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मध्य प्रदेश

इंदौर में मुस्लिम छात्रों को हॉल के बाहर बैठाकर परीक्षा देने को किया गया मजबूर, कांग्रेस विधायक का आरोप

Janjwar Desk
12 Jun 2020 11:46 AM GMT
इंदौर में मुस्लिम छात्रों को हॉल के बाहर बैठाकर परीक्षा देने को किया गया मजबूर, कांग्रेस विधायक का आरोप
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विधायक ने सीएम को पत्र में लिखा, '9 जून को आयोजित परीक्षा में इस्लामिया करीमिया स्कूल के छात्रों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई। जब छात्रों ने विरोध किया तो प्रशासन ने उन्हें परीक्षा हॉल के बाहर बैठा दिया।'

जनज्वार ब्यूरो। मध्यप्रदेश के इंदौर की एक शैक्षणिक संस्था ने कथित तौर पर मुस्लिम छात्रों को परीक्षा हॉल के बाहर बैठाकर परीक्षा देने के लिए मजबूर किया है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर इस मामले पर चिंता व्यक्त की है।

भोपाल के मध्य क्षेत्र से विधायक मसूद ने पत्र में लिखा है कि इंदौर के नौलखा में स्थित एक बंगाली स्कूल को 12 वीं कक्षा की परीक्षा का केंद्र बनाया गया है। यह परीक्षा केंद्र इस्लामिया करीमिया स्कूल के छात्रों के लिए भी है। 9 जून को आयोजित परीक्षा में इस्लामिया करीमिया स्कूल के छात्रों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई।

पत्र में उन्होंने आगे लिखा, 'जब छात्रों ने विरोध किया तो प्रशासन ने उन्हें परीक्षा हॉल के बाहर बैठा दिया। जहां सांप्रदायिक सद्भाव सिखाया जाना चाहिए, वहां नफरत फैलाई जा रही है। जो दोषी पाए जाते हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

उधर जिला शिक्षा अधिकारी राजेंद्र मकवाना ने मुस्लिम छात्राओं के साथ किसी भी भेदभाव के आरोप को खारिज करते हुए कहा, प्रशासन ने जिले के सभी 131 परीक्षा केंद्रों और 14 उप केंद्रों के लिए पहले ही आदेश जारी कर दिया था कि जो छात्र कंटेनमेंट जोन से आए हैं, उनके बैठने की अलग व्यवस्था की जाए। यह फैसला छात्रों में कोरोना को फैलने से रोकने के लिए लिया गया था।' उन्होंने कहा कि बंगाली हायर सेकंडरी स्कूल में यही व्यवस्था लागू थी।

उन्होंने तेज धूम में छात्रों को बैठाने के अभिभावकों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, 'हमने छात्राओं को तेज धूप में नहीं, बल्कि स्कूल के उस पक्के मंच पर बैठाया था, जिसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।" उन्होंने बताया कि यह मंच तीन तरफ से बंद है। इसके अलावा परीक्षा के दौरान मंच पर बैठाई गईं 40 छात्राओं में एक हिन्दू छात्रा भी थी।'

इंदौर में मुस्लिम छात्राओं से अमानवीय व्यवहार का मध्य प्रदेश के सामाजिक, सांस्कृतिक संगठनों ने विरोध किया है। मध्य प्रदेश लोकतांत्रिक अधिकार मंच, भारत ज्ञान विज्ञान समिति, मध्यप्रदेश विज्ञान सभा, राष्ट्रीय सेक्युलर मंच, जनवादी लेखक संघ, प्रगतिशील लेखक संघ, अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति, NFIW, मध्यप्रदेश लोक सहभागी साझा मंच ने कहा है कि महामारी के संक्रमण को आर्थिक बदहाली, सुविधाओं और सूचनाओं की कमी की बजाय समुदाय विशेष के मत्थे थोपने की करतूतें घटिया हैं। सरकारी महकमे भी ऐसे प्रयासों को बढ़ावा दे रहे हैं।

उपरोक्त सामाजिक-राजनीतिक संगठनों ने कहा कि इंदौर की उपरोक्त घटना अस्वीकार्य है। हम विविध सामाजिक, सांस्कृतिक आंदोलनों, संगठनों, संस्थाओं और समूहों के लोग सांप्रदायिक आधार पर भेदभाव की इस घटना की कड़ी निंदा करते हैं। हम सरकार से मांग करते हैं कि ऐसे निर्णय लेने वाले दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हो यह निश्चित किया जाए। साथ ही हमारी मांग है कि बच्चों की सहूलियत के अनुसार परीक्षा केंद्र सुनिश्चित किया जाए, इस केंद्र पर कार्यवाही हो। साथ ही बंगाली स्कूल को भविष्य में परीक्षा केंद्र न बनाया जाए।

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