क्या मंत्रियों की अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रतिबंध संभव है, 15 नवंबर को SC की 5 जजों की पीठ करेगी सुनवाई

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नई दिल्ली। मंत्रियों की अभिव्यक्ति की आजादी ( freedom of speech ) पर रोक लगाना संभव है या नहीं, विषय पर लंबे अरसे से बहस जारी है। इस विषय को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme court ) में 27 सितंबर को संक्षित्प बहस हुई। अब पांच जजों की संवैधानिक पीठ ( five judges bench ) 15 नवंबर को इस मसले पर सुनवाई करेगी।
एक दिन पहले जस्टिस एस अब्दुल नजीर सहित न्यायमूर्ति बीआर गवई, एएस बोपन्ना, जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम और जस्टिस बीवी नागरत्ना की अदालत में इस मसले पर सुनवाई हुई। पीठ ने इस बात के संकेत दिए हैं कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19-1ए के तहत भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार पर प्रतिबंध केस टू केस के लगाया जा सकता है।
दरअसल, यह मामला अदालत के सामने विचार के लिए उस समय आया था जब बुलंदशहर सामूहिक बलात्कार की घटना को लेकर उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्य मंत्री और समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान ने कहा था कि यह मामला राजनीतिक साजिश के अलावा कुछ नहीं है। उनके इस बयान के खिलाफ पीड़ित पक्ष ने खान के खिलाफ याचिका दायर कर कार्रवाई की मांग की थी।
उस समय अदालत ने इस बात को ध्यान में रखते हुए आजम खान को बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ( Supreme court ) ने माना था कि यह मामला राज्य के दायित्व और भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बारे में गंभीर चिंताओं को उठाता है। कोर्ट के सामने ये भी अहम प्रश्न है कि क्या अभिव्यक्ति के अधिकार को इस आधार पर छीना जा सकता है कि वह किसी के सम्मान को ठेस पहुंचा रहा है।
इस मसले पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि यह मामला चार अहम सवालों से भी जुड़ा है। इनमें:
1. क्या अनुच्छेद 19-1ए के तहत भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार पर कोई प्रतिबंध लगाया जा सकता है। अनुच्छेद 19-2 के तहत पहले से ही उल्लिखित प्रतिबंधों को छोड़कर। यदि हां तो किस हद तक ऐसा करना संभव है?
2. क्या अनुच्छेद 19-1ए पर अधिक प्रतिबंध लगाया जा सकता है, यदि यह उच्च पद धारण करने वाले व्यक्तियों से संबंधित है?
3. क्या अनुच्छेद 12 के अनुसार राज्य की परिभाषा के तहत शामिल नहीं किए गए व्यक्तियों और निजी निगमों के खिलाफ अनुच्छेद 21 लागू किया जा सकता है?
4. क्या राज्य वैधानिक प्रावधानों के तहत व्यक्तियों के खिलाफ कार्यवाही कर सकता है?











