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RCF Employees Union Kapurthala का अधिवेशन हुआ संपन्न, अमरीक सिंह अध्यक्ष और सर्वजीत सिंह बने महासचिव

Janjwar Desk
21 Dec 2021 8:02 AM GMT
RCF Employees Union Kapurthala अधिवेशन में 15 सदस्यों की नई कार्यकारिणी का गठन हुआ, जिसमें पुनः अध्यक्ष अमरीक सिंह और महासचिव सर्वजीत सिंह चुना गया।
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(RCF Employees Union Kapurthala का अधिवेशन हुआ संपन्न)

RCF Employees Union Kapurthala : ऐक्टू राष्ट्रीय महासचिव राजीव डिमरी ने कहा कि किसानों की जीत से सीख लेते हुए रेलवे कर्मचारी निजीकरण / निगमीकरण के खिलाफ निर्णायक संघर्ष की शुरुआत करें....

RCF Employees Union Kapurthala : आरसीएफ एंप्लाइज यूनियन सम्बद्ध आईआरईएफ (IREF) व ऐक्टू का अधिवेशन शनिवार 18 दिसंबर को वारिश शाह हाल में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अधिवेशन में 15 सदस्यों की नई कार्यकारिणी का गठन हुआ, जिसमें पुनः अध्यक्ष अमरीक सिंह और महासचिव सर्वजीत सिंह चुना गया। इस अधिवेशन में वरिष्ठ किसान नेता रुलदू सिंह मानसा, मनजीत सिंह धनेर, बैंक एसोसिएशन से दिलीप पाठक, केंद्रीय ट्रेड यूनियंस से ऐक्टू राष्ट्रीय महासचिव राजीव डिमरी, ऐक्टू पंजाब राज्य सचिव राजेन्द्र सिंह राणा व नेशनल मूवमेंट टू सेव रेलवे से डॉ. कमल उसरी व रेलवे के विभिन्न जोन से IREF आईआरइएफ के नेतागण शामिल हुए।

अधिवेशन में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए पंजाब किसान यूनियन (Punjab Kisan Union) के प्रदेश अध्यक्ष व अखिल भारतीय किसान महासभा (Akhil Bhartiya Kisan Mahasabha) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रुलदु सिंह मानसा व भारतीय किसान यूनियन दकौदा वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनजीत सिंह धनेर ने संयुक्त रूप से कहा कि मोदी सरकार ने कॉरपोरेट घरानों व विश्व व्यापार संगठन के दिशा निर्देशों के दबाव में कॉरपोरेट हितेषी तीन खेती कानूनों को कोरोना महामारी में बहुत ही जल्दीबाजी में पास कर दिए गए थे। तीनों काले कृषि कानूनों के लागू हो जाने से खेती किसानी और कृषि क्षेत्र में कार्यरत किसान और मजदूर तो पूरी तरह से बर्बाद हो जाने थे।

उन्होंने आगे कहा कि अभी तक जो गरीब मेहनतकश सस्ते में अनाज खरीद कर अपना पेट भर लेता था, उनके ऊपर जबरदस्त महंगाई की मार पड़ना तय था, सरकारी मंडियों के खात्मे से बेरोजगारी और बढ़ जाती, लगभग 13 महीने दिल्ली के बॉर्डर पर एकजुटता के साथ पंजाब की 32 किसान व मजदूर संगठन व पूरे देश के लगभग 500 किसान व मजदूर संगठनों ने एकजुट होकर संघर्ष किया, जिसने मोदी सरकार को यह काले कानून वापस लेने के लिए मजबूर किया।

किसान नेताओं (Farmer Leaders) ने कहा कि इस आंदोलन ने जहां किसान संगठनों, किसानों, मजदूरों इत्यादि में एकता की बढ़ाया है, वहीं देश की आम जनता में धार्मिक साम्प्रदायिकता के खिलाफ गंगा जमुनी तहजीब की कौमी एकजहति की भावना को और मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि इसी एकता और चेतना के बदौलत सार्वजनिक क्षेत्रों के निगमीकरण / निजीकरण को रोका जा सकता है।

रुलदू सिंह मानसा ने कहा कि जनता की सवारी रेलवे सार्वजनिक क्षेत्र में बचाए रखने की लड़ाई में किसान रेलवे कर्मचारियों के साथ रहेगा।

पंजाब बैंक फेडरेशन के संयुक्त महासचिव दिलीप पाठक ने बताया कि किस तरह भारत सरकार सरकारी बैंकों का निजीकरण करने जा रही है। इस निजीकरण के साथ जहां बैंकों के लाखों कर्मचारी बेरोजगार होंगे, वहीं सबसे बड़ा खतरा देश के आम लोगों का होने वाला है क्योंकि जो आम नागरिक अपना पैसा सरकारी बैंकों में पूरे विश्वास के साथ रखते हैं, वह अब जब बैंक प्राइवेट हाथों में जाएंगे तो बैंकों में जमा उनके पैसों की कोई गारंटी नहीं रहेगी। प्राइवेट बैंक अपनी मर्जी से आम लोगों का शोषण करेंगे। बैंकों के निजीकरण को हर हाल में सब लोगों को मिलकर रोकना ही पड़ेगा।

ऑल इंडिया सेंट्रल कौंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस ऐक्टू महासचिव राजीव डिमरी ने कहा कि बात अब पूरी तरह से स्पष्ट हो चुकी है कि मोदी सरकार देशी-विदेशी पूंजीपतियों के समर्थन से सत्ता में आई है और पूंजीपतियों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को देखते हुए देश के कर्मचारियों तथा मजदूरों को हमेशा सतर्क रहते हुए एक बड़े और निर्णायक संघर्ष के लिए तैयारी शुरुआत कर देनी चाहिए।

डिमरी ने कहा कि किसान आंदोलन के चलते अभी जो मोदी सरकार 44 श्रम कानूनों को खत्म करके जो 4 श्रमिक कोड बनाई है उसे लागू नहीं कर पा रही थी और ना ही देश के सार्वजनिक क्षेत्र का निजीकरण उतनी तेजी से कर पा रही थी। जितनी तेज गति के साथ वो करना चाहती है, लेकिन अब पूंजीपति वर्ग कृषि कानूनों को वापस लेने की भरपाई करने के लिए 44 श्रम कानूनों के निरस्तीकरण और देश में अंधाधुंध निजिकरण करने के लिए मोदी सरकार पर दबाव बना रहे है। इसलिए अब रेलवे कर्मचारियों को किसानों के ऐतिहासिक जीत से सीख लेते हुए निगमीकरण /निजीकरण के खिलाफ निर्णायक संघर्ष की शुरुआत कर देनी चाहिए।

फ्रंट अगेंस्ट एनपीएस इन रेलवे के प्रमुख नेताओं में अमरीक सिंह, राजिंदर पाल, कृशानु भट्टाचार्य, तरसेम सिंह, भरत राज, तरलोचन सिंह, तलविंदर सिंह ने कहा कि हमारे एनपीएस विरोधी फ्रंट अगेंस्ट एन पी एस इन रेलवे FANPSR ने अपने अस्तित्व में आने के बाद से ही नई पेंशन स्कीम तथा रेल के निजीकरण के खिलाफ संघर्ष करते हुए देश भर में अपनी में एक जुझारू फ्रंट के रूप में पहचान बनाई है। हमें किसान संघर्ष तथा उनकी जीत ने नई ऊर्जा ताकत व शिक्षा दी है, हम अपनी पूरी ताकत के साथ एनपीएस को रद्द करवाकर पुरानी पेंशन बहाल करवाने के संघर्ष को अंजाम तक पहुंचाने तक जारी रखेंगे।

इंडियन रेलवे एएम्प्लाईज फेडरेशन के महासचिव सर्वजीत सिंह, संगठन सचिव जुमेरदीन, अध्यक्ष रवि सेन, राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज कुमार पांडेय, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. कमल उसरी, राष्ट्रीय सहायक सचिव उमेद सिंह चौहान ने संयुक्त रूप से कहा कि हम तमाम संघर्षशील कर्मचारियों तथा संगठनों को एक साथ मिलकर रेलवे के निजीकरण के खिलाफ संघर्ष करने के लिए एक आना होगा। सभी ने कहा कि तमाम रेलवे कर्मचारियों तथा सभी संघर्षशील संगठनों को एक मंच पर आना वक्त की जरूरत है, इसीलिए हम सभी संगठनो, एसोसिएशन, फेडरेशनों, यूनियनों, मेहनतकश मजदूरों से अपील करते हैं कि आओ मिलकर संघर्ष के मैदान में लड़ें तभी हम सबकी जीत सुनिश्चित होगी।


आरसीएफ एम्प्लाईज यूनियन की 15 सदस्यीय केंद्रीय कार्यकारणी में सरदार परमजीत सिंह खालसा को संरक्षक, अमरीक सिंह अध्यक्ष, बचित्तर सिंह वरिष्ठ उपाध्यक्ष, बाबू सिंह उपाध्यक्ष, प्रदीप सिंह उपाध्यक्ष, तलविंदर सिंह उपाध्यक्ष, सर्वजीत सिंह महासचिव, अमरीक सिंह गिल अतिरिक्त महासचिव, मनजीत सिंह बाजवा संयुक्त सचिव, भरत राज संगठन सचिव, हरविंदर पाल वित्तीय सचिव, नरेंद्र कुमार सहायक सचिव, जसपाल सिंह सेखों सहायक सचिव, तरलोचन सिंह प्रेस सचिव, दर्शन लाल कार्यकारी अध्यक्ष चुने गए।

डिवीजन बॉडी में बचित्तर सिंह को सेल डिवीजन अध्यक्ष, नरेंद्र कुमार सचिव, प्रदीप सिंह फर्निशिंग डिवीजन अध्यक्ष, रलोचन सिंह व जसपाल सिंह सेखों प्लांट डिवीजन अध्यक्ष, गुरतेज सिंह सचिव, बाबू सिंह सिविल डिवीजन अध्यक्ष, अवतार सिंह को सचिव बनाया गया है। इसके साथ ही सात सदस्य कोर कमेटी व 35 सदस्यीय कार्यकारी कमेटी का गठन हुआ।

आरसीएफ इंप्लाइज यूनियन के संरक्षक सरदार परमजीत सिंह खालसा ने कहा कि यह अधिवेशन एक औपचारिकता नहीं है, हमारी समस्त टीम उपरोक्त मुदों पर भरपूर संघर्ष करने के लिए वचनबद्ध रहेगी जिसमें मुख्यत: रेलवे के निगमीकरण/निजीकरण, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP), रेलवे में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), नई पेंशन स्कीम (NPS) को रद्द करवाना, रेलवे में ठेकेदारी, आउटसोर्सिंग आदि को बंद कर कर्मचारियों की नई भर्ती करवाना, रेलवे में 100 दिवसीय एक्शन प्लान व राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइप लाइन योजना जैसे रेल बेचने के षड्यंत्रों के खिलाफ आवाज बुलंद करना, रेलवे में एक्ट अप्रिंटसों व देश के युवाओं की भर्ती के लिए संघर्ष करना, एक्ट अप्रेंटिस पास वर्कशॉप के बाहर कार्यरत तथा सिविल विभाग में कार्यरत कर्मचारियों को वर्कशॉप में ले जाना, नाइट ड्यूटी एलाउंस पर लगाई गई सीलिंग को हटवाना, इनसैंटिव/पीसीओ का लाभ आरसीएफ के सभी कर्मचारियों को दिलवाने हेतु नीति में बदलाव करवाना, सभी ग्रुप डी कर्मचारियों की शैक्षणिक व तकनीकी योगता के अनुसार उन्हें ग्रुप सी में प्रमोट करवाना इत्यादि।

अधिवेशन में भगत सिंह विचार मंच, कपूरथला और संगवारी सांसस्कृति टीम (जन संस्कृति मंच), नई दिल्ली ने अपने गीत व नाटको की प्रस्तुति की।

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