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योगी आदित्यनाथ का दावा, पूर्वी उत्तर प्रदेश से जापानी इंसेफ्लाइटिस खत्म होने की कगार पर

Janjwar Desk
1 Sep 2020 5:48 AM GMT
योगी आदित्यनाथ का दावा, पूर्वी उत्तर प्रदेश से जापानी इंसेफ्लाइटिस  खत्म होने की कगार पर
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योगी ने कहा जापानी इंसेफ्लाइटिस के आ रहे हैं पूर्वी उत्तर प्रदेश में बहुत कम मामले, 2 साल में मिट जायेगा इसका नामोनिशान

अगस्त 2017 में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में तीन दिनों में 60 बच्चों की मौत इंसेफ्लाइटिस से हो गई थी। इसके पीछे कथित तौर पर ऑक्सीजन की आपूर्ति में व्यवधान होने के कारण बताया गया था और इसे लेकर बड़े पैमाने पर विवाद हुआ था....

गोरखपुर। पूर्वी उत्तर प्रदेश में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) ने कई सालों तक सैकड़ों लोगों की जान ली है। बच्चों की इसके कारण बड़ी संख्या में मौतें होती हैं। मगर अब सरकार ने दावा किया है कि यह रोग पूरी तरह खत्म होने की कगार पर है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुताबिक, जापानी इंसेफेलाइटिस यह पूरी तरह खत्म होने की कगार पर है। पिछले 40 साल से कहर बरपा रही इंसेफेलाइटिस को अगले दो सालों में पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा।

गोरखपुर की अपनी हालिया यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री योगी ने ने पत्रकारों से कहा कि राज्य के पूर्वी हिस्से में इंसेफेलाइटिस की मृत्यु दर 2016 के बाद 95 प्रतिशत तक गिर गई है।

उन्होंने कहा, "इंसेफेलाइटिस के खिलाफ लड़ाई अब अंतिम चरण में है। दो साल में इसे इस क्षेत्र से खत्म कर दिया जाएगा। हम कोविड-19 के खिलाफ भी ऐसी ही लड़ाई लड़ेंगे।"

उन्होंने गोरखपुर, कुशीनगर, महराजगंज और देवरिया के इंसेफेलाइटिस के पिछले चार सालों के आंकड़े पेश किए, जिनमें मामलों की संख्या और मृत्यु दर में भारी गिरावट देखी गई।

गौरतलब है कि अगस्त 2017 में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में तीन दिनों में 60 बच्चों की मौत हो गई थी। इसके पीछे कथित तौर पर ऑक्सीजन की आपूर्ति में व्यवधान होने के कारण बताया गया था और इसे लेकर बड़े पैमाने पर विवाद हुआ था।

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इसके बाद सरकार ने दावा किया है कि योगी ने इस क्षेत्र में स्वच्छता और जागरूकता अभियान चलाया है, जिससे एन्सेफलाइटिस मामलों की संख्या में भारी कमी आई है।

पूर्वांचल के 12 जिलों में यह बीमारी हर साल 4 से 5 हजार लोगों को अपना शिकार बनाती है। 1977—78 में गोरखपुर में इंसेफ्लाइटिस का पहला मामला सामने आया था और 1998 में योगी आदित्यनाथ ने पहली बार संसद यह मुद्दा उठाया था।

इंसेफ्लाइटिस रोगियों के मौत यानी रोग होने के बाद न बच पाने का औसत भारत में होने वाले किसी भी रोग से ज्यादा है। 2017 में इंसेफेलाइटिस से हुई मौतों का मृत्यु दर 31.49 फीसदी रही और 2016 में 26.16 फीसदी। जो शोध सामने आये हैं उनके मुताबिक इंसेफ्लाइटिस होने पर करीब 30 फीसदी मरीजों की मौत हो जाती है। जो बच जाते हैं, उनमें से करीब आधे आंशिक या वृहद अपंगता के शिकार हो जाते हैं।

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इंसेफ्लाइटिस यानी जापानी बुखार क्यूलेक्स प्रजाति के मच्छर से होता है। इसका भारत में कोई टीका नहीं है। सरकार ने इस बीमारी से निपटने के लिए पिछले वर्षों में चीन से टीके मंगाए गए थे, लेकिन कुछ खास सफलता नहीं मिली। 2006 से इंसेफ्लाइटिस का टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा था, जिसके परिणाम शून्य रहे थे।

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