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शबनम केस : भारत में पहली बार किसी महिला को होगी फांसी, वकील ने की सजा बदलने की मांग

Janjwar Desk
24 July 2021 5:21 AM GMT
शबनम केस : भारत में पहली बार किसी महिला को होगी फांसी, वकील ने की सजा बदलने की मांग
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देश में पहली बार फांसी की सजा पाने की आरोपी शबनम. (File Fhoto)

शबनम की फांसी को उम्र कैद में बदले जाने की मांग को लेकर जो दलीलें दी गई हैं, उनमें सबसे प्रमुख यह है कि आजाद भारत में आज तक किसी भी महिला को फांसी नहीं हुई है। इसके साथ ही जेल में जन्मे शबनम के 13 साल के बेटे के भविष्य को लेकर भी गुहार लगाई गई है...

जनज्वार, लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्थित बरेली की रहने वाली शबनम मीडिया के जरिये घर-घर तक पहुंच चुकी है। 7 कत्ल करने वाली शबनम देश की पहली महिला होगी जिसे फांसी दिए जाने का फैसला कोर्ट द्वारा दिया गया। मगर अब इस मामले में एक नया मोड़ तब आ गया है, जब इलाहाबाद हाईकोर्ट की वकील सहर नक़वी ने उनके लिए फांसी के बदले उम्रकैद की मांग की है। सहर नक़वी ने पत्र लिखकर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से मांग की है कि तमाम पहलुओं को देखते हुए शबनम की फांसी उम्रकैद में बदली जाये। राज्यपाल ने पत्र का संज्ञान लेते हुए पूरे मामले पर निर्णय लेने के लिए कारागार विभाग को निर्देशित कर दिया है।

गौरतलब है कि शबनम मामले में सहर नकवी उनकी वकील हैं। उनका कहना है कि पत्र के आधार पर राज्यपाल ने राहत देने का काम किया है। उनके द्वारा इस संबंध में कारागार विभाग से फैसला लेने का आदेश दिया है। ऐसे में फांसी होने का फैसला पलटने पर विचार किया जा सकता है।

23 फरवरी 2021 को भेजे गये पत्र पर जवाब देते हुए इस मामले में यूपी की गवर्नर आनंदी बेन पटेल ने दखल दिया है। शबनम की फांसी की सजा को मानवीय आधार पर उम्रकैद में बदले जाने की मांग को लेकर दाखिल इलाहाबाद हाईकोर्ट की महिला वकील सहर नक़वी की अर्जी को गवर्नर ने स्वीकार किया है।

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साल 2008 के अप्रैल में अपने परिवार के सात सदस्यों की हत्या के लिए मौत की सजा पाने वाली शबनम ने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास एक नई दया याचिका इसी साल फरवरी में भेजी थी।

महानिदेशक (जेल विभाग और सुधार सेवाएं) आनंद कुमार ने तब कहा था, शबनम पहले भी उत्तर प्रदेश की राज्यपाल से माफी मांग चुकी हैं, लेकिन पटेल ने उनकी याचिका खारिज कर दी थीं। रामपुर के जेल अधीक्षक ने कहा, "25 मई, 2015 को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से दी गई मौत की सजा के संबंध में शबनम ने अपने वकील के माध्यम से उत्तर प्रदेश की राज्यपाल को भेजी गई दया याचिका की एक प्रति को हमारे कार्यालय में उपलब्ध कराया था।"

यह थी वकील की दलील

वकील सहर नकवी की अर्जी में शबनम की फांसी को उम्रकैद में बदले जाने की मांग को लेकर जो दलीलें दी गई हैं, उनमें सबसे प्रमुख यह है कि आजाद भारत में आज तक किसी भी महिला को फांसी नहीं हुई है। इसके साथ ही जेल में जन्मे शबनम के 13 साल के बेटे के भविष्य को लेकर भी गुहार लगाई गई है।

सहर नकवी ने गवर्नर को भेजी गई अर्जी में लिखा था कि अगर याची को सूली पर लटकाया जाता है, तो पूरी दुनिया में भारत और यहां की महिलाओं की छवि खराब होगी। क्योंकि देश में महिलाओं को देवी की तरह पूजने और सम्मान देने की पुरानी परंपरा है। वकील के मुताबिक वह शबनम के गुनाह या उसकी सजा को लेकर कोई सवाल नहीं उठा रही हैं, बल्कि यह चाहती हैं कि उसकी फांसी की सजा को सिर्फ उम्रकैद में तब्दील कर दिया जाए।

अर्जी में यह भी दलील दी गई कि शबनम को फांसी दिए जाने से जेल में जन्मे उसके इकलौते बेटे ताज उर्फ बिट्टू पर गलत असर पड़ेगा। शबनम को फांसी होने पर समाज उसके बेटे को हमेशा ताना मारेगा। उसका मजाक उड़ाएगा। समाज में उसे उपेक्षा मिलेगी। इस वजह से बेटे का मानसिक विकास प्रभावित हो सकता और उसका भविष्य खराब हो सकता है। अर्जी में दलील दी गई है कि मां के गुनाहों की सजा उसके बेटे को मिलना कतई ठीक नहीं होगा।

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वकील सहर नकवी का कहना है कि वह जल्द ही कारागार विभाग के प्रमुख सचिव से मुलाकात कर उन्हें फाइल सौंपेंगी। नकवी के मुताबिक, एक महिला होने के नाते वह शबनम को फांसी की सजा से बचाने की हर मुमकिन कोशिश करेंगी। अगर यहां से राहत नहीं मिलती है तो दूसरे माध्यमों से भी गुहार लगाएंगी।

घर वालों को नहीं मंजूर थी शबनम की मोहब्बत

अमरोहा जिले के बावनखेड़ी गांव की रहने वाली शबनम अपने पड़ोस में काम करने वाले सलीम से बेपनाह मोहब्बत करती थी। शबनम के घर वालों को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। जब उसे यह लगा कि घर वालों के रहते वह अपनी मोहब्बत में कामयाब नहीं हो पाएगी तो उसने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अप्रैल-2008 में माता-पिता, दो भाइयों, भाभी और दुधमुंहे भतीजे के साथ ही परिवार के 7 सदस्यों की गला रेतकर हत्या कर दी थी।

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वारदात के वक्त शबनम गर्भवती थी। उसने जेल में ही एक बच्चे को जन्म दिया था। शबनम वर्तमान में प्रदेश की बरेली जेल में बंद है। उसे और आशिक सलीम दोनों को ही फांसी की सजा सुनाई गई है। ज्यादातर जगहों से दोनों की अर्जियां खारिज हो चुकी हैं। फांसी की सजा से बचने के लिए दोनों के पास कम ही रास्ते बचे हैं।

ऐसे में हाईकोर्ट की महिला वकील सहर नकवी की शबनम की फांसी की सजा बदलवाने की मुहिम कितना कारगर साबित होगी, इसका फैसला तो वक्त करेगा, लेकिन यह जरूर है कि अगर शबनम को सूली पर लटकाया जाता है तो यह अपने आप में इतिहास होगा। क्योंकि फांसी की सजा पाने वाली शबनम आजाद भारत की पहली महिला बनेगी।

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