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कोलकाता फेक वैक्सीनेशन कैंप, आरोपी देबांजन देब समेत 4 पर हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज

Janjwar Desk
28 Jun 2021 8:01 AM GMT
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बुजुर्ग ने लगवाए कोरोना टीका के 12 डोज

सीएम ममता बनर्जी के निर्देश पर हत्या का केस दर्ज होने की खबर, आरोपी के घर से नकली लेटरहेड, स्टांप समेत कई चीजें बरामद

कोलकाता। राजधानी कोलकाता में फर्जी वैक्सीनेशन कैंप लगाकर कई लोगों को नकली टीका देने के केस में आरोपी देबांजन देब पर हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया गया है। सूत्रों की मानें, तो खुद सीएम ममता बनर्जी ने कोलकाता पुलिस आयुक्त को इसके निर्देश दिये थे। साथ ही मामले में किसी तरह की कोताही नहीं बरतने की भी बात कही थी।

अब कोलकाता पुलिस ने देबांजन और उसके तीन आरोपियों पर आईपीसी की धारा 307 के तहत हत्या का प्रयास का मामला दर्ज किया है। इधर मुख्य आरोपी के घर से कोलकाता नगर निगम समेत कई सरकारी संस्थानों के लेटरहेड, स्टांप समेत कई चीजें मिली हैं।

एक ओर जहां मामले की जांच जारी है। वहीं एक पुलिस अधिकारी के हवाले से ये भी खबर सामने आय़ी है कि सरकार ने फर्जी वैक्सीन के प्रभाव की जांच के लिए विशेषज्ञों की एक टीम गठित की गयी है। चार सदस्यों की टीम जल्द ही मामले की रिपोर्ट सौंपेगी।

देबांजन ने दवा फर्म को भी नकली टीका बेचने की कोशिश की

फेक वैक्सीन रैकेट को लेकर नये-नये खुलासे हो रहे हैं। कोलकाता पुलिस के एक अधिकारी ने 27 जून को कहा कि कोलकाता में कम-से-कम दो अवैध टीकाकरण शिविर आयोजित करने और कई लोगों को धोखा देने के अलावा, देबंजन देब ने एक दवा फर्म को भी कोविड के टीके खरीदने के लिए लिखा था। अधिकारी ने कहा कि, उसके दावे की पुष्टि की जा रही है।

पूछताछ के दौरान खुद को कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के संयुक्त आयुक्त के रूप में परिचय देने वाले 28 वर्षीय देबांजन ने ये भी दावा किया कि कस्बा और सिटी कॉलेज में दो शिविरों में लगाए गए टीके असली थे। जबकि, जांच में ये बात सामने आयी है कि इस दौरान फर्जी वैक्सीन दिये गये। कोविड-19 वैक्सीन की जगह लोगों को एंटीबॉयोटिक एम्बिकासिन का इंजेक्शन दिया गया, वो भी बगैर जांच किये। बता दें कि जांच से पता चला कि देब ने कस्बा और सिटी कॉलेज में क्रमश: 513 और 72 लोगों के लिए दो टीकाकरण शिविर लगाए थे।

केएमसी का लेटरहेड बरामद

पुलिस के अनुसार, देब विभिन्न सरकारी एजेंसियों को पत्र लिखता था और लोगों को विश्वास दिलाने के लिए उन पर जाली स्टांप चिपका देता था। आरोप है कि वह खुद सरकारी पत्रों का जवाब लिखता था।

देब के घर और कार्यालय से विभिन्न सरकारी निकायों जैसे कोलकाता नगर निगम (केएमसी), सूचना और सांस्कृतिक मामलों के विभाग, लोक निर्माण विभाग और पश्चिम बंगाल राज्य बिजली वितरण कंपनी के जाली स्टांप बरामद किए गए हैं।

एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी ने आठ बैंक खाते खोले थे और उनमें से एक उसकी कंपनी डब्ल्यूबीफिनकॉर्प के नाम से था जो जिससे उसके कर्मचारियों को वेतन दिया जाता था। केएमसी लेटर पैड, स्टांप और आईडी कार्ड बनाने के अलावा, देब पर नागरिक निकाय के नाम पर एक बैंक खाता खोलने का भी आरोप है।

देब को आईएएस अधिकारी के तौर पर जानते थे दोस्त, रिश्तेदार

सूत्रों के अनुसार, देब अपने टीकाकरण अभियान के लिए लोगों को आमंत्रित करता था। कस्बा में टीका लेने वालों में उसके दोस्त और रिश्तेदार भी शामिल थे। देब के एक पारिवारिक मित्र ने कहा, कि हम उसे एक आईएएस अधिकारी के रूप में जानते थे। वह पढ़ाई में हमेशा अच्छा था, इसलिए किसी को उस पर शक नहीं होता था। मैंने अपने परिवार के साथ कस्बा कैंप में वैक्सीन ली थी। जब हमने उससे कहा कि हमें कोई मैसेज नहीं मिला है, तो उसने कहा कि तकनीकी समस्या के कारण ऐसा हुआ होगा. साथ ही बताया कि वैक्सीनेशन का सर्टिफिकेट मिल जाएगा। हमें नहीं पता था कि किसी को टीकाकरण से संबंधित मैसेज नहीं मिला था।

पैनिक अटैक से जूझ रहे लोग

कोलकाता के कस्बा इलाके में फेक वैक्सीन कैंप का खुलासा होने के बाद अब लोगों में डर बढ़ गया है। दरअसल जिन लोगों ने इस कैंप में वैक्सीन लगवाई थी, उन्हें डर है कि नकली टीके के कारण उन्हें किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या न हो जाएं। कोविड वैक्सीन के नाम पर ठगे गए पीड़ितों की जांच के लिए कोलकाता नगर निगम की ओर से स्वास्थ्य टीम को भेजा गया।

कोलकाता के कस्बा न्यू मार्केट में एक सिक्यॉरिटी गार्ड कौशिक दास को दाहिने हाथ की बांह में दर्द हो रहा है। उन्होंने 10 दिन पहले देबांजन देब की ओर से लगाए गए कैंप से कोविड वैक्सीन लगवाई थी। इसी तरह राजदंगा मेन रोड निवासी होममेकर मौसमी पॉल ने बताया कि उनके सिर में लगातार दर्द हो रहा है। उन्होंने उसी कैंप से वैक्सीन लगवाई थी।

केएमसी मेडिकल अधिकारी देबाशीष बरुई ने बताया कि कस्बा कैंप में वैक्सीन लगवाने वाले करीब 70 लोगों की जांच की गई तो पाया कि फेक वैक्सीनेशन कैंप का खुलासा होने के बाद अधिकतर पैनिक अटैक से जूझ रहे हैं। उन्हें डर सता रहा है कि नकली टीका का उनके शरीर पर क्या असर होगा। हालांकि केएमसी स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने साफ किया कि जो लोग फेक वैक्सीन के चलते बीमार पड़ गए हैं, उन्हें हर तरह की मेडिकल मदद दी जाएगी। एक अधिकारी ने कहा, 'अगर जरूरत पड़ी तो हम कस्बा में मेडिकल कैंप भी लगाएंगे ताकि जो बीमार पड़े उनका ध्यान रखा जा सके।'

कैसे मिलेगी असली वैक्सीन ?

फेक वैक्सीनेशन कैंप में कुछ ऐसे भी थे जिन्हें वैक्सीन लगवाने के बाद दर्द और बुखार की कोई शिकायत नहीं हुई। और उन्हें गड़बड़ी की आशंका हुई। कस्बा न्यू मार्केट स्थित एक गार्मेंट शॉप के मालिक ने कहा, 'मुझे लगा कि कुछ गड़बड़ हुई है क्योंकि वैक्सीन लेने के बाद जो आमतौर पर हल्के साइट इफेक्ट होते हैं जैसे हल्का बुखार और दर्द होना, मुझे वैसा कुछ महसूस नहीं हुआ।'

देब के कैंप से 'वैक्सीन' डोज लेने वाले सिटी कॉलेज के स्टूडेंट्स भी उतना ही डरे हुए हैं। एक पूर्व छात्र राजा भट्टाचार्य ने बताया, 'ऑर्गनाइजर ने बताया कि मुझे स्पूतनिक वी लगाई गई है। अब वो आदमी फ्रॉड निकला, मुझे चिंता हो रही है।' इसी तरह मानिकतला निवासी स्टूडेंट देबजीत मजूमदार ने बताया, 'मेरे स्वास्थ्य से ज्यादा मुझे चिंता इस बात की है कि तीसरी लहर से पहले मुझे असली वैक्सीन कैसे मिलेगी।'

बता दें कि इस फेक वैक्सीनेशन कैंप का खुलासा तब हुआ जब तृणमूल कांग्रेस की सांसद मिमी चक्रवर्ती ने बुधवार 23 जून को कोलकाता पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि शहर के दक्षिणी इलाके में कस्बा इलाके में एक व्यक्ति फर्जी टीकाकरण केंद्र चला रहा है। सांसद चक्रवर्ती को तब शक हुआ जब इस शिविर से वैक्सीन लेने के बाद उन्हें कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली और फिर उन्होंने अपनी शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत दक्षिण कोलकाता से देबांजन देब को गिरफ्तार कर लिया।

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