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Baldev Murmu News: क्या कल बलदेव मुर्मू को झारखंड पुलिस दुर्दांत माओवादी घोषित करने वाली है?

Janjwar Desk
31 Jan 2022 11:48 AM GMT
Baldev Murmu News: क्या कल बलदेव मुर्मू को झारखंड पुलिस दुर्दांत माओवादी घोषित करने वाली है?
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Baldev Murmu News: क्या कल बलदेव मुर्मू को झारखंड पुलिस दुर्दांत माओवादी घोषित करने वाली है?

Baldev Murmu News: 29 जनवरी को 11 बजे बालदेव मुर्मू को हजारीबाग जिला के बिष्णुगढ़ थानान्तर्गत उनके गांव से बिष्णुगढ़ थाना की पुलिस हिरासत में लेती है और बिष्णुगढ़ थाना के लॉकअप में बंद कर देती है।

रांची से रूपेश कुमार सिंह की रिपोर्ट

Baldev Murmu News: 29 जनवरी को 11 बजे बालदेव मुर्मू को हजारीबाग जिला के बिष्णुगढ़ थानान्तर्गत उनके गांव से बिष्णुगढ़ थाना की पुलिस हिरासत में लेती है और बिष्णुगढ़ थाना के लॉकअप में बंद कर देती है। जब उनके गांव वालों व परिजनों को इस बात का पता चलता है, तो वे लोग थाना पहुँचते हैं और बालदेव मुर्मू का जुर्म पूछते हैं। थाने में मौजूद पुलिस अधिकारी कहते हैं कि बड़ा साहब यानी एसपी के आदेश पर गिरफ्तार किये हैं। वे रात में आएंगे, तो पूछताछ करेंगे। ग्रामीणों को अगले दिन आने बोलते हैं।

बालदेव मुर्मू के परिजन व 25-30 ग्रामीण फिर 30 जनवरी को 10 बजे बिष्णुगढ़ थाना पहुँचते हैं, तो उन्हें कहा जाता है कि अभी तक एसपी नहीं आए हैं, आज रात में एसपी आएंगे, इसलिए आपलोग कल आइये। ग्रामीण पुलिस के झांसे में आकर गांव लौट जाते हैं। गांव आने के बाद उन्हें पता चलता है कि पुलिस आज भी गांव आयी थी और आदिवासी मूलवासी विकास मंच के सचिव विजय मुर्मू के घर में बिना किसी सर्च वारंट के सर्च किया और कुछ किताबें भी ले गये हैं। साथ ही विजय मुर्मू व उनके चाचा अर्जुन मुर्मू को भी खोज रहे थे।


पुलिस के कहे अनुसार आज यानी 31 जनवरी को फिर ग्रामीण व बालदेव मुर्मू के परिजन थाना पहुंचे, तो वहाँ लॉकअप में बालदेव था ही नहीं और बालदेव के बारे में कोई भी अधिकारी बताने के लिए भी तैयार नहीं था। बहुत मनुहार करने पर सिर्फ यह पता चला कि रात में ही बालदेव मुर्मू को यहाँ से ले जाया गया है। अभी से कुछ देर पहले जब झारखंड जन संघर्ष मोर्चा के संयोजक Bacha Singh ने थाने पर फोन करके पूछा, तो उन्हें छोटा दारोगा ने बताया कि रात में राँची से स्पेशल टीम आयी थी, जो बालदेव मुर्मू को साथ में ले गये हैं। पुलिस अधिकारी ने यह भी बताया कि बालदेव के उपर स्थानीय थाना में कोई मुकदमा नहीं है।

वैसे आज बालदेव मुर्मू के परिजनों ने राँची उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को ईमेल के माध्यम से पूरी घटना से अवगत कराया है और बालदेव मुर्मू को अविलंब परिजनों को सौंपने का मांग किया है।

अब सवाल उठता है कि आखिर सारे कानून को ताक पर रखकर झारखंड पुलिस कैसे किसी भी आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता को बिना कोई मुकदमा दर्ज किये तीन दिनों से हिरासत में रख सकती है? क्या कल बालदेव मुर्मू को झारखंड पुलिस दुर्दांत माओवादी घोषित करने वाली है और यह सब उसी की पृष्ठभूमि है?

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