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हिंदू भारत' किसी भी तरह से हिंदू नहीं होगा, बल्कि 'संघी हिंदुत्व राज्य' होगा- शशि थरूर

Janjwar Desk
31 Oct 2020 2:08 PM GMT
हिंदू भारत किसी भी तरह से हिंदू नहीं होगा, बल्कि संघी हिंदुत्व राज्य होगा- शशि थरूर
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शशि थरूर ने कहा कि हिंदुत्व आंदोलन की जो बयानबाजी है उससे उसी कट्टरता की गूंज सुनाई देती है जिसको खारिज करने के लिए भारत का निर्माण हुआ था.....

नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने एक बार फिर 'हिदुंत्व' का मुद्दा उठाया है। थरूर ने हिंदुस्तव को 1947 की मुस्लिम सांप्रदायिकता का प्रतिबिंब करार दिया है और कहा है कि इसकी सफलता का मतलब यह होगा कि भारत की अवधारण का अंत हो गया। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व कोई धार्मिक नहीं बल्कि राजनीतिक सिद्धांत है। थरूर की नई किताब 'द बैटल ऑफ बिलॉंगिंग' का आज विमोचन हुआ। इस दौरान उन्होंने कहा कि हिंदू भारत किसी भी तरह से हिंदू नहीं होगा बल्कि संघी हिंदुत्व राज्य होगा जो पूरी तरह से अलग तरह का देश होगा।

थरूर ने कहा कि मेरे जैसे लोग जो अपने प्यारे भारत को संजोए रखना चाहते हैं उनकी परवरिश इस तरह हुई है कि वे धार्मिक राज्य का तिरस्कार करें। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदुत्व आंदोलन की जो बयानबाजी है उससे उसी कट्टरता की गूंज सुनाई देती है जिसको खारिज करने के लिए भारत का निर्माण हुआ था।

कांग्रेस नेता ने अपनी नई किताब में हिंदुत्व के अलावा नागरिकता कानून (सीएए) की भी आलोचना की है। उनका कहना है कि ये भारतीयता के बुनियादी पहलू के लिए चुनौती है। अपने पुराने हिंदू-पाकिस्तान वाले बयाने को लेकर उन्होंने कहा कि मैने सत्ताधारी पार्टी की ओर से पाकिस्तान का हिंदुत्व वाला संस्करण बनाने के प्रयास की निंदा की थी क्योंकि इसके लिए हमारा स्वतंत्रता आंदोलन नहीं था और न ही यह भारत की अवधारणा है जिसे हमारे संविधान में समाहित किया गया।

अपनी किताब में उन्होंने लिखा है कि यह सिर्फ अल्पसंख्यकों के बारे में नहीं है जैसा भाजपा हमें मनवाना चाहेगी। मेरे जैसे बहुत सारे गौरवान्वित हिंदू हैं जो अपनी आस्था के समावेशी स्वभाव को संजोते हैं और अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान के लोगों की तरह असहिष्णु एव एक धर्म आधारित राज्य में रहने का इरादा नहीं रखते। हिंदुत्व हिंदू धर्म नहीं है। यह एक राजनीतिक सिंद्धांत है, धार्मिक नहीं है।

नागरिकता कानून को लेकर उन्होंने कहा कि यह पहला कानून है जो देश की उस बुनियाद पर सवाल करता है कि धर्म हमारे पड़ोस और हमारी नागरिकता को तय करने का पैमाना नहीं हो सकता।

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