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जेल में बंद आसाराम के 7 अनुयायी दंगा और पत्रकारों की पिटाई मामले में दोषी करार, कोर्ट ने मुकर्रर की सजा

Janjwar Desk
15 Aug 2021 8:05 AM GMT
जेल में बंद आसाराम के 7 अनुयायी दंगा और पत्रकारों की पिटाई मामले में दोषी करार, कोर्ट ने मुकर्रर की सजा
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(आशाराम बापू के 7 अनुयायी दंगा और मारपीट के दोषी पाए गए हैं)

घटना के 12 साल बाद, गांधीनगर मजिस्ट्रियल कोर्ट ने शुक्रवार को उनके सात अनुयायियों को एक साल के कारावास की सजा सुनाई, जब अदालत ने उन्हें दंगा करने और चोट पहुंचाने का दोषी पाया..

जनज्वार। बलात्कार के दोषी करार दिए गए और उसी मामले में जेल में बंद आसाराम बापू के अनुयायियों द्वारा पत्रकारों पर हमला किए जाने के मामले में दोषी करार दिया गया है। कोर्ट द्वारा उन सभी को सजा भी मुकर्रर कर दी गई है। घटना के 12 साल बाद, गांधीनगर मजिस्ट्रियल कोर्ट ने शुक्रवार को उनके सात अनुयायियों को एक साल के कारावास की सजा सुनाई, जब अदालत ने उन्हें दंगा करने और चोट पहुंचाने का दोषी पाया।

मामला साल 2008 का गुजरात का है, जब स्वयंभू आशाराम के अनुयायियों ने पत्रकारों के एक समूह पर लाठियों से हमला किया था। पत्रकार दो नाबालिग लड़कों की मौत के विरोध में बुलाए गए बंद को कवर कर रहे थे। दोनों लड़के मोटेरा में उनके आश्रम के गुरुकुल में रहते थे। सजा पानेवाले ये सातों अभियुक्त फिलहाल जेल की सजा काट रहे हैं।

गांधीनगर कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पीके गढ़वी ने अपने फैसले में कहा कि विस्तृत आदेश की प्रतीक्षा की जा रही है। लेकिन सात लोगों को आईपीसी की धारा 147 (दंगा के लिए सजा), 149 (गैरकानूनी सभा), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) के अपराध के लिए दोषी पाया गया।

अभियोजन पक्ष 'गुजरात राज्य' द्वारा कुल पांच आपराधिक शिकायत आवेदन मजिस्ट्रेट की अदालत के समक्ष थे। सभी पांच मामलों में काम कर रहे वकील के अनुसार, चार आवेदनों में से सभी आरोपियों को आरोपों से बरी कर दिया गया, जबकि पांचवें मामले में 19 आरोपियों में से सात को दोषी ठहराया गया और 12 अन्य को आरोपों से बरी कर दिया गया।

वकील ने कहा, 'भीड़ में 50-60 से ज्यादा लोग शामिल थे। आरोपियों को बरी किया जाना मुख्य रूप से इस आधार पर था कि यह निर्धारित नहीं किया जा सकता है कि वे अपराध स्थल पर थे या नहीं। यहां तक ​​​​कि अगर कुछ आरोपियों की उपस्थिति अपराध के स्थान पर निर्धारित की जा सकती है, तो यह सबूत या अभियोजन पक्ष के गवाहों से निर्धारित नहीं किया जा सकता है कि क्या वे अपराध को अंजाम देने में शामिल थे।'

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