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उत्तर प्रदेश

बाबरी ध्वंस केस: जानें 2000 पन्नों के फैसले की मुख्य बातें, क्या हो सकता है आगे

Janjwar Desk
30 Sep 2020 8:28 AM GMT
बाबरी ध्वंस केस: जानें 2000 पन्नों के फैसले की मुख्य बातें, क्या हो सकता है आगे
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File photo

कोर्ट ने अपने 2000 पन्नों के फैसले में कहा है कि आरोपियों के खिलाफ ठोस साक्ष्य नहीं मिल सके हैं और यह पूर्व निर्धारित नहीं था, जानते हैं कि कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें क्या हैं और अब आगे क्या हो सकता है...

जनज्वार। बाबरी के ढांचे के विध्वंस मामले में सीबीआई के स्पेशल कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने अपने 2000 पन्नों के फैसले में कहा है कि आरोपियों के खिलाफ ठोस साक्ष्य नहीं मिल सके हैं और यह पूर्व निर्धारित नहीं था। आइए जानते हैं कि कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें क्या हैं और अब आगे क्या हो सकता है।

साल 1992 के राम मंदिर आंदोलन के अगुवा लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती समेत सभी आरोपी अब बरी हो चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2000 पन्नों के अपने फैसले में सीबीआई स्पेशल कोर्ट के जज एसके यादव ने कहा कि गवाहों के बयान बताते हैं कि अयोध्या में कारसेवा के लिए जुटी भीड़ की नीयत बाबरी ढांचा गिराने की नहीं थी।

विवादित जगह पर रामलला की मूर्ति थी, कारसेवक ढांचा गिराते तो मूर्ति को भी नुकसान पहुंचता। इसके अलावा कारसेवकों को फूल और जल साथ में लाने को कहा गया था, ताकि उनके दोनों हाथ व्यस्त रहें।

कोर्ट ने यह भी कहा कि सीबीआई 32 आरोपितों का दोष साबित करने में असमर्थ रही। अखबारों में लिखी बातों और वीडियो को भी ठोस सबूत नहीं माना जा सकता, चूंकि वीडियो भी ओरिजनल नहीं थे। इनमें बीच-बीच में न्यूज़ भी थे, लिहाजा ये टेंपर्ड थे। इसलिए ये विश्वसनीय सबूत नहीं कहे जा सकते। इसके अलावा इन वीडियोज-फोटोज के निगेटिव भी कोर्ट में प्रस्तुत नहीं किया जा सका।

इससे पहले 1 सितंबर को सुनवाई पूरी होने के बाद आज लखनऊ की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने सभी आरोपियों को फैसले के समय कोर्ट में मौजूद रहने को कहा था। आडवाणी, जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह समेत 6 आरोपी कोर्ट में मौजूद नहीं हो सके और इन्होंने वीडियो कॉन्फेन्सिंग से फैसला सुना। फैसले के मद्देनजर अयोध्या और लखनऊ में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

अयोध्या के बाबरी विध्वंस मामले में कुल 49 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। इनमें से 17 का निधन हो चुका था। पहली एफआईआर फैजाबाद थाने में राम जन्मभूमि के एसओ प्रियंवदा नाथ शुक्ला जबकि दूसरी एफआईआर एसआई गंगा प्रसाद तिवारी ने दर्ज कराई थी। इसके अलावा बाकी 47 एफआईआर अलग-अलग तारीखों पर पत्रकारों-फोटोग्राफरों सहित अन्य लोगों ने दर्ज कराई थी। इसके बाद इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।

लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा व विष्णु हरि डालमिया पर धारा 120 बी यानी आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगाया। इन सबके खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी, 147, 149, 153ए, 153बी और 505 (1) के तहत मुकदमा चला।

विष्णु हरि डालमिया की मौत हो चुकी है। महंत नृत्य गोपाल दास, महंत राम विलास वेदांती, बैकुंठ लाल शर्मा उर्फ प्रेमजी, चंपत राय बंसल, धर्मदास और डॉ सतीश प्रधान पर भी आईपीसी की धारा 147, 149, 153ए, 153बी, 295, 295ए व 505 (1)बी के साथ ही धारा 120 बी के तहत केस चला।

इस तरह 49 में से कुल 32 अभियुक्तों के मुकदमे की कार्यवाही शुरू हुई, शेष 17 अभियुक्तों की मौत हो चुकी है।49 आरोपितों में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा, महंत नृत्य गोपाल दास, डॉ। राम विलास वेदांती, चंपत राय, महंत धर्मदास, सतीश प्रधान, पवन कुमार पांडेय, लल्लू सिंह, प्रकाश शर्मा, विजय बहादुर सिंह, संतोष दुबे, गांधी यादव, रामजी गुप्ता, ब्रज भूषण शरण सिंह, कमलेश त्रिपाठी, रामचंद्र खत्री, जय भगवान गोयल, ओम प्रकाश पांडेय, अमर नाथ गोयल, जयभान सिंह पवैया, महाराज स्वामी साक्षी, विनय कुमार राय, नवीन भाई शुक्ला, आरएन श्रीवास्तव, आचार्य धर्मेंद्र देव, सुधीर कुमार कक्कड़ और धर्मेंद्र सिंह गुर्जर थे।

सीबीआई की तरफ से बनाए गए 49 आरोपियों में से अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, विष्णु हरि डालमिया, मोरेश्वर सावें, महंत अवैद्यनाथ, महामंडलेश्वर जगदीश मुनि महाराज, बैकुंठ लाल शर्मा, परमहंस रामचंद्र दास, डॉ। सतीश नागर, बालासाहेब ठाकरे, तत्कालीन एसएसपी डीबी राय, रमेश प्रताप सिंह, महात्यागी हरगोविंद सिंह, लक्ष्मी नारायण दास, राम नारायण दास और विनोद कुमार बंसल का निधन हो चुका था।

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