राष्ट्रीय

कानपुर पुलिस की लूजनेस करवा सकती थी बिकरू जैसा कांड, कमिश्नरी लागू होने के बाद भी ठन-ठन गोपाल है खाकी

Janjwar Desk
4 Jun 2021 6:12 AM GMT
कानपुर पुलिस की लूजनेस करवा सकती थी बिकरू जैसा कांड, कमिश्नरी लागू होने के बाद भी ठन-ठन गोपाल है खाकी
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कानपुर के नौबस्ता गेस्ट हाउस कांड में भाजपाइयों ने पुलिस से हाथापाई कर अपराधी को भगा दिया था.पुलिस पर उठ रहे सवाल. 

पुलिस के एक सूत्र ने जनज्वार को नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि पूरा मामला सत्ताधारी पार्टी से जुड़ा है। मामले में फजीहत होने के बाद पुलिस ने बामुश्किल नारायण सिंह भदौरिया को आरोपी बनाया था। वहीं मामले में शामिल शिवबीर सिंह भदौरिया पार्टी के एक बड़े नेता का खास है...

मनीष दुबे की रिपोर्ट

जनज्वार, कानपुर। यूपी में बहुचर्चित बिकरू जैसा कांड झेल चुकी कानपुर पुलिस अब तक नहीं चेत सकी है। ये तब है जब शहर में कमिश्नरी प्रणाली लगा दी जा चुकी है। दर्जनों बदमाशों की पार्टी में कानपुर पुलिस एक वांटेड अपराधी को उठाने सादे कपड़ों में पहुँची थी। बड़ी लापरवाही के साथ पुलिस पर इसे लेकर बड़ा सवाल भी खड़ा करता है।

कानपुर में ढ़ाई महीने पहले लागू हुई कमिश्नरी प्रणाली में पुलिस की ऐसी लापरवाही राह का रोड़ा है। हिस्ट्रीशीटर जिस पार्टी में था वहां सौ से जादा लोग जमा थे बावजूद इसके सिर्फ 6 सिपाही ही दबिश देने पहुँच गए। जिसके बाद एक बार फिर परिणाम वही निकला झड़प हुई, बवाल हुआ और हिस्ट्रीशीटर को उसके साथी छुड़ा ले जाने में कामयाब रहे।

कमिश्नरी प्रणाली के बाद भी इस घटना से यह साबित होता है कि तमाम आईपीएस, पीपीएस अफसरों की तैनाती का कोई फायदा नहीं हुआ। यहां तक कि किसी उच्चाधिकारी तक को जानकारी नहीं दी गई। इसके अलावा दक्षिण जोन में डीसीपी, एडीसीपी, एसीपी और दर्जनों थानेदार हैं फिर भी तमाम वांछित अपराधी फरारी काट रहे हैं।

हिस्ट्रीशीटर मनोज सिंह थाना बर्रा से रंगदारी और धमकी के मामले में वांछित था। इसी मामले में पुलिस उसकी गिरफ्तारी करने पहुँची थी। बताया जा रहा है कि मनोज लगातार शहर में ही रह रहा था, वह खुलेआम घूमता था। खासकर भाजपा नेताओं के साथ बावजूद इसके पुलिस उसपर कोई कार्रवाई नहीं करती थी।

पुलिस के एक सूत्र ने जनज्वार को नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि पूरा मामला सत्ताधारी पार्टी से जुड़ा है। मामले में फजीहत होने के बाद पुलिस ने बामुश्किल नारायण सिंह भदौरिया को आरोपी बनाया था। वहीं मामले में शामिल शिवबीर सिंह भदौरिया पार्टी के एक बड़े नेता का खास है। इसलिए पुलिस शिवबीर सिंह पर हाथ डालने से बच रही है।

इसके अलावा सामने यह भी आया है कि पुलिस से बचने के लिए अधिकतर अपराधियों ने राजनीति में पकड़ बना रखी है। और तो और वकालत जैसे पेशे को ढ़ाल की तरह इस्तेमाल करते हैं। कल शोसल मीडिया पर आरोपी गोपाल शरण सिंह चौहान के पक्ष में कुछ वकीलों की तरफ से मीडिया पर छवि खराब करने के लिए मानहानी का मुकदमा करने जैसे मैसेज तैर रहे थे।

वहीं आरोपी भाजपा नेता नारायण सिंह ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि विश्व बैंक निवासी भाजपा नेता संदीप ठाकुर हिस्ट्रीशीटर है। इस मामले के बाद भाजपा की नगर इकाई में दो गुट बन गए हैं जो अब आमने-सामने हैं। नारायण का आरोप है की संदीप ठाकुर ने मुखबिरी की थी।

पुलिस की पांच टीमें फरार आरोपियों की तलाश में लगाई गई हैं। साथ में क्राईम ब्रांच भी मेहनत कर रही है। सूत्रों की माने ते घटना के बाद कई भाजपा नेता शहर से बाहर चले गए हैं। उन्होने किसी होटल, गेस्ट हाउस या पार्म हाउस को ठिकाना बनाया है। फरार लोगों में मनोज सिंह, नारायण सिंह भदौरिया, आदित्य दीक्षित, धीरू शर्मा, गोपाल शरण सिंह, रॉबिन सक्सेना, रॉकी, राज वल्लभ पाण्डेय, विकास तिवारी, बाबा ठाकुर सहित अन्य अज्ञात पुलिस कि गिरफ्त से फरार हैं।

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