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झारखंड : 'विवादित' लैंड म्यूटेशन बिल पर विपक्ष व सिविल सोसाइटी के हमले झेल रही हेमंत सरकार ने दी सफाई

Janjwar Desk
14 Sep 2020 6:01 PM GMT
झारखंड : विवादित लैंड म्यूटेशन बिल पर विपक्ष व सिविल सोसाइटी के हमले झेल रही हेमंत सरकार ने दी सफाई
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सोमवार को उपराजधानी दुमका के दौरे के दौरान लोगों की समस्याएं सुनते मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन।  फोटो स्त्रोत : JIPRD.

झारखंड में जमीन हमेशा से बेहद संवेदनशील मुद्दा रहा है। उस पर प्रस्तावित कानून के तहत उससे संबंधित कार्याें में जुड़े राजस्व अधिकारियों के खिलाफ शिकायत, केस या एफआइआर कराने से कथित रूप से छूट देने को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है...

जनज्वार, रांची। झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झामुमो-कांग्रेस सरकार ने एक ऐसा लैंड म्यूटेशन बिल तैयार किया है जिस पर राज्य में विवाद छिड़ गया है। जल, जंगल और जमीन के नाम पर चुनाव लड़ने वाले झामुमो को राज्य में इस बिल को लेकर काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जमीन के मुद्दे पर हमेशा झामुमो के हमले का सामना करने वाली भाजपा व उसके पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास अब इस मुद्दे को लेकर हेमंत सोरेन सरकार व मुख्य सत्ताधारी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा पर ही हमलावर हैं।

ऐसे में सोमवार की शाम से शुरू हो रहे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के तीन दिवसीय दुमका दौरे से ठीक पहले झारखंड सरकार की ओर से इस मुद्दे पर सफाई दी गई। झारखंड के भू राजस्व सचिव केके सोन ने रांची में एक प्रेस कान्फ्रेंस कर इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखा। दरअसल, संताल परगना झामुमो का प्रमुख राजनैतिक गढ है और मुख्यमंत्री के दुमका आने से पहले आदिवासी समुदाय का एक बड़ा वर्ग इस बिल को वापस लेने व इस पर सरकार के स्पष्टीकरण की मांग कर रहा था। इसके लिए सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से अभियान चलाया जा रहा था।


जमीन और स्थानीयता झारखंड के लिए हमेशा से सबसे संवेदनशील मुद्दा रहा है और ऐसे में सरकार के लिए यह जरूरी था कि वह इस पर अपना पक्ष रखे। यह तब और जरूरी हो जाता है जब चुनाव आयोग यह कह चुका है कि बिहार विधानसभा चुनाव के साथ ही झारखंड की दो विधानसभा सीटों दुमका व बेरमो सहित देश भर की तमाम रिक्त विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराए जाएंगे।

सरकार की ओर से जिस तरह से सफाई पेश की गई है, उससे यह लगता है कि शायद हेमंत सोरेन को यह अहसास हो गया है कि यह बिल सत्ताधारी गठबंधन की चुनावी संभावनाओं को तो फौरी तौर पर नुकसान पहुंचा ही सकता है, साथ ही उस वर्ग को भी नाराज कर सकता है जिसके बूते वह चुनाव जीत सरकार में आयी है। बिहार की तर्ज पर तैयार किए गए इस बिल को 18 सितंबर से शुरू होने जा रहे झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना भी जतायी जा रही है। बिहार सरकार ने 2011 में ऐसा ही बिल तैयार कर उसे विधान मंडल से पारित करवा कर कानून की शक्ल दिया है।


क्या है झारखंड लैंड म्यूटेशन बिल 2020 में?

राज्य के स्थानीय अखबार प्रभात खबर में दो दिन पहले छपी एक खबर के अनुसार, झारखंड लैंड म्यूटेशन बिल 2020 में यह प्रावधान किया गया है कि सीओ सहित भू राजस्व से जुड़े अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की जा सकेगी। सुभद्रा देवी बनाम झारखंड सरकार के बीच उभरे विवाद को लेकर झारखंड सरकार ने बिहार की तर्ज पर म्यूटेशन कानून बनाने का निर्णय लिया और इसी के लिए बिल तैयार किया गया। बिहार सरकार ने लैंड म्यूटेशन एक्ट 2011 बना कर लागू भी कर लिया है। बिहार के कानून में म्यूटेशन, जमा बंदी रद्द करने और किसानों की खाता पुस्तिका आदि के लिए प्रावधान किया गया है। झारखंड सरकार ने भी उसी के अनुरूप बिल तैयार किया है।

झारखंड द्वारा तैयार किए गए बिल में बिहार के प्रमुख प्रावधानों को शामिल किया गया है, लेकिन एक ऐसा प्रावधान है जो बिहार से अलग भी है और उसी पर विवाद उत्पन्न हुआ है। बिहार के कानून में जमीन के मामले में कोई गड़बड़ी होने पर सीओ सहित विभिन्न अधिकारियों के खिलाफ शिकायत करने, एफआइआर करने या न्यायालय में कंप्लेन केस करने का अधिकार दिया गया है, लेकिन झारख्ंाड के बिल में इस अधिकार को समाप्त कर दिया गया है। यानी सीओ से लेकर सभी तरह के राजस्व अधिकारियों के खिलाफ जमीन के मामले में कोई गड़बड़ी होने पर इस बिल के कानून का शक्ल लेने के बाद किसी स्तर पर शिकायत नहीं की जा सकेगी। इस संबंध में बिल की धारा 22 में प्रावधान है। अगर किसी अधिकारी के खिलाफ किसी कोर्ट में इस से संबंधित केस चल रहा है तो वह खत्म हो जाएगा।

भू राजस्व सचिव ने क्या सफाई दी है?

भू राजस्व सचिव केके सोन ने सोमवार को एक प्रेस कान्फ्रेंस कर कहा कि सरकार किसी भी रूप में गलत नीयत से कार्य करने वाले किसी राजस्व अधिकारी को संरक्षण देने का कार्य नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि इस बिल में गलत नीयत से कार्य करने वाले राजस्व प्राधिकारियों के विरुद्ध राज्य सरकार अथवा भारत सरकार के सक्षम प्राधिकार द्वारा यदि पूर्व में अन्वेषण की स्वीकृति प्रदान की जाती है तो वैसी परिस्थिति में राजस्व अधिकारी के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही, सिविल कार्यवाही, विभागीय कार्रवाई अथवा अन्य माध्यम से किसी भी प्रकार की कार्यवाही कभी भी करने के लिए राज्य सरकार स्वतंत्र है।

केके सोन ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक की धारा - 22 में राजस्व अधिकारियों को सरक्षण-सुरक्षा का प्रावधान किया गया है। इस धारा की उपधारा में शासकीय कार्याें के लिए संरक्षण व सुरक्षा प्रदान की गई है।

केके सोन ने कहा कि झारखंड राज्य में लैंड म्यूटेशन का कार्य 1973 के कानून के अनुरूप होता आ रहा है, जिसमें ऑनलाइन दाखिल खारिज इत्यादि का कोई वर्णन नहीं है। इन सभी चीजों में सुधार लाने हेतु राज्य सरकार ने झारखंड लैंड म्यूटेशन बिल 2020 को प्रस्तावित किया है। इस विधेयक में ऑनलाइन दाखिल खारिज एवं लगान भुगतान की व्यवस्था को स्पष्ट किया गया है । प्रस्तावित विधेयक में जमाबंदीए निरस्तीकरण व्यवस्था को स्पष्ट किया जा सके।

राजस्व सचिव ने कहा कि पुराने विधेयक में कई प्रावधान बहुत ही संक्षिप्त एवं अस्पष्ट है जिसे ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित विधेयक में इसे विस्तृत रूप से स्पष्ट किया गया है । इसके साथ.साथ प्रस्तावित विधेयक में राजस्व उप निरीक्षकए अंचल निरीक्षकए अंचल अधिकारीए भूमि सुधार उप समाहर्ता, अपर समाहर्ता, उपायुक्त एवं प्रमंडलीय आयुक्त के लिए समय-सीमा का निर्धारण किया गया है। निर्धारित समय.सीमा से अधिक समय के बाद वादों के निष्पादन वाले मामलों में विलंब के लिए कारणों को स्पष्ट रूप से पारित किये जाने वाले आदेश में उल्लेखित करने एवं बिना कारण के विलंब होने पर संबंधित पदाधिकारियों को उत्तरदायी बनाने का प्रावधान प्रस्तावित विधेयक में किया गया है।

भाजपा व पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास का क्या कहना है?

भाजपा ने इस मुद्दे पर झामुमो-कांग्रेस सरकार पर जोरदार हमला बोला है। भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने इसे काला कानून बताया है और कहा है कि हेमंत सोरेन सरकार जल, जंगल और जमीन की बात कह कर सत्ता में काबिज हुई, लेकिन सरकार अब राज्य में जमीन की लूट मचान के लिए भू माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण देने के लिए राज्य में काला कानून लागू करने की तैयारी कर रही है।

वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा नेता रघुवर दास ने म्यूटिशेन बिल के कैबिनेट ड्राफ्ट की गोपनीय काॅपी ट्वीट करते हुए लिखा कि हेमंत सरकार भू माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों को जमीन की लूट की छूट देना चाहती है। झारखंड लैंड म्यूटेशन बिल को राज्य कैबिनेट की मंजूरी दे दी गई है। गरीबों की जमीन लूटनेवाले इस बिल को मेरी सरकार में दो बार कैबिनेट से लौटाया गया था। वहीं इस सरकार ने इसे लागू करने की तैयारी कर ली है।


रघुवर दास ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, बिल के पास होते ही गलत म्यूटेशन करनेवाले अधिकारी पर मुकदमा दर्ज नहीं होगा। झारखंड में जमीन गड़बड़ियों की लगातार शिकायतें आती हैं, बावजूद यह बिल लाना दुर्भाग्यपूर्ण है। जल, जंगल, जमीन का झूठा नारा देकर लोगों की जमीन लूटवाना ही इस सरकार का असली चेहरा है।



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