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Samvidhan Diwas : स्वतंत्रता सेनानियों के लिए राष्ट्र ही सर्वोपरि था, पारिवारिक पार्टियां देश के लिए चिंता का विषय - पीएम मोदी

Janjwar Desk
26 Nov 2021 6:08 AM GMT
Samvidhan Diwas : स्वतंत्रता सेनानियों के लिए राष्ट्र ही सर्वोपरि था, पारिवारिक पार्टियां देश के लिए चिंता का विषय - पीएम मोदी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

Samvidhan Diwas : भारतीय संविधान सदियों की परंपरा की अभिव्यक्ति है। संविधान के निर्माताओं ने भी राष्ट्र को सर्वोपरि माना।

नई दिल्ली। संसद के सेंट्रल हॉल में संविधान दिवस पर कार्यक्रम जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के लिए राष्ट्र सर्वोपरि था। भारतीय संविधान सदियों की परंपरा की अभिव्यक्ति है। संविधान के निर्माताओं ने राष्ट्र को सर्वोपरि माना। पीएम ने बाबा साहेब अंबेडकर और डॉ. राजेंद्र प्रसाद को नमन किया।

उन्होंने कहा कि आज संविधान बनाना होता तो बहुत मुश्किल होता। शायद हम एक पेज भी नहीं लिख पाते। विरोध आज ही नहीं तब भी हो रहा था। अब यह सोचने की आवश्यकता है कि हमारा रास्ता सही ​था या गलत। पीएम मोदी ने महात्मा गांधी, बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर और डा. राजेंद्र प्रसाद को नमन किया। उन्होंने कहा कि इस संविधान दिवस को इसलिए भी मनाना चाहिए क्योंकि हमारा रास्ता सही है या नहीं है, इसका मूल्यांकन हो सके। हमारा संविधान सिर्फ अनेक धाराओं का संग्रह नहीं, हमारा संविधान सहस्त्रों वर्ष की महान परंपरा, अखंड धारा उस धारा की आधुनिक अभिव्यक्ति है। पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रहित सबसे ऊपर था तभी संविधान का निर्माण हो पाया।

पीएम मोदी ने नाम लिए बगैर कांग्रेस पर हमला बोला और कहा कि आज कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक समस्या है। पारिवारिक पार्टियां देश के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। पारिवारिक पार्टियों का मतलब ये नहीं है कि एक परिवार से ज्यादा लोग राजनीति में न आएं। पारिवारिक पार्टियों का मतलब है कि पार्टी की कमान पीढ़ी दर पीढ़ी एक ही परिवार के लोगों के हाथ में रहने से है।

पीएम मोदी ने विपक्षी दलों पर हमला बोलते हुए कहा कि ये कार्यक्रम किसी सरकार ने नहीं, किसी प्रधानमंत्री ने आयोजित नहीं किया था। ये कार्यक्रम लोकसभा के स्पीकर ने आयोजित किया जो सदन के गौरव होते हैं। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब आंबेडकर की 125वीं जयंती थी। हम सबको लगा इससे बड़ा पवित्र अवसर क्या हो सकता है कि बाबासाहेब आंबेडकर ने इस देश को जो नजराना दिया है, उसको हम हमेशा एक स्मृति ग्रंथ के रूप में याद करते हैं। लोकसभा के स्पीकर ओम बिड़ला ने देश के संविधान और संवैधानिक मूल्यों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमारे संविधान का पूरे विश्व में सम्मान है।

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