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किसान आंदोलन को रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने बर्बाद की सरकारी संपत्ति और जनता के संसाधन

Janjwar Desk
27 Nov 2020 7:48 AM GMT
किसान आंदोलन को रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने बर्बाद की सरकारी संपत्ति और जनता के संसाधन
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किसानों ने जनज्वार को बताया कि जिस तरह से मीडिया संस्थान बता रहे हैं कि किसान अपने घरों को वापस जा रहे हैं और यहां सैकड़ों ही किसान हैं ,जबकि हकीकत यह है कि यहां हजारों की संख्यया में किसान हैं....

जींद। तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान हरियाणा के विभिन्न इलाकों से राजधानी दिल्ली के लिए कूच कर चुके हैं। इस दौरान किसान आंदोलनकारियों को रास्ते में ही रोकने के लिए पुलिस की ओर से हर तरह की कोशिश की जा रही है। पुलिस बल की ओर से कहीं बैरीकैड लगाए गए हैं तो कहीं कटीले तार बिछाए जा रहे हैं। कहीं बड़े आकार के पत्थर सड़कों पर लगा दिए हैं तो कहीं रेत के ढेले भी लगा दिए गए हैं, कहीं गढ्ढे खोदे गए हैं।

किसान आंदोलन में शामिल एक किसान ने 'जनज्वार' को बताया कि आंदोलनकारियों को रोकने के लिए सड़क के दोनो किनारे रेत के ढेले लगा रहे थे। सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान खुद सरकार कर रही है। ये लोग यहां दो तीन दिनों से धरने पर बैठे थे। जिस तरह से मीडिया संस्थान बता रहे हैं कि किसान अपने घरों को वापस जा रहे हैं और यहां सैकड़ों ही किसान हैं ,जबकि हकीकत यह है कि यहां हजारों की संख्यया में किसान हैं। दो सौ से ज्यादा ट्रैक्टर गिन चुका हूं जो किसानों से भरे हुए हैं।


किसानों ने जनज्वार को बताया कि ये किसान पंजाब के संगरूर, पटियाला आदि जिलों से यहां आए हैं। इसके साथ ही हरियाणा के जींद, रोहतक आदि जिलों से किसान भी पहुंचे हैं। आसपास के गांवों के लोग भी सहयोग कर रहे हैं। सड़कों को अवरुद्ध किए जा रहा है इसलिए किसानों दूसरे रास्तों से दिल्ली पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

जनज्वार की टीम किसानों के इस आंदोलन को लगातार कवर कर रही है।


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