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याचिकाकर्ता का दावा मेवात में 431 गांवों में से 103 गांवों में नहीं कोई हिंदू, कोर्ट ने खारिज किया केस

Janjwar Desk
30 Jun 2021 9:28 AM GMT
याचिकाकर्ता का दावा मेवात में 431 गांवों में से 103 गांवों में नहीं कोई हिंदू, कोर्ट ने खारिज किया केस
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(सीजेआई ने याचिकाकर्ताओं से कहा, "किसी को हद पार नहीं करनी चाहिए। सभी की बात सुनी जाएगी)

मेवात युवा विकास समिति के सदस्य वसीम अहमद ने बताया कि यहां के माहौल को खराब करने की कोशिश हो रही है। इससे ज्यादा कुछ नहीं है। यहां हम सभी लोग मिलजुल कर रह रहे हैं.....

मनोज ठाकुर की रिपोर्ट

जनज्वार ब्यूरो। एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में एक याचिका दायर कर दावा किया कि मेवात (Mewat) में 431 गांवों में से 103 गांवों में कोई हिंदू नहीं है। उन्होंने दावा किया कि यहां हिंदुओं (Hindus) का उत्पीड़न हो रहा है। इसके चलते हिंदू यहां से पलायन (Migration) कर गए हैं।

याचिकाकर्ता ने एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबरों को आधार बनाते हुए कोर्ट में यह दावा किया था। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) एन वी रमना, जस्टिस ए एस बोपन्ना और ऋषिकेश रॉय की बेंच ने कहा कि अखबारों में छपी खबरों के आधार पर दाखिल इस याचिका को नहीं सुनेंगे। बेंच ने याचिका खारिज कर दी है।

एडवोकेट विष्णु शंकर जैन की ओर से वकील विकास सिंह अदालत में पेश हुए थे। याचिकाकर्ता ने उन खबरों को आधार बनाया था, यह एक समाचार विशेष में प्रकाशित हुई थी। पिछले साल विश्व हिंदू परिषद ने एक टीम का गठन किया था। टीम में मेजर जनरल जीडी बक्शी व हरि मंदिर आश्रम पटौदी के संस्थापक संत स्वामी धर्मदेव शामिल थे। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट दी। इस कमेटी की रिपोर्ट को आधार बना कर खबर प्रकाशित की गई।

इन खबरों में दावा किया गया था कि मेवात में हिंदुओं का शोषण हो रह है। वह डर के मारे अपने घर छोड़ रहे हैं। याचिका में यह भी दावा किया गया कि 82 गांव ऐसे हैं, जहां चार से पांच हिंदू परिवार रह गए हैं।

जबकि 2011 में यहां 20 प्रतिशत आबादी हिंदू थी। अब घटकर 10 से 11 प्रतिशत रह गई है। याचिका में बताया गया कि योजना बना कर हिंदुओं को यहां से खदेड़ा जा रह है। हिंदू लड़कियों पर दबाव बना कर उन्हें विवाद के लिए मजबूर किया जा रहा है। हिंदुओं की संपत्ति सस्ते में खरीदी जा रही है। याचिका में यह भी मांग की गई कि जो भी संपत्ति हिंदुओं से खरीदी गई है, यह सारे सौदे रद्द होने चाहिए।

याचिका में बताया गया कि पुलिस भी पीड़ित हिंदुओं की ओर ध्यान नहीं देती है। यदि वह शिकायत करने जाते हैं तो उनकी सुनवाई नहीं होती।

इस वजह से हिंदू समुदाय के लोग डरे हुए हैं। वह यहां से पलायन कर जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट से मांग की कि इस इलाके में लोगों की सुरक्षा व स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के लिए सुप्रीम कोर्ट को दखल देना चाहिए।

मामले को लेकर दो पक्ष बने हुए हैं। एक पक्ष का कहना है कि एजेंडा विशेष के लिए इलाके को बदनाम करने की कोशिश हो रही है। छोटी छोटी घटनाओं को आधार बना कर इसे धर्म से जोड़ा जा रहा है। तथ्यों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा गया है।

कोशिश यह हो रही कि गुमराह कर अपना एजेंडा स्थापित किया जाए। यह कोशिश यहां काफी समय से हो रही है। इसमें एक वर्ग विशेष को बदनाम कर इसका सियासी लाभ उठाया जाए। इनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने सही निर्णय लिया है।

वहीं इस तरह की खबरे सामने आने के बाद चंडीगढ़ में भी हड़कंप मचा हुआ है। सरकार की ओर से दावा किया गया कि इस इलाके की जांच कराई जाएगी। किसी को भी यदि तंग किया जा रहा है तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कानून सभी के लिए बराबर है।

मेवात युवा विकास समिति के सदस्य वसीम अहमद ने बताया कि यहां के माहौल को खराब करने की कोशिश हो रही है। इससे ज्यादा कुछ नहीं है। यहां हम सभी लोग मिलजुल कर रह रहे हैं। इसके बाद भी दिल्ली और चंडीगढ़ में यह दिखाया जा रहा है कि यहां के हालात खराब है। कोई यहां आकर तो देखता नहीं, बस जैसी खबरें प्रकाशित होती है, इस पर यकीन कर लिया जाता है। यह उनके साथ पहली बार नहीं हो रहा है।

इससे पहले तब्लिगी जमात के वक्त भी उनके इलाके को खूब बदनाम करने की कोशिश हुई थी। मीडिया का एक वर्ग भी इस तरह की खबरों को बढ़ा चढ़ा कर पेश करता है। इससे अफवाहों यकीन में बदल जाती है। काफी समय से उनके साथ यहां ऐसा ही हो रहा है। वसीम ने कहा कि इस पर रोक लगनी चाहिए।

क्योंकि इस तरह की स्थिति किसी के लिए भी ठीक नहीं है। जानबूझकर समुदाय के बीच में खाई खोदने का काम हो रहा है। इस पर रोक लगनी चाहिए। मीडिया को भी इस तरह की खबरों को प्रकाशित करने से पहले ग्राउंड पर आकर सच्चाई से वाकिफ होना चाहिए। इसके बाद ही रिपोर्ट करना चाहिए। जिससे सच सामने आए। लेकिन होता यह है कि जो उन्हें एजेंडा विशेष के लोग उपलब्ध कराते हैं,इसी को आधार बना कर खबर बना दी जाती है। वसीम ने बताया कि याचिका में जो तथ्य दिए गए हैं, वह सही नहीं है। इसकी किसी निष्पक्ष एजेंसी से जांच होनी चाहिए। इसके बाद ही इस पर बात करनी चाहिए।

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