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ACB को भ्रष्टाचार का अड्डा बताया तो कर्नाटक HC के जस्टिस एचपी संदेश को मिली तबादले की धमकी, जज ने कहा 'किसी से नहीं डरता'

Janjwar Desk
5 July 2022 5:00 PM IST
ACB को भ्रष्टाचार का अड्डा बताया तो कर्नाटक HC के जस्टिस एचपी संदेश को मिली तबादले की धमकी, जज ने कहा किसी से नहीं डरता
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ACB को भ्रष्टाचार का अड्डा बताया तो कर्नाटक HC के जस्टिस एचपी संदेश को मिली तबादले की धमकी, जज ने कहा 'किसी से नहीं डरता'

Justice HP Sandesh : देश में बेलगाम होती जा रही नौकरशाही के हौसले इतने बुलंद हो चले हैं कि अपने रास्ते में आने वाली हर रुकावट को वह रौंदने को तैयार है, लेकिन दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य में तो नौकरशाही ने हाईकोर्ट के ही एक जज को तबादले की धमकी दे डाली।

Justice HP Sandesh : देश में बेलगाम होती जा रही नौकरशाही के हौसले इतने बुलंद हो चले हैं कि अपने रास्ते में आने वाली हर रुकावट को वह रौंदने को तैयार है, लेकिन दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य में तो नौकरशाही ने हाईकोर्ट के ही एक जज को तबादले की धमकी दे डाली।

इशारेबाजी में दी गई इस धमकी के बाद जज ऐसे बिफरे कि उन्होंने नौकरशाही की जमकर बखिया उधेड़नी शुरू कर दी। न्यायाधीश को यह कहने तक पर मजबूर होना पड़ गया कि उन्हें इस बात की भी परवाह नहीं है कि उनकी जज की नौकरी बचती है या नहीं, लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ वह किसी सूरत झुकने वाले नहीं हैं।

भारतीय न्यायिक इतिहास की संभवत: अपने आप में पहली और गंभीर टिप्पणी की वजह दरअसल कर्नाटक राज्य का भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) बना, जिसे कर्नाटक हाई कोर्ट के जस्टिस एचपी संदेश ने कलेक्शन सेंटर बताते हुए उसके वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ यह टिप्पणी की।

दरअसल कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस एचपी संदेश की अदालत में बेंगलुरु शहर के डिप्टी कलेक्टर कार्यालय में तैनात एक डिप्टी तहसीलदार महेश पीएस की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई चल रही थी। इस तहसीलदार को राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा रिश्वत के एक मामले की जांच के दौरान गिरफ्तार किया गया था। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश संदेश ने पाया था कि मामले में एसीबी संस्था के खिलाफ ही आरोप थे, जिस पर न्यायाधीश ने सवाल उठाया कि एफआईआर में बेंगलुरु शहरी डिप्टी कलेक्टर का नाम क्यों नहीं शामिल किया गया।

न्यायाधीश ने एसीबी को भ्रष्टाचार का केंद्र करार देते हुए एसीबी के एडीजीपी को दागी बताया। जस्टिस ने कहा कि देश भ्रष्टाचार से पीड़ित है और जांच एजेंसी बी-रिपोर्ट दर्ज करके भ्रष्ट अधिकारियों की रक्षा कर रही है। अपनी टिप्पणी में उन्होंने एक ऐसी बी-रिपोर्ट का जिक्र किया जिसमें एक आईएएस अधिकारी के पास से 5 किलो सोना समेत 4.2 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति बरामद की गई थी।

इतना ही नहीं न्यायाधीश ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के अधिवक्ता के सामने विस्फोटक स्वर में कहा कि आपका एडीजीपी इतना शक्तिशाली है कि उसने किसी के जरिए एक अन्य हाई कोर्ट से जस्टिस से बात की। और उन जस्टिस ने मुझे एक अन्य न्यायिक अधिकारी के तबादले का उदाहरण देते हुए कहा कि मेरा भी ट्रांसफर किया जा सकता है। यह उन्हें ट्रांसफर करवाने की धमकी दी। बिफरे जस्टिस ने कहा कि वह किसान के बेटे हैं। किसी से नहीं डरते हैं।

जस्टिस ने आगे कहा, जज बनने के बाद मैंने संपत्ति जमा नहीं की है। इसलिए उनके पास बहुत ज्यादा संपत्ति नहीं है। मेरे पास पिता की चार एकड़ जमीन है। मैं खेती करके भी कुछ लोगों को खिला सकता हूं, इसलिए मुझे किसी की कोई परवाह नहीं है। जस्टिस संदेश इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने न्यायपालिका व राजनीति के कथित गठजोड़ की ओर इशारे करते हुए कहा कि मैं न तो किसी राजनीतिक दल से संबंधित हूं और न ही किसी राजनीतिक विचारधारा का पालन करता हूं। मैं यहां किसी को खुश करने के लिए नहीं बैठा हूं। मेरे तबादले की ढकी-छुपी धमकी न्यायपालिका की संस्था की स्वतंत्रता पर हमला है। लेकिन वह इस तरह की धमकियों से नहीं डरते हैं।

एसीबी के कामकाज से खफा हाईकोर्ट जस्टिस यहीं तक नहीं रुके। उन्होंने अपनी जजशिप के बलिदान तक का जिक्र करते हुए कहा कि वह अपनी जजशिप की कीमत पर भी न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा करके रहेंगे। वह उस न्यायाधीश का नाम लेने में भी संकोच नहीं करेंगे जिन्होंने यह बात कही।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त टिप्पणी कर इसको तीसरे दर्जे में पहुंचा हुआ कैंसर बताते हुए जस्टिस संदेश ने इस कैंसर को चौथे चरण में पहुंचने से पहले रोकना पड़ेगा। मैं अपने जजशिप की कीमत पर भी बिल्ली के गले में खुद ही घंटी को बांधूगा।

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