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love का मतलब sex की सहमति नहीं, केरला हाईकोर्ट ने दिया आंख खोलने वाला फैसला

Janjwar Desk
20 Nov 2021 7:11 AM GMT
love का मतलब sex की सहमति नहीं, केरला हाईकोर्ट ने दिया आंख खोलने वाला फैसला
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प्यार का मतलब सेक्स की इजाजत नहीं। 

Kerala High Court explained : लव का मतलब सेक्स के लिए सहमति के रूप में नहीं लिया जा सकता। दोनों के बीच बड़ा अंतर है। अगर आप भी ऐसी गलती करते हैं तो मामला अदालत में आने के बाद आरोपी को कानूनी प्रावधानों के तहत दोषी ही माना जाएगा।

Kerala High Court explained : आम लोगों में लव का मतलब सेक्स की इजाजत के रूप में लिया जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। केरल हाईकोर्ट ( Kerala High Court ) ने ऐसे की एक मामले में लव ( Love ) और सबमिशन ( Submission ) में फर्क बताते हुए कहा है कि लव का मतलब संभोग ( Sex ) के लिए सहमति के रूप में नहीं लिया जा सकता। दोनों के बीच बड़ा अंतर है। अगर आप भी ऐसी गलती करते हैं तो मामला अदालत में आने के बाद आरोपी को कानूनी प्रावधानों के तहत दोषी ही माना जाएगा।

'अपरिहार्य मजबूरी' का लाभ उठाने की इजाजत नहीं

केरल हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आर नारायण पिशारदी ने कहा कि 'केवल इस कारण से कि पीड़िता आरोपी से प्यार करती थी, यह नहीं माना जा सकता कि उसने संभोग के लिए सहमति भी दी थी। हाईकोर्ट ने कहा है कि सेक्स के लिए सहमति सिर्फ इसलिए नहीं मानी जा सकती क्योंकि लड़की या महिला किसी पुरुष से प्यार करती है। अदालत ने अपने अहम फैसले में सहमति और सबमिशन के बीच के अंतर को भी समझाया है। अदालत ने कहा कि अपरिहार्य मजबूरी के सामने लाचारी को सहमति नहीं माना जा सकता है।


Kerala High Court explained : न्यायमूर्ति आर नारायण पिशारदी ने एक फैसले में कहा कि सहमति और खुद को प्रस्तुत करने के बीच अंतर की एक बड़ी खाई है। प्रत्येक सहमति में एक सबमिशन शामिल होता है लेकिन इसका पालन नहीं होता है। अपरिहार्य मजबूरी के सामने लाचारी को सहमति नहीं माना जा सकता जैसा कि कानून में समझा जाता है। सहमति के लिए अधिनियम के महत्व और नैतिक प्रभाव के ज्ञान के आधार पर बुद्धि का प्रयोग आवश्यक है। केवल इस कारण से कि पीड़िता आरोपी से प्यार करती थी, यह नहीं माना जा सकता कि उसने संभोग के लिए सहमति दी थी।

आरोपी ने आत्महत्या की दी थी धमकी

केरल हाईकोर्ट ने एक 26 वर्षीय व्यक्ति द्वारा दायर एक अपील पर सुनवाई के बाद यह फैसला दिया है। आरोपी शख्स ने अपने 17 प्रेमिका को आत्महत्या करने की धमकी देकर उसके साथ भागने के लिए मजबूर किया। वह उसे कायमकुलम से अलाप्पुझा और फिर बैंगलोर ले गया। बेंगलुरू के एक होटल के कमरे में उसके साथ जबरन दुष्कर्म करने के बाद उसे गोवा ले गया और वहां के एक होटल में भी उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपी ने पैसे कमाने के लिए रास्ते में उसके जेवर भी बेचे थे।

लड़की ने जबरन दुष्कर्म का आरोप लगाया

घर लौटने के बाद मामला कराने केबाद लड़की ने बयान दिया था कि उसने जबरन उसके कपड़े उतारे और बैंगलोर में उसके साथ बलात्कार किया। जब वह रोई, तो उसने मेरा मुंह अपने हाथ से बंद कर दिया। एक हफ्ते बाद कायमकुलम लौटने के बाद आरोपी ने लड़की को 50 रुपए दिए और बाद में उससे शादी करने का वादा कर उसे घर भेज दिया।

लोअर कोर्ट का आदेश बरकरार

इस बीच लड़की के पिता की शिकायत पर पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर लिया था। बाद में इसे रेप केस में तब्दील कर दिया गया। अपील पर विचार करने के बाद उच्च न्यायालय ने लोअर कोर्ट द्वारा बलात्कार के लिए आरोपी की सजा को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि आरोपी व्यक्ति आत्महत्या के नाम पर पहले लड़की को भागने के लिए विवश किया। बाद में उसके साथ दुष्कर्म किया और शादी का झांसा देकर अपने अपराध को छिपाना चाह रहा था।

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