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अब सार्वजनिक उपक्रमों की जमीन बेचने की तैयारी में मोदी सरकार, नए सरकारी ई-बिडिंग प्लेटफॉर्म से यह पहली बिक्री होगी !

Janjwar Desk
4 Sep 2021 4:40 AM GMT
अब सार्वजनिक उपक्रमों की जमीन बेचने की तैयारी में मोदी सरकार, नए सरकारी ई-बिडिंग प्लेटफॉर्म से यह पहली बिक्री होगी !
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सार्वजनिक उपक्रमों की जमीन बेचने की तैयारी में मोदी सरकार! (File pic)

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने रेलवे स्टेशनों, ट्रेनों, ट्रांसमिशन लाइन, टेलिकॉम टावर, गैस पाइपलाइन, हवाई अड्डे, पीएसयू समेत सरकारी कंपनियों की कई संपत्तियों को बेचने या लीज पर देने की तैयारी पहले ही कर ली है..

जनज्वार। केंद्र सरकार कई सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश को लेकर पहले से ही कदम बढ़ा चुकी है और अब खबर है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की जमीन भी बिक्री कर राशि बटोरी जाएगी। बता दें कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने रेलवे स्टेशनों, ट्रेनों, ट्रांसमिशन लाइन, टेलिकॉम टावर, गैस पाइपलाइन, हवाई अड्डे, पीएसयू समेत सरकारी कंपनियों की कई संपत्तियों को बेचने या लीज पर देने की तैयारी पहले ही कर ली है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब सार्वजनिक क्षेत्र के कई उपक्रमों के लगभग 600 करोड़ रुपये के भूखंडों को बेचने की योजना सरकार बना रही है।

'बिज़नेस स्टैंडर्ड' की रिपोर्ट के हवाले से कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि सरकार यह काम अपने नए ऑनलाइन बिडिंग प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए करेगी। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार बेकार पड़ी संपत्तियों को बेचकर धन जुटाना चाहती है। यह काम वित्त मंत्रालय का 'निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (Dipam) द्वारा किया जाएगा। यह ठीक उसी तरह किया जाएगा जैसे नीति आयोग ने करोड़ों रुपये की संपत्ति के मॉनेटाइज़ेशन के काम किया है।

इन रिपोर्ट्स के अनुसार, 'दीपम' अब जल्द ही बीएसएनएल, एमटीएनएल, बीईएमएल, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया (एससीआई) सहित अन्य पीएसयू की भूसंपदा को बेचने के लिए अंतिम मंजूरी लेने जा रहा है। सरकारी संस्था एमएसटीसी द्वारा विकसित ई-बिडिंग प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए संपत्ति की यह पहली बिक्री होगी।

बता दें कि पिछले महीने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन (NMP) प्‍लान का अनावरण किया था। इस मौके पर उन्‍होंने कहा था कि कम उपयोग वाली संपत्तियों की हिस्सेदारी को बेचा जाएगा। यह मिशन बहुत सारे सेक्‍टर्स को कवर करेग।

इसमें रोड, रेलवे, एयरपोर्ट से लेकर पावर ट्रांसमिशन लाइन्‍स और गैस पाइपलाइंस भी शामिल हैं। वित्‍त मंत्री ने कहा कि सरकार अपनी कोई भी संपत्ति नहीं बेचेगी। इसका बेहतर तरीके से इस्‍तेमाल करेगी। इनका मालिकाना हक सरकार के पास रहेगा।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके तहत छह लाख करोड़ रुपये के एसेट्स की बिक्री की जाएगी। यह बिक्री 4 साल में होगी। वित्‍त मंत्री ने बताया था कि एसेट्स के मोनेटाइजेशन (संपत्तियां बेचकर पैसा जुटाना) में जमीन की बिक्री शामिल नहीं है। यह मौजूदा संपत्तियों (ब्राउनफील्ड एसेट्स) की बिक्री से जुड़ा प्रोग्राम है।

हालांकि, कांग्रेस ने सरकार की इस योजना पर हमला किया था। पार्टी ने आरोप लगाया था कि मोदी सरकार राष्ट्रीय संपत्तियों को बेचने में लगी हुई है। मोदी सरकार टेलीकॉम से लेकर हर क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपने को तैयार है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सरकार इस प्रोग्राम के तहत 2.86 लाख किमी के भारतनेट फाइबर, बीएसएनएल और एमटीएनएल टावर बेचने जा रही है। इसके अलावा वह 160 कोल माइनिंग प्रोजेक्‍ट्स, 761 मिनरल ब्लॉक के साथ 2 नेशनल स्‍टेडियम का सौदा कर रही है। एनएचपीसी, एनटीपीसी और एनएलसी के एसेट्स भी बेचे जाएंगे। यही नहीं, सरकार 26,700 किमी के नेशनल हाईवे, 400 स्‍टेशन, 150 ट्रेन, रेलवे ट्रैक, 25 एएआई एयरपोर्ट भी बेच रही है।

वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी) को लेकर शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार को अपने इस कदम के उद्देश्यों और चार साल की अवधि के दौरान छह लाख करोड़ रुपए का राजस्व एकत्र करने के मुख्य लक्ष्य के बारे में देश के समक्ष स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में यह भी कहा कि जिन संपत्तियों की पहचान एनएमपी के तहत की गई है, उनसे मौजूदा समय में भी कोई न कोई राजस्व जरूर मिल रहा होगा।

पूर्व केंदीय वित्तमंत्री चिदंबरम ने कहा, "एनआइपी के लिए 100 लाख करोड़ रुपए की जरूरत होगी। क्या चार साल में एकत्र होने वाला छह लाख करोड़ रुपए का राजस्व 100 लाख करोड़ रुपए की परियोजना के वित्तपोषण के लिए पर्याप्त होगा?' उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी ने सत्ता में रहते हुए, घाटे में चल रही संपत्तियों का मुद्रीकरण किया, जबकि राजग सरकार इसके उलट कर रही है।"


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