर इन दो मांगों को लेकर क्या जिच है?

30 दिसंबर की वार्ता के बाद जहां सरकार द्वारा कहा गया कि बातचीत सकारात्मक रही और जल्द ही इसका अच्छा निष्कर्ष सामने आएगा। लेकिन किसान नेता इससे इत्तेफाक नहीं रखते।

वार्ता के दौरान सरकार ने यह साफ कर दिया है कि पराली के कानून से किसानों को अलग रखा जाएगा। इसके साथ ही आने वाले बिजली बिल के कानून को लेकर भी सरकार ने स्पष्ट किया कि उसमें किसानों की मांगों को ध्यान में रखा जाएगा। जबकि एमएसपी पर लिखित आश्वासन और कृषि कानूनों को वापस लेने के मसले पर कोई नतीजा नहीं निकल सका है।

किसान संघर्ष समन्वय समिति के किसान नेता गुरनाम चढ़ूंनी मानते हैं कि अगली बैठक में सरकार बाकी मांगों पर भी मान जाए, यह कहना मुश्किल है, चूंकि अब भी आंदोलन की दो सबसे बड़ी मांगें नहीं मानी गई हैं। एमएसपी पर लिखित गारंटी और तीनों नए कानूनों को रद्द करने की मांग पर सरकार ने अभी कोई संकेत नहीं दिया है। अगली बैठक में भी सरकार इस पर तैयार होती नजर नहीं आ रही।

चढ़ूंनी कहते हैं कि 4 जनवरी को होने वाली बैठक में भी अगर सरकार सिर्फ नए कानूनों में संशोधन का ही प्रस्ताव रखने जा रही है, तो इसका कोई फायदा नहीं है क्योंकि इन कानूनों के पूरी तरह रद्द होने से पहले किसान अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे।

वहीं क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने कहा कि तीनों कानूनों के वापस लिए जाने को लेकर अब भी संदेहास्पद स्थिति है। इसके साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुद्दे पर सरकार के साथ आम सहमति नहीं बना सके। पराली जलाने के मुद्दे पर सरकार किसानों को जुर्माने से बाहर करने पर सहमत हो गई।

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा 'मुझे इस बात की खुशी है कि किसान यूनियन के नेताओं ने आंदोलन में पर्याप्त अनुशासन बनाए रखने का प्रयत्न किया है। मुझे विश्वास है कि वे आगे भी ऐसा करेंगे।' तोमर ने कहा कि हम चार जनवरी को दोपहर दो बजे एक बार फिर इकट्ठा होंगे और एमएसपी पर चर्चा को आगे बढ़ाएंगे।

बैठक के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री तोमर ने कहा कि हम पहले भी कहते रहे हैं कि एमएसपी जारी है, जारी रहेगी। लिखित में भी देने को तैयार है। लेकिन किसानों को लगता है कि एमएसपी को कानूनी दर्जा मिलना चाहिए। इसपर अभी पूरी चर्चा बाकी है।

उधर किसानों की होनेवाली ट्रैक्टर रैली को फिलहाल टाल दिया गया है। 31 जनवरी को किसान एक बड़ी ट्रैक्टर रैली करने वाले थे, लेकिन सरकार से हुई बातचीत को देखते हुए किसानों ने फिलहाल इसे टाल दिया है।

किसान नेताओं का कहना है कि 4 जनवरी को होने वाली अगली बैठक में अगर बाकी शर्तों पर सहमति नहीं बनी, तो वे यह रैली करेंगे। किसान नेताओं का कहना है कि 30 दिसंबर की बातचीत के बाद भी फिलहाल आंदोलन में कोई बदलाव नहीं होगा और नए साल पर वे दिल्ली के बॉर्डर पर ही डटे रहेंगे।

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