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उत्तर प्रदेश

सरकार जनित महंगाई से टूट गई जनता की आर्थिक कमर, जमाखोरों को मिली है जनता को लूटने की खुली छूट- अजय लल्लू

Janjwar Desk
26 Oct 2020 1:58 PM GMT
सरकार जनित महंगाई से टूट गई जनता की आर्थिक कमर, जमाखोरों को मिली है जनता को लूटने की खुली छूट- अजय लल्लू
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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि आवश्यक वस्तु अधिनियम की लिस्ट से तेल, दलहन, आलू प्याज जैसी आवश्यक वस्तुओं की भी कालाबाजारी होनी शुरू हो गई है, इसके चलते वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं और वह आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गए हैं.....

लखनऊ। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने एक बार फिर के मसले पर सरकार पर निशाना साधा है। लल्लू ने कहा राज्य में व्याप्त महंगाई से आम जनता कराह रही है उसका जीना मुश्किल हो गया। रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल साग-सब्जी और दलहन में तीस-चालीस फीसदी का उछाल आया है। कोरोना काल के चले जहां सरकारी नौकरी कर रहे और पेंशन धारकों को छोड़कर समाज का सभी तबका भयंकर आर्थिग तंगी से गुजर रहा है, उस पर एक-एक पैसे जुटाने भारी पड़ रहे हैं, सरकार के गलत फैसलों के चलते हर चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं।

लल्लू ने आगे कहा कि सरकार ने अभी जो भी तीन नए कानून बनाए हैं वो पूरी तरह से पूंजीपतियों और बिचौलियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाए गए हैं, उसका सीधा असर जनता पर पड़ रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि आवश्यक वस्तु अधिनियम की लिस्ट से तेल, दलहन, आलू प्याज जैसी आवश्यक वस्तुओं की भी कालाबाजारी होनी शुरू हो गई है। इसके चलते वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं और वह आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गए हैं। सारी दालें सौ रूपये से ऊपर 120 से 150 रूपये में बिक रही हैं।

लल्लू ने कहा कि तेल की कीम भी पहले के मुकाबले तीस से पचास रूपये अधिक है, जबकि प्याज अस्सी से सौ रूपये किलों की कीमत में मिल रहा है। आलू चाली से पैंतालिस रूपये प्रति किलो और नया आलू साठ रूपये किलो की दर से मिल रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने खुद इस बात को स्वीकार किया था कि किसानों से आलू 475 रूपये क्विंटल खरीदा गयाथा, बाकि पैसा सरकार समर्थक बिचौलिए आम आदमी से मुनाफाखोरी करके वसूल कर रहे हैं।

अजय कुमार लल्लू ने इस महंगाई को सरकार जनित बताया और कहा कि कोरोना जैसी महामारी के चलते आम जनता की आर्थिक कमर टूट चुकी है और वे अब जैसे कैसे एक-एक रुपये जोड़कर अपना घर चला रहे हैं। ऐसे में सरकार द्वारा जनित कमर तोड़ महंगाई जिसमे पूंजीपतियों और धन्नासेठों को आवश्यक वस्तुओं का कानून बनाकर जमाखोरी करने और जनता को लूटने की खुली छूट दी गई है।

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