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उत्तर प्रदेश

गैंगस्टर विकास दुबे की गोली के शिकार हुए मंत्री संतोष शुक्ला के भाई मनोज शुक्ला ने बताया, क्यों वह हो गया था बरी

Janjwar Desk
7 July 2020 3:08 AM GMT
गैंगस्टर विकास दुबे की गोली के शिकार हुए मंत्री संतोष शुक्ला के भाई मनोज शुक्ला ने बताया, क्यों वह हो गया था बरी
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कानपुर के गैंगस्टर विकास दुबे ने जब मंत्री संतोष शुक्ला की हत्या की थी, उस समय अगर पुलिस गवाह बनने से न मुकरती तो आठ पुलिस वालों की जान न गई होती। संतोष शुक्ला के भाई मनोज शुक्ला ने बातें इस केस में कही हैं...

जनज्वार। कानपुर के बिकरू गांव में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करने वाले गैंगस्टर विकास दुबे के अपराधों के नए-नए किस्से मीडिया में इन दिनों आ रहे हैं। अब उसके खिलाफ लोग खुलकर बोल भी रहे हैं। 2001 में विकास दुबे ने शिवली पुलिस थाने में घुस कर यूपी सरकार के राज्य मंत्री संतोष शुक्ला की हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड से वह बरी हो गया था। अब दिवंगत मंत्री के भाई मनोज शुक्ला ने यह बताया है कि आखिर कैसे विकास शुक्ला इस मामले से बरी हो गया था।

मनोज शुक्ला ने कहा है कि कोर्ट में उसके सरेंडर करने के दौरान राजनेताओं का उसके प्रति जताये जा रहे समर्थन से यह स्पष्ट था कि वह पुलिस की पकड़ में नहीं आ पाएगा।

मनोज शुक्ला ने कहा कि यह हमारे परिवार के लिए इस मामले में पहला झटका था। उन्होंने कहा कि हत्या की घटना के गवाह रहे 25 पुलिसकर्मी एक के बाद एक हमारे विरोध में हो गए। जांच अधिकारी ने भी इस मामले में विपरीत व्यवहार किया। इस कारण दुबे अदालत से बरी हो गया।

मनोज शुक्ला कहते हैं कि उनके भाई के केस में अगर पुलिस वालों ने स्टैंड लिया होता तो बिकरू गांव में आज जो कुछ हुआ उसे रोका जा सकता था। अगर पुलिस उस दौरान गवाह बनने से न मुकरती तो आठ पुलिस वालों की जान न गई होती।

Manoj Shukla.



मनोज शुक्ला ने अपने भाई के केस को लेकर काफी संघर्ष किया लेकिन उन्हें किसी स्तर पर मदद नहीं मिली। वे तब तत्कालीन विशेष अभियोजन अधिकारी, पुलिस अधिकारी व कानपुर देहात के डीएम से मिले थे, लेकिन हर स्तर पर उन्हें निराश होना पड़ा। उन्होंने कहा कि अभियोजन विंग डीएम के अधीन कार्य करता है।

मनोज शुक्ला को विश्वास है कि अब यह मामला अपने अंजाम तक पहुंचेगा। वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर इसके लिए भरोसा जताते हैं। मनोज शुक्ला कहते हैं कि 2001 का साल अलग था और 2020 का अलग है। आज के समय में मैं आश्वस्त हूं कि पुलिस उसे जरूर ढूंढ लेगी।

अब यह लगभग तय हो गया कि मंत्री संतोष शुक्ला की हत्या की फाइल एक बार फिर खुलेगी। एडीजी, कानपुर जय नारायण सिंह ने संतोष शुक्ला हत्या केस से संबंधित सभी दस्तावेज की मांग की है ताकि इस केस को फिर खोला जा सके। इसके साथ ही 2002 में कौशल किशोर त्रिपाठी व श्रीकृष्ण मिश्रा हत्याकांड की फाइल भी मांगी गई है। उन्होंने कानपुर देहात के एसपी अरुराग वत्स को विकास दुबे के पुराने केसों को भी देखने के लिए कहा है।

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