झारखंड

Latehar News : ब्रह्मदेव सिंह की हत्या के आरोप में सुरक्षा बल के जवानों के खिलाफ 1 साल बाद FIR, 10 लाख मुआवजे की मांग

Janjwar Desk
29 May 2022 7:38 AM GMT
Latehar News : ब्रह्मदेव सिंह की हत्या के आरोप में सुरक्षा बल के जवानों के खिलाफ 1 साल बाद FIR, 10 लाख मुआवजे की मांग
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Latehar News : ब्रह्मदेव सिंह की हत्या के आरोप में सुरक्षा बल के जवानों के खिलाफ 1 साल बाद FIR, 10 लाख मुआवजे की मांग

Latehar News : सुरक्षा बल के जवानों ने ग्रामीणों को माओवादी समझ फायरिंग की जिसमें ब्रह्मदेव सिंह मौत हुई थी।

Latehar News : घटना करीब एक साल पहले की है। झारखंड ( Jharkhand) के लातेहार ( Latehar ) जिले के गारू थाना क्षेत्र में सरहुल त्योहार मनाने के लिए आसपास के ग्रामीण गनईखाड़ जंगल पहुंचे थे। उसी समय सुरक्षा बलों के जवान भी सर्च अ​भियान के तहत वहां पहुंच गए। सुरक्षा बल के जवानों को लगा कि जंगल में माओवादी हैं। अपने अनुमान को सही मानकर सुरक्षा बल के जवानों ने फायरिंग की, जिसमें ब्रह्मदेव सिंह की गोली लगने से मौत हो गई। फायरिंग की इस घटना में ग्रामीण दीनानाथ भी घायल हुए थे।

करीब एक साल बाद इस मामले में नया मोड़ आ गया है। सालभर चले धरना प्रदर्शन और जन संगठनों के अथक प्रयास के बाद कोर्ट के आदेश पर गारू थाना पुलिस ने आरोपी सुरक्षा बलों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

दरअसल, यह घटना 12 जून, 2021 को झारखंड के लातेहार ( Latehar ) जिलान्तर्गत गारू थाना क्षेत्र के गनईखाल जंगल की है। घटना के दिन पिरी गांव निवासी और खरवार जनजाति के 24 वर्षीय ब्रम्हदेव सिंह समेत कई आदिवासी सरहुल त्योहार मनाने के लिए जंगल में शिकार करने गए थे। जिस समय गांव के लोग गनईखाड़ जंगल में शिकार के लिए घुसे, ठीक उसी समय माओवादी सर्च अभियान के तहत सुरक्षा बल के जवान भी वहां पहुंच गए। गांव के लोगों को माओवादी समझकर सुरक्षा बल के जवानों ने फायरिंग शुरू कर दी।

सुरक्षा बल ( security forces ) की ओर से फायरिंग के दौरान ब्रह्मदेव सिंह सहित अन्य ग्रामीण हाथ उठाकर आवाज देते रहे कि वे लोग माओवादी नहीं हैं। सुरक्षा बलों से ग्रामीण गोली नहीं चलाने की अपील करते रहे, लेकिन उन्होंने उनकी नहीं सुनी। परिणाम यह निकला कि दीनानाथ सिंह के हाथ में गोली लगी और ब्रम्हदेव सिंह की गोली लगने से मौत हो गई। यहां पर यह बता देना जरूरी है कि घटना के समय गारू क्षेत्र के गांव के लोग पारंपरिक भरटुआ बंदूक थी, जिसका इस्तेमाल वे ग्रामीण छोटे जानवरों के शिकार के लिए करते हैं।

मृतक सहित 6 के खिलाफ हुआ था मुकदमा दर्ज

इस घटना के बाद गारू थाना पुलिस ने सुरक्षा बल के जवानों के खिलाफ कार्रवाई करने के बदले मृतक ब्रम्हदेव सिंह सहित 6 लोगों पर विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। इतना ही नहीं, पुलिस ने घटना की गलत जानकारी लिखी और पीड़ितों को ही प्रताड़ित किया। सुरक्षा बल व पुलिसकर्मियों ने हत्या की घटना को गलत तरीके से मुठभेड़ साबित करने की भी कोशिश की। दूसरी तरफ ब्रम्हदेव सिंह की पत्नी जीरामनी देवी की शिकायत पर थाना पुलिस ने ब्रह्मदेव सिंह की हत्या के आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

सुरक्षा बलों के खिलाफ केस दर्ज

गारू थाना पुलिस की इस उपेक्षा के खिलाफ गांव के लोगों सहित कई जनसंगठनों ब्रह्मदेव सिंह को न्याय दिलाने के लिए आन्दोलन छेड़ दिया। झारखंड जनाधिकार महासभा की ओर से मृतक और घायलों को मुआवजा दिलाने के लिए लगातार संघर्ष जारी रहा। लोगों ने थाना पुलिस से लेकर सीएम तक अपनी आवाज पहुंचाई। कानूनी लड़ाई में झारखंड पीयूसीएल (PUCL) ने सहयोग किया। पीयूसीएल ने राज्य सरकार की आदिवासियों के मानवाधिकार उल्लंघनों को रोकने के प्रति प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल खड़े किए़। स्थानीय अदालत से लेकर झारखंड हाईकोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया गया। सुरक्षा बलों और पुलिस के खिलाफ लगातार हो रहे आंदोलन का परिणाम यह हुआ कि लगभग एक साल बाद कोर्ट के आदेश पर गारू थाना पुलिस ने 5 मई 2022 को इस मामले में एफआईआर दर्ज की।

मृतक के परिवार को मिले 10 लाख मुआवजा

जन संगठन झारखंड जनाधिकार महासभा ने झारखंड सरकार से मांग की है कि ब्रम्हदेव सिंह की हत्या की प्राथमिकी पर समयबद्ध और न्यायसंगत कार्रवाई हो। हत्या के लिए ज़िम्मेवार सुरक्षा बल के जवानों व पदाधिकारियों पर दंडात्मक कार्यवाई की जाए। पुलिस द्वारा ब्रम्हदेव समेत छः आदिवासियों पर दर्ज प्राथमिकी को रद्द किया जाए। ब्रम्हदेव की पत्नी को कम से कम 10 लाख रुपए बतौर मुआवज़ा दिया जाए। उनके बेटे की परवरिश, शिक्षा व रोज़गार की पूरी जिम्मेवारी ली जाए।

सुरक्षा एजेंसियां सर्च अभियान से पहले ग्राम सभा से ले इजाजत

Jharkhand News : नक्सल विरोधी अभियानों की आड़ में लोगों को परेशान न किया जाए। केवल फर्जी आरोपों के आधार पर केस दर्ज करने पर रोक लगे। स्थानीय पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि पीड़ितों की शिकायत पर तत्काल मामला दर्ज हो। किसी भी गांव में सर्च अभियान चलाने से पहले ग्राम सभा व ग्राम प्रधानों की सहमति ली जाए। आदिवासी भाषा, रीति-रिवाज, संस्कृति और उनके जीवन-मूल्य स्थानीय पुलिस और सुरक्षा बल के जवानों के प्रशिक्षण का हिस्सा बने।


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