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खबर का असर : पुलिस की लापरवाही से हुई थी BHU छात्र शिव की मौत, थाना प्रभारी समेत 8 पुलिसकर्मियों पर गैरइरादतन हत्या का मुकदमा

Janjwar Desk
20 Aug 2022 10:35 AM IST
Varanasi Crime News : शिव कुमार को 2 साल पहले BHU कैंपस से उठा ले गई थी पुलिस, कोर्ट में बोलीं- वह जिंदा नहीं
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Varanasi Crime News : शिव कुमार को 2 साल पहले BHU कैंपस से उठा ले गई थी पुलिस, कोर्ट में बोलीं- वह जिंदा नहीं

Janjwar Impact Shiv Kumar Trivedi death case : सीबीसीआईडी की जांच में उजागर हुआ कि लंका पुलिस की लापरवाही के चलते ही शिव कुमार त्रिवेदी की मौत हुई, इस मामले में 8 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया....

उपेंद्र प्रताप की रिपोर्ट

Janjwar Impact Shiv Kumar Trivedi death case : उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय ;बीएचयूद्ध के छात्र शिव कुमार त्रिवेदी के मामले में 916 दिन बाद लंका थाना पुलिस की पोल खुल ही गई। छात्र के लापता और फिर मौत मामले को लेकर जनज्वार ने प्रमुखता से खबर को प्रकाशित किया था। जनज्वार के संपादक अजय प्रकाश ने पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता सौरभ तिवारी से सीधे तौर पर बातचीत कर केस के अहम बिंदुओं को बारीकी से भी उजागर किया था। फलस्वरूप, सीबीसीआईडी की जांच में उजागर हुआ कि लंका पुलिस की लापरवाही के चलते ही शिव कुमार त्रिवेदी की मौत हुई। इस मामले में शुक्रवार 19 अगस्त को लापरवाह आठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया।

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यह मुकदमा सीबीसीआईडी (क्राइम ब्रांच क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट) के इंस्पेक्टर श्यामदास वर्मा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर लंका थाने में दर्ज कराया है। यह कार्रवाई लंका थाने से ढाई साल पहले गायब हुए और फिर मृत मिले बीएचयू के छात्र शिव के मामले में हुई है। इस मुकदमे में तत्कालीन लंका इंस्पेक्टर भारत भूषण तिवारी, दरोगा प्रद्युम्न मणि त्रिपाठी, दरोगा कुंवर सिंह, हेड कांस्टेबल लक्ष्मीकांत मिश्राए कांस्टेबल ओम कुमार सिंह, शैलेंद्र कुमार सिंह, विजय कुमार यादव और होमगार्ड संतोष कुमार आरोपी बनाए गए हैं।

Varanasi Crime News : शिव कुमार को 2 साल पहले BHU कैंपस से उठा ले गई थी पुलिस, अब कोर्ट में बोली- वह जिंदा नहीं

अब 8 पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज होने के बाद शिव के पिता के साथ ही आंदोलनरत छात्रों में न्याय की उम्मीद एक बार से जगी है। हालांकिए छात्र शिव की मौत किस प्रकार हुई और इसकी थ्योरी क्या है, अब तक पुलिस या जांच टीम नहीं प्रस्तुत कर सकी है। इधर, लंका थाने के 8 पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज होने के बाद आगे होने वाली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

माना जा रहा है कि यह कानूनी प्रक्रिया लंबी चलने वाली है और एक के बाए एक कई खुलासे भी होंगे, लेकिन उसकी मौत की चार माह पहले जो कहानी सामने आई थी वो रोंगटे खड़े कर देने वाली है। 13 फरवरी 2020 की रात डायल 112 नंबर पर फोन कर बुलाई गई पुलिस उसे कैंपस से उठाकर ले जाती है। लंका थाने को सुपुर्द करती है और फिर दो साल तक शिव का कुछ पता नहीं चलता। शिव के पिता के लंबे संघर्ष के बाद इसी वर्ष अप्रैल में इलाहाबाद हाईकोर्ट में सीबीसीआईडी ने रिपोर्ट पेश कर बीएचयू वाराणसी के लापता छात्र की मौत की जानकारी दी।

सीबीसीआईडी ने क्यों दर्ज कराया मुकदमा

सीबीसीआईडी के इंस्पेक्टर श्यामदास वर्मा और चिकित्सकीय विशेषज्ञ के बयान से स्पष्ट है कि शिव मानसिक रूप से अस्वस्थ था। जिस रात वह लंका थाना लाया गया था। वह अपना नाम पता नहीं बता पा रहा था। ऐसी स्थिति में लंका थाने के पुलिस कर्मियों का यह नैतिक और राजकीय कर्तव्य था कि उसे पर्याप्त चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराते। मगर, ऐसा नहीं किया गया। शिव जब लंका थाने से गायब हुआ तो लंका थाने के पुलिस कर्मियों द्वारा उसे खोजने का प्रयास नहीं किया गया।

इस संबंध में सीनियर अफसरों को भी कोई सूचना नहीं दी गई। अगर शिव को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई होती या उसे खोजने का प्रयास तत्काल शुरू किया गया होता तो शायद वह तालाब में न डूबता। लंका थाने के पुलिसकर्मियों ने अपने कर्तव्यों के निर्वहन में घोर लापरवाही बरती।

पुलिस की पटकथा फ्लॉप, पुलिसया टार्चर में मौत का दावा

शिव के पिता प्रदीप दावा करते हैं, 'मेरा बेटा लापता नहीं हुआ था। उसे थाने लाकर टॉचर्र किया गया। पुलिसिया मारपीट से ही मेरे बेटे की जान चली गई और अब पुलिस ने नई कहानी यह गढ़ी है कि उसकी मौत डूबने से हुई है। नंगा सच यह है कि मेरे बेटे की मौत के मामले में पलीता लगाने के लिए पुलिस ने ऐसी पटकथा लिख डाली जो किसी के गले आसानी से नहीं उतर रही।'

वहीं, शिव के पिता प्रदीप त्रिवेदी के अधिवक्ता सौरभ तिवारी भी पुलिस की कहानी को सच नहीं मानते। वह जनज्वार को बताते हैं कि 'जब पुलिस पीआरवी ने छात्र को कैंपस से उठाया तो थाने की जीडी में इसका जिक्र क्यों नहीं किया गया? आरटीआई से मांगी गई जानकारी में तीनों कैमरों के एक्टिव होने की बात सामने आई है तो पुलिस कैंमरों के बंद होने की बात क्यों कह रही है?'

हाईकोर्ट ने पकड़ लिया पुलिस का झोल

लंका थाना पुलिस का झोल इलाहाबाद हाईकोर्ट ;।ससींंइंक भ्पही ब्वनतजद्ध ने पकड़ लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में पुलिस ने अपना पक्ष रखते हुए कहा, 'लंका थाने समीप गंगा उस पार रामनगर में एक तालाब के पास लावरिश लाश मिली थी, जो शिव की थी। 13-14 फरवरी 2020 की रात थाने के कैमरे बंद थे, जिससे यह पता नहीं चल सका कि वह कब और कैसे लापता हो गया?'

पुलिस के मुताबिक 13.14 फरवरी 2020 की रात लंका थाने से शिव गायब हो गया था। दो साल बाद लंका थाना पुलिस ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में बयान में स्वीकारा है कि शिव की मौत तालाब में डूबने की वजह से हुई थी।

छात्र के मौत का पूरा मामला

शिव कुमार त्रिवेदी बीएससी सेकंड ईयर का स्टूडेंट था। रिपोर्ट के मुताबिक तबियत ठीक न होने से वह 13-14 फरवरी 2020 की रात बीएचयू कैंपस में एक नाले के पास बैठा था। उसके सीनियर एमएससी के स्टूडेंट अर्जुन सिंह उसे नशेड़ी समझ बैठे और पुलिस को फोन कर दिया। उसी रात लंका थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और उसे उठाकर थाने ले गई। उसके बाद से शिव का कहीं अता-पता नहीं चला। उसके पिता प्रदीप त्रिवेदी मध्यप्रदेश के पन्ना जिले से अपने बेटे की खोज-खबर लेने बनारस पहुंचे। काफी ढूंढने के बाद शिव के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली। बनारस पुलिस की धीमी जांच और फिसड्डी प्रगति रिपोर्ट को देखते हुए यूपी गृह मंत्रालय ने मामले को सीबीसीआईडी को सौंप दिया।

हाईकोर्ट में लंका पुलिस का पक्ष

4 नवबंर 2020 को सीबीसीआईडी ने जांच की कमान संभाली और दो जांच टीमें गठित कर हरकत में आ गई। करीब 10 महीनों बाद दिसंबर 2021 में बनारस के रामनगर में तालाब के पास लावारिश लाश मिली। पिता प्रदीप ने फोटो और कपड़ों के आधार पर पहचान की तो वह लाश शिव की होना स्वीकार किया। इलाहाबाद हाईकोर्ट में अप्रैल 2021 में डीएनए रिपोर्ट पेश की गई। पुलिस ने कहा कि शिव थाने से रात में लापता हो गया और रामनगर के तालाब में डूबकर उसकी मौत हो गई।

कब क्या हुआ

◉ 12 फरवरी 2020 को परिवार वालों से आखिरी बार शिवकुमार से बात हुई थी।

◉ 13 फरवरी 2020 को बीएचयू खेल मैदान से पुलिस लंका थाने ले आई।

◉ 14 फरवरी 2020 को उसके लंका थाने से लापता होने की सूचना मिली।

◉ 15 फरवरी 2020 को रामनगर में पोखरी में डूबने से उसकी मौत हो गई।

◉ 19 अगस्त 2022 को लंका थाने के 8 पुलिसकर्मियों पर मुकदमा।

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