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अपनी मर्जी से लड़की शादी व धर्म परिवर्तन करती है तो अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती है : कलकत्ता हाईकोर्ट

Janjwar Desk
23 Dec 2020 2:13 PM GMT
अपनी मर्जी से लड़की शादी व धर्म परिवर्तन करती है तो अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती है : कलकत्ता हाईकोर्ट
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Kalkatta High Court. 

कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक लड़की की पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा है कि अगर वयस्क लड़की स्वेच्छा से शादी करती है और अपना धर्म परिवर्तन कर लेती है तो इस मामले में अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती है...

जनज्वार। लव जिहाद और शादी को लेकर धर्म परिवर्तन व शादी के बाद धर्म परिवर्तन की चर्चा के बीच कलकत्ता हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कलकत्ता हाइकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा है कि अगर कोई वयस्क लड़की अपनी पसंद से शादी और धर्म परिवर्तन करती है तो इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है। अदालत ने यह टिप्पणी एक पिता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की।

न्यायमूर्ति संजीव बनर्जी और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने इस मामले में की याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को कहा कि अगर कोई बालिग लड़की अपनी पसंद से शादी करती है और धर्म परिवर्तन का फैसला करती है और पिता के घर लौटने से इनकार कर देती है तो वह ऐसे मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।

लड़की के पिता ने दायर याचिका में दावा किया था कि उनकी बेटी को दूसरे धर्म के व्यक्ति से शादी करने के लिए अनुचित रूप से प्रभावित किया गया है। उक्त व्यक्ति ने अपनी 19 वर्षीया बेटी के अपनी पसंद के व्यक्ति से शादी करने के खिलाफ अदालत में याचिका दायर कर शिकायत की थी कि उनकी बेटी ने जो बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराया है, वह हो सकता है कि ऐसे माहौल में दर्ज कराया गया हो जिसमें वह सहज नहीं महसूस कर रही हो।

लड़की के पिता द्वारा मामले में प्राथमिकी दर्ज कराए जाने के बाद उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था। इस दौरान लड़की ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया कि उसने अपनी मर्जी से शादी की है।

पिता की शिकायत के बाद अदालत ने आदेश दिया कि युवती को तेहट्टा में वरिष्ठतम अतिरिक्त जिला न्यायाधीश से भेंट करायी जाए और इस बात का पूरा ख्याल रखा जाए कि उस पर कोई अनुचित दबाव न बनाया जाए।

कई राज्य धर्मांतरण के लिए शादी पर बना रहे हैं कानून

भाजपा शासित कई राज्य शादी के बाद धर्मांतरण को लेकर कानून बना रहे हैं। इसमें मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश आगे है। मध्यप्रदेश में तो इस संबंध में विधेयक भी तैयार है, जबकि उत्तरप्रदेश सरकार ने प्रस्ताव को मंजूरी दी है। वहीं, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश व कर्नाटक जैसे राज्यों में इस तरह का कानून बनाने की चर्चा है।

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