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कंगना राणावत के निशाने पर पहली बार सीधे सोनिया गांधी, इस बार तो मैं 'सोनिया सेना' से बच गई

Janjwar Desk
14 Sep 2020 6:57 AM GMT
कंगना राणावत के निशाने पर पहली बार सीधे सोनिया गांधी, इस बार तो मैं सोनिया सेना से बच गई
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कंगना राणावत ने सीधे तौर पर सोनिया गांधी का नाम लेकर अपनी राजनैतिक महत्वकांक्षाओं का एक तरह से प्रकटीकरण कर दिया है...

जनज्वार। अभिनेत्री कंगना राणावत ने सोमवार को मुंबई से चंडीगढ पहुंचने के बाद पहली बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर निशाना साधा। कंगना राणावत ने मुंबई-महाराष्ट्र में खुद के खिलाफ प्रदर्शन करने वाली शिवसेना कार्यकर्ताओं को सोनिया सेना बताया है। सीधे तौर पर सोनिया गांधी का नाम लेकर अभिनेत्री कंगना राणावत ने अपने राजनैतिक महत्वकांक्षाओं का संकेत दे दिया है।

इससे पहले शनिवार को वे मुंबई में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिलीं थीं। कोश्यारी से मुलाकात के बाद उनके हाथों कमल का फूल था, जिसके कल से ही प्रतीकात्मक मायने तलाशे जा रहे हैं। मालूम हो कि कमल फूल भारतीय जनता पार्टी का चुनाव चिह्न है।

कंगना राणावत ने चंडीगढ एयरपोर्ट पर उतरने के बाद सोमवार को ट्वीट किया: चंडीगढ़ मे उतरते ही मेरी सिक्यरिटी नाम मात्र रह गई है, लोग ख़ुशी से बधाई दे रे रहे हैं, लगता है इस बार मैं बच गई, एक दिन था जब मुंबई में माँ के आँचल की शीतलता महसूस होती थी आज वो दिन है जब जान बची तो लाखों पाए, शिव सेना से सोनिया सेना होते ही मुंबई में आतंकी प्रशासन का बोल बाला।



इसके साथ ही उन्होंने एक और ट्वीट किया है, दिल्ली के दिल को चीर के वहाँ इस साल खून बहा है, सोनिया सेना ने मुंबई में आज़ाद कश्मीर के नारे लगवाए, आज आज़ादी की क़ीमत सिर्फ़ आवाज़ है, मुझे अपनी आवाज़ दो, नहीं तो वो दिन दूर नहीं जब आज़ादी की क़ीमत सिर्फ़ और सिर्फ़ ख़ून होगी।



कंगना राणावत पिछले सप्ताह सत्ताधारी शिवसेना नेता संजय राउत से जुबानी जंग के बाद मुंबई पहुंची थीं। राउत ने उन्हें मुंबई नहीं आने की चेतावनी दी थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने राणावत को वाई प्लस सिक्यूरिटी दी जिसके घेरे में वे मुंबई पहुंचीं।

उधर, बृहत मुंबई महानगरपालिका ने उनके दफ्तर में तोड़फोड़ की थी, जिसका भाजपा ने विरोध किया। बीएमसी में शिवसेना का शासन है। इन सब के बीच उनकी मां से हिमाचल प्रदेश में भाजपा नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की थी। कंगना का परिवार परंपरागत रूप से कांग्रेसी रहा है और उनके दादा विधायक भी रहे हैं, लेकिन इस परिवार ने अब कांग्रेस छोड़ दिया है।

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