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Sister Abhaya murder case: सिस्टर अभया मर्डर केस में दोषी पादरी और नन को केरल हाईकोर्ट से मिली जमानत

Janjwar Desk
24 Jun 2022 2:00 PM GMT
Sister Abhaya murder case: सिस्टर अभया मर्डर केस में दोषी पादरी और नन को केरल हाईकोर्ट से मिली जमानत
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सिस्टर अभया मर्डर केस में दोषी पादरी और नन को केरल हाईकोर्ट से मिली जमानत

Sister Abhaya murder case: अट्ठाइस साल की जद्दोजहद के बाद निचली अदालत से उम्र कैद की सजा पाए दो कैदियों को केरल हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने जमानत दे दी।

Sister Abhaya murder case: अट्ठाइस साल की जद्दोजहद के बाद निचली अदालत से उम्र कैद की सजा पाए दो कैदियों को केरल हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने जमानत दे दी। केरल उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने अंतरिम आदेश में कैथोलिक पादरी थॉमस कोट्टूर और नन सेफी की उम्र कैद की सजा को निलंबित करते हुए यह जमानत दी है। इन दोनों को 2020 में सीबीआई अदालत ने 1992 में हुई सिस्टर अभया की हत्या के मामले में दोषी ठहराया था।

बता दे कि एक कैथोलिक चर्च में कार्यरत अभया नाम की एक महिला नन की लाश 27 मार्च 1992 को कोट्टायम के एक कॉन्वेंट में एक कुएं के अंदर से बरामद हुई थी। शुरुआती जांच के बाद से ही पुलिस इसे आत्महत्या करार देने पर उतारू थी। अपनी इसी रिपोर्ट को आधार बनाते हुए पुलिस ने घटना के कुछ दिन बाद ही इस मामले को बंद कर दिया था, लेकिन लोगों के गुस्से को देखते हुए इस हाई प्रोफाइल मामले को सीबीआई के हवाले कर दिया गया। मामला सीबीआई के हाथ में आने के बाद इसकी वह कड़िया जुड़ने लगी जिन तक पुलिस नहीं पहुंच पा रही थी।

सीबीआई के अनुसार कोट्टायम में पायस एक्स कॉन्वेंट हॉस्टल की रसोई के अंदर अभया ने कोट्टूर, पुथरिकायिल और सेफी को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। यही आपत्तिजनक दृश्य अभया की हत्या की मुख्य वजह बना। जिसके बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। हत्यारोपियों को इस बात का डर सताने लगा था कि सिस्टर अभया इस घटना का खुलासा कर देगी, जिससे उनकी बदनामी हो जायेगी। ऐसे में कोट्टूर ने उसका गला घोंट दिया, जबकि सेफी ने कथित तौर पर उसे कुल्हाड़ी से मारा। दोनों ने मिलकर अभया के शव को परिसर के एक कुएं में फेंक दिया था।

इस मामले में दोनों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या) और धारा 201 (सबूत नष्ट करना) के तहत आरोप लगाए गए थे। अट्ठाइस साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद दिसंबर 2020 में तिरुवनंतपुरम की एक सीबीआई अदालत ने दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। निचली अदालत ने एक अन्य कथित आरोपी फादर जोस पुथरिकायिल की आरोपमुक्त करने की याचिका को स्वीकार कर लिया था।

सजा के बाद दोनों आरोपियों ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी, जिसकी जांच करने के बाद केरल हाईकोर्ट की खंडपीठ ने दोनों सजायाफ्ता की रिहाई को लेकर कहा, "हम दो आरोपियों को अंतरिम उपाय के रूप में रिहा नहीं कर सकते। हालांकि इस मामले में हुई अपील पर फैसला आने तक उनकी सजा को निलंबित कर सकते हैं।"

इस मामले में न्यायमूर्ति विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति सी जयचंद्रन की पीठ ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर फैसला आने तक दोनों को जमानत पर रिहा करने की अनुमति दी है।

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