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Indian Army Agniveer Recruitment : बहाली नहीं होने से हर महीने सेना से कम हो रहे 5000 हजार जवान, क्या अग्निवीर स्कीम से मिलेगी मदद?

Janjwar Desk
14 Jun 2022 2:30 PM GMT
Indian Army Agniveer Recruitment : बहाली नहीं होने से हर महीने सेना से कम हो रहे 5000 हजार जवान, क्या अग्निवीर स्कीम से मिलेगी मदद?
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Indian Army Agniveer Recruitment : बहाली नहीं होने से हर महीने सेना से कम हो रहे 5000 हजार जवान, क्या अग्निवीर स्कीम से मिलेगी मदद?

Indian Army Agniveer Recruitment : अग्निवीर स्कीम के बारे में लिखते हुए उन्होंने बताया है कि Tour of Duty स्कीम की मूल विशेषता यह है कि जिन जवानों को सेना में ​अग्निवीर के नाम से जाना जाएगा, उन्हें चार साल के कॉन्ट्रैक्ट पर भर्ती किया जाएगा...

Indian Army Agniveer Recruitment : भारतीय सेना में दो साल से ज्यादा समय से कोई भर्ती (Indian Army Agniveer Recruitment) नहीं हुई है। इस दौरान भर्ती रैली नहीं होने का मूल कारण कोविड 19 महामारी का माना जाता है। वर्तमान में सेना के पास एक लाख से ज्यादा सैनिकों की कमी है। यह कमी हर महीने 5000 से ज्यादा जवानों की दर से बढ़ रहे हैं। ये बातें लिखी हैं मेजर जनरल सेवानिवृत्त एके सिवाच ने (Indian Army Agniveer Recruitment) मनीकंट्रोल के लिए। वे भारतीय सेना से 36 वर्षों तक जुड़े रहे हैं। वह टेरिटोरियल आर्मी के प्रमुख भी रह चुके है। उन्हें युद्ध सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है।

अग्निवीर स्कीम के बारे में लिखते हुए उन्होंने बताया है कि टूर आॅफ ड्यूटी स्कीम की मूल विशेषता यह है कि जिन जवानों को सेना में ​अग्निवीर के नाम से जाना जाएगा, उन्हें चार साल के कॉन्ट्रैक्ट पर भर्ती किया जाएगा। इस दौरान पहले छह महीने उनकी बेसिक ट्रेनिंग होगी और बाकी साढ़े तीन साल वे युद्ध के माहौल में काम करेंगे । इस योजना के पहले फैज में साढ़े 17 साल से 21 साल की उम्र के लगभग 40 से 45 हजार जवानों की भर्ती होने की संभावना है। चार साल के कॉन्ट्रैक्ट के बाद उन्हें पर्याप्त ग्रेच्युटी, स्किल सर्टिफिकेट और दूसरे लाभों के साथ रिटायर कर दिया जाएगा।

हालांकि, इनमें से 25 प्रतिशत को कुछ शर्तों के साथ नियमित सैनिकों (Indian Army Agniveer Recruitment) के रूप में वापस ले लिया जाएगा और वे 15 साल की दोबारा भर्ती सेवा के बाद पेंशन पाने के योग्य होंगे अग्निवीर एक अलग रैंक बनेगी और उनकी वर्दी पर एक विशिष्ट प्रतीक चिन्ह भी होगा। सरकार का इस स्कीम के पीछे सेना को युवा रखना और रक्षा बजट पर पेंशन की देनदारी को कम करना है। चूंकि अग्निवीर युवा, प्रशिक्षित और प्रेरित होंगे। इसलिए वे निश्चित रूप् से अपनी क्षमता, कौशल और अनुभव के आधार पर कॉर्पोरेट जगत और सीएपीएफ समेत सरकार के दूसे अंगों में अच्छी नौकरी पाने भी सक्षम होंगे।

अग्निपथ के इन पहलुओं पर भी विचार जरूरी है

हालांकि ज्यादातर दिग्गजों को लगता है कि ऐसी योजना (Indian Army Agniveer Recruitment) मनचाहे नतीजे देने में विफल होगी और लंबे समय में इससे फायदा मिलने के बजाए नुकसान ज्यादा होगा। इसके पीछे उनका तर्क है कि भारतीय सेना नाम, नमक और निशान के मजबूत लोकाचार पर काम करती है। जबकि ये युवा, जो केवल चार साल की छोटी अवधि के लिए शामिल होंगे। उनमें अपर्याप्त ट्रेनिंग और उनके भविष्य अनिश्चितता के कारण अदम्य भावना की कमी हो सकती है। इससे सीएपीएफ को न केवल अच्छी तरह से प्रशिक्षित, प्रेरित और अनुभवी सैनिक मिलेंगे, बल्कि आगे चल कर ट्रेनिंग पर उनके खर्च को भी कम किया जा सकेगा।

पिछले कुछ अनुभवों के बाद, ऐसा देखा गया है कि नौकरी की जरूरत, तकनीकी विशेषज्ञता और काम करने के ढंग बहुत अलग होने के कारण कॉर्पोरेट वर्ल्ड ऐसे युवकों को अपनी दुनिया में शायद ही शामिल कर पाएगा। उस स्थिति में, ये अच्छी तरह से प्रशिक्षित युवा (Indian Army Agniveer Recruitment) सुरक्षा से जुड़े छोटे-मोटे काम करेंगे या फिर असामाजिक गतिविधियों की ओर रुख कर सकते हैं।

नफा-नुकसान का भी ध्यान रखा जाए

सभी नफा-नुकसान को ध्यान में रखते हुए सरकार को सेना पर अप्रमाणित प्रयोग जल्दबाजी में नहीं करनी चाहिए। वो भी तब जब हाल के दिनों में हमारी उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर खतरा कई गुना बढ़ गया है। रूस युक्रेन युद्ध ने भी साफ चेतावनी दे दी है कि रूसी सैनिक, जो तो से तीन साल तक सेना में थे, वे भी युद्ध क्षेत्र में बहुत अच्छे और प्रभावी लड़ाकू सैनिक (Indian Army Agniveer Recruitment) साबित नहीं हो पाए हैं। Tour of Duty या अग्निपथ के मॉडल का पहले से ज्यादा विस्तार से विश्लेषण करना सही हो सकता है। ऐसे में सरकार को यह सलाह दी जाती है कि कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद उन सैनिकों को सीएपीएफ में शामिल करने पर विचार किया जाए। इसके अलावा एक सलाह ये भी है कि एक झटके में इस नई योजना को पूरी तरह से लागू करने के बजाए, शुरुआत में इसे एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लाना चाहिए, जिसका बाद में राष्ट्र की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता हैं

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