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उत्तर प्रदेश

बिकरू डॉन विकास दुबे ने दबंगई से एक भाई की पत्नी को बनवाया था प्रधान और दूसरे की पत्नी को कोटेदार

Janjwar Desk
8 Sep 2020 5:41 AM GMT
बिकरू डॉन विकास दुबे ने दबंगई से एक भाई की पत्नी को बनवाया था प्रधान और दूसरे की पत्नी को कोटेदार
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File Photo.
बिकरू के तमाम लोगों ने शिकायत की है कि गैंगस्टर विकास दुबे ने अपने रसूख के दम पर अजीज अनुराग अवस्थी उर्फ सिन्नी की पत्नी रानो को इसी पंचवर्षीय में निर्विरोध प्रधान बनवाया, बाद में छोटे भाई अविनाश की पत्नी सीमा को अधिकारियों से साठगांठ कर मार्च-2020 में सरकारी राशन का कोटा दिला दिया

जनज्वार, कानपुर। कानपुर के गैंगस्टर विकास दुबे की मौत के बाद लोग अब खुलकर सामने आने लगे हैं। एसटीएफ मुठभेड़ में मारे गये बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे अपने रसूख का बखूबी इस्तेमाल करता था। वह अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए तमाम हथकंडे आजमाता था। अपने इन्हीं हथकण्डों का इस्तेमाल करते हुए दोनो भाईयों की पत्नियों सहित कई चहेतों को को फायदा पहुँचाया था।

बिकरू के तमाम लोगों ने शिकायत की है कि गैंगस्टर विकास दुबे ने अपने रसूख के दम पर अजीज अनुराग अवस्थी उर्फ सिन्नी की पत्नी रानो को इसी पंचवर्षीय में निर्विरोध प्रधान बनवाया था। बाद में छोटे भाई अविनाश की पत्नी सीमा को अधिकारियों से साठगांठ कर मार्च-2020 में सरकारी राशन का कोटा दिला दिया, जबकि नियमानुसार किसी भी जनप्रतिनिधि या उसके परिवार वाले को कोटा नहीं दिया जा सकता। प्रधानी और कोटा पाकर दोनो देवरानी-जेठानी भी गाँव वालों पर रौब गांठती थीं।

लोगों ने शिकायत में यह भी बताया है कि अनुराग ने जिला प्रशासन को एक फर्जी हलफनामा भी दिया है, जिसमें प्रधान और कोटेदार को एक-दूसरे का संबंधी न होने की बात लिखी है। ऐसे में कोटा देने से पहले जांच करने गए शिवराजपुर खंड अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। आरोप है कि ग्रामीणों ने जब इसकी शिकायत जिला प्रशासन सहित अन्य अधिकारियों से की तो प्रधान और उसके साथियों ने जान से मारने की धमकी दी।

इस सबके अलावा विकास दुबे ने बिकरू गांव से अपने भाई दीपू की पत्नी अंजली, शार्प शूटर विष्णुपाल उर्फ जिलेदार को भीटी से, रामपुर से सगी बहन रानी तिवारी को, बसेन से अपने भांजे शिव तिवारी को, दिलीपनगर से अनुराग अवस्थी उर्फ सिन्नी, जादेपुर से पुल्लू उर्फ अनुराग सहित कंजटी से वेदप्रकाश समेत कई लोगों को अपनी दहशत का इस्तेमाल कर निर्विरोध ग्राम प्रधान बनाया। साथ ही कइयों को राशन का कोटा भी दिलाया था।

मामला संज्ञान में आने के बाद डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने सीओ बिल्हौर संतोष सिंह को बीती शुक्रवार 4 सितंबर को जांच के आधार पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

डीआईजी का कहना है कि जिला प्रशासन की मदद से मामले की जांच कराई जाएगी। डीआईजी ने कहा कि विकास से जुड़ी हर एक सच्चाई से पर्दा उठाया जाएगा।

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