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उत्तर प्रदेश

अपने साथियों की धोखेबाजी के कारण मारे गए 8 पुलिसकर्मियों की ये रही पूरी डिटेल

Janjwar Desk
4 July 2020 2:43 PM GMT
अपने साथियों की धोखेबाजी के कारण मारे गए 8 पुलिसकर्मियों की ये रही पूरी डिटेल
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गुरुवार 2 जुलाई की देर रात अपराधियों के साथ मुठभेड़ में कानपुर पुलिस के आठ पुलिसकर्मी मारे गए थे, इन मृतकों में डीएसपी भी शामिल थे.....

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर के बिकरु में हुई मुठभेड़ में शहीद हुए आठ पुलिसकर्मियों के परिवार की स्थिति अत्यंत गमजदा है। सभी फफक-फफक कर रो रहे हैं। किसी की बेटी तो किसी की मां बेटे और उसके किये गए वादों को याद कर सिहर उठते हैं। हमले में मारे गए पुलिसकर्मियों में कोई दूसरे दिन छुट्टी पर जाने वाला था तो कोई कुछ महीनों बाद ही रिटायर होने वाला था। परिवार में मातम पसर चुका है।

देवेंद्र मिश्रा (सीओ)

बांदा के गिरवां महेवा निवासी सीओ देवेंद्र कुमार मिश्रा अपनी पत्नी आशा व दो बेटियां वैष्णवी तथा वैशार्दी समेत पामकोट अपार्टमेंट मेडिकल कॉलेज में रहते थे। बड़ी बेटी मेडिकल की तैयारी कर रही तो छोटी 12 वीं क्लास की छात्रा है। देवेंद्र के दो छोटे भाई राजीव डाकघर में व आरडी मिश्रा पूर्व प्रधान रहे हैं। देवेंद्र 1980 बैच के दरोगा हैं और 2007 में अचलगन्ज उन्नाव में तैनात रहे हैं। उन्नाव से ही प्रोन्नत होकर देवेंद्र इंस्पेक्टर बने। वह कानपुर में रेलबाजार, नजीराबाद, मूलगंज, किदवईनगर सहित बर्रा थाने का चार्ज सम्हाल चुके थे। 2016 में गाजियाबाद के मोदीनगर में बतौर सीओ की तैनाती पाने के बाद स्वरूपनगर होते हुए विल्हौर आये थे। कोरोना संकट के समय घर कम ही आते थे व अक्सर वीडियो कालिंग के जरिये ही घर तथा बेटियों से बात करते थे।

महेश चंद्र यादव (एसओ)

मूलतः रायबरेली के बनपुरवा निवासी महेश सपरिवार कानपुर के शिवराजपुर में रहते थे। घर मे पत्नी सुमन के अलावा दो बेटे विवेक व विराट है। बड़ा बेटा विवेक कोटा से मेडिकल की तैयारी कर रहा है और विराट अभी डेढ़ साल का है। विवेक कहता है पिता महेश जाने से पहले उससे गस्त पर जाने की कहकर निकलते थे। सुबह उनके हमराहियों ने उनकी मौत की खबर दी। महेश के पिता राज नरायन जलकल विभाग में पंप ऑपरेटर थे। महेश 1996 में सहारनपुर से सिपाही पद पर भर्ती हुए थे। 2014 में दरोगा भर्ती परीक्षा पास करने के बाद पीआरओ एसएसपी कंवर के पद पर तैनाती हुई थी। करीब एक साल पहले ही उन्हें थाना शिवराजपुर का चार्ज मिला था।

अनूप सिंह (चौकी प्रभारी)

मानधात प्रतापगढ़ के बेलखरी गांव के मूल निवासी अनूप सिंह की तैनाती पिछले वर्ष फरवरी में टिकरा चौकी में हुई थी। रेलवे से रिटायर्ड देवनरायन के छोटे बेटे अनूप 2005 में पुलिस की नौकरी पाए थे। परिवार में पत्नी नीतू, बेटी गौरी व एक बेटा सूर्यांश है। परिवार प्रयागराज में रह रहा है। अनूप इसी साल की जनवरी में मंधना चौकी में चार्ज लेकर आये थे। उनकी मौत की खबर सुनकर भाई आलोक सहित अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। उनके साथी पुलिसकर्मियों ने बताया कि वह लॉकडाउन के बाद मार्च से घर नहीं गए थे। नजदीकी दिनों में उन्हें तीन दिन की छुट्टी मिली थी। वह शुक्रवार को घर जाने वाले थे। अनूप ने घर जाने के लिए बीवी व बच्चों के लिए नए कपड़े भी खरीदे थे कि उससे पहले यह हादसा हो गया।

नेबुलाल (एसआई)

कानपुर के शिवराजपुर थाने में तैनात एसआई नेबुलाल मूलरूप से प्रयागराज के हंडिया मिती के रहने वाले थे। पत्नी श्यामादेवी सहित बेटे अरविंद व हिमांशु हैं। बड़ा बेटा कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से मेडिकल की तैयारी व छोटा बेटा बीए प्रथम वर्ष का छात्र है। नेबुलाल शिवराजपुर के थाना परिसर में ही रहते थे। छोटे बेटे के साथ पत्नी गांव में रहती है। चार भाइयों में सबसे बड़े नेबुलाल पांच दिनों पहले ही प्रयागराज यानी अपने गांव से लौटे थे।

सुल्तान सिंह (सिपाही)

झांसी के मऊरानीपुर निवासी सिपाही सुल्तान सिंह थाना चौबेपुर में सिपाही थे। घर मे पत्नी उर्मिला सहित चार साल की बिटिया चैरी है। सुल्तान बचपन मे ही मां की मौत के बाद अपने ननिहाल में रहे और वहीं से पढ़ाई लिखाई कर पुलिस में भर्ती हुए थे। सुबह हमराहियों ने फ़ोन कर उनकी पत्नी को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही सुल्तान की पत्नी उर्मिला बेटी व अपनी मां सहित पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंची। सुल्तान के मामा दुर्गा चरण ने बताया कि उसने गुरुवार रात ही पत्नी से बात की थी। उसकी मौत के बाद बेटी के सिर से पिता का साया उठ गया।

बबलू कुमार (सिपाही)

मूलतः आगरा के फतेहाबाद निवासी किसान छोटेलाल के बेटे बब्लू वर्ष 2018 में पुलिस में भर्ती हुए थे। उनकी पहली तैनाती कानपुर में ही हुई थी। जिसमे उन्हें थाना बिठूर मिला था। बब्लू की अभी शादी नहीं हुई थी। घर व्यवस्थित करने के बाद ही वह शादी के लिए कह रहे थे जिसके आगे परिवार भी झुकता था। शुक्रवार सुबह साथियों ने उनके मरने की खबर उनके परिवार को दी तब घरवाले पुलिस लाइन पहुंचे थे।

जितेंद्र (कांस्टेबल)

मथुरा के रिफाइनरी बरारी निवासी तीर्थपाल के बेटे जितेंद्र पाल जुलाई 2018 में पुलिस सेवा में आये थे। परिवार में 2 भाइयों सहित एक बहन है। भाई के मुताबिक जितेंद्र पूरे परिवार में अकेले कमाने वाले थे। और उनपर ही घर की पूरी जिम्मेवारी थी। सुबह करीब साढ़े 6 बजे साथियों ने उनकी मौत की सूचने दी जिसके बाद परिजनों समेत वह घटनास्थल पर पहुंचे।

राहुल (कांस्टेबल)

गाजियाबाद के मोदीनगर निवासी राहुल रिटायर्ड दरोगा ओम कुमार के पुत्र थे। राहुल के परिवार में पत्नी दिव्या, 1 माह की बेटी सहित दो भाई रवी व गोलू थे। अभी पिछले साल ही राहुल की शादी हुई थी। 16 मई 2016 को राहुल पुलिस में भर्ती हुए थे। उनकी मौजूदा तैनाती थाना बिठूर में थी।

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