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उत्तर प्रदेश

पूर्व IAS ने योगी के मुख्य सचिव से कम कोरोना टेस्ट को लेकर किया सवाल तो लखनऊ पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

Janjwar Desk
12 Jun 2020 9:23 AM GMT
पूर्व IAS ने योगी के मुख्य सचिव से कम कोरोना टेस्ट को लेकर किया सवाल तो लखनऊ पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा
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यूपी के मुख्य सचिव पर ज्यादा संख्या में कोरोना टेस्ट करने की मांग करने वाले आईएएस अधिकारियों को हड़काने का आरोप लगाने वाले पूर्व आईएएस पर केस

जनज्वार ब्यूरो। उत्तरप्रदेश (UP) के एक पूर्व आईएस अधिकारी द्वारा किए गए एक ट्वीट के बाद बवाल मच गया है। पहले ट्वीट के बाद उस पूर्व आईएएस (IAS) के विरुद्ध एफआईआर दर्ज किया गया तो मुकदमा के बाद उन्होंने धड़ाधड़ कई और ट्वीट कर दिए।

मामला यूपी के पूर्व आईएएस (IAS) सूर्यप्रताप सिंह द्वारा किए गए ट्वीट से शुरू हुआ। उन्होंने एक ट्वीट किया कि 'सीएम योगी (Yogi Adityanath) की टीम-11 की मीटिंग के बाद क्या मुख्य सचिव ने ज्यादा कोरोना टेस्ट कराने वाले कुछ डीएम को हड़काया कि क्यों इतनी तेजी पकड़े हुए हो,क्या इनाम पाना है,जो टेस्ट्स टेस्ट चिल्ला रहे हो, क्या यूपी के मुख्य सचिव स्थिति स्पष्ट करेंगे?यूपी की स्ट्रेटेजी,नो टेस्ट,नो कोरोना।' इस ट्वीट के बाद उनके ऊपर लखनऊ (Lucknow) के हजरतगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है।

उधर एफआईआर दर्ज होने के बाद पूर्व आईएएस सूर्यप्रताप सिंह ने धड़ाधड़ कई और ट्वीट कर दिए हैं। इन ट्वीटों में उन्होंने मुकदमा को लेकर निशाना साधते हुए अभिव्यक्ति की आजादी की बात उठाई है। अपने अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा है 'मीडिया के सूत्रों से अपुष्ट खबर आ रही है कि टीम-11 पर मेरे द्वारा किए गए ट्वीट पर सरकार ने मेरे ऊपर मुकदमा कर दिया है।सबसे पहले तो मैं ये साफ कर देना चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश सरकार की पॉलिसी पर दिए 'No test,No corona' वाले बयान पर अडिग हूं और सरकार से निरंतर सवाल पूछता रहूंगा।'

एक और ट्वीट कर उन्होंने कहा 'दूसरी बात ये कि मुख्य सचिव द्वारा कही बात जो मैंने कोट की उसपर मैंने आईएएस एसोसिएशन और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव का जबाब मांगा था,जब कोई जबाब नहीं आया तो मैंने उसे मौन सहमति मां ली। अगर सरकार जबाब देने की जगह मुकदमा करने की प्रथा को आगे बढ़ाना चाहती है तो मैं तैयार हूं,आइए गिरफ्तार करिए।'

उन्होंने एक और ट्वीट कर लिखा ' मैंने आईएएस अधिकारी रहते हुए पिछली सरकार के खिलाफ आंदोलन चलाया, तब भाजपा के बड़े-बड़े नेता मेरी पीठ थपथपाते थकते नहीं थे।पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने कभी मेरे आंदोलन को निजी तौर पर नहीं लिया,पर आज 'अभिव्यक्ति की आजादी' की बात करने वाली सरकार का रवैया देख आश्चर्यचकित हूं,स्तब्ध हूं। मैं योगी आदित्यनाथ जी और उत्तर प्रदेश पुलिस से कहना चाहता हूं कि मुझपर किए गए मुकदमे की कॉपी मुझतक पहुंचाने का कष्ट करें। मैं इस पूरे प्रकरण पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी मुडफ़ोन पर जबाब दूंगा और सरकार से मेरे कुछ सवाल हैं उन्हें जनता के समक्ष रखूंगा। सत्य पक्ष सत्ता पक्ष पर भारी पड़ेगा।'

एक ताजा ट्वीट में उन्होंने लिखा, 'मुझपर मुकदमा किया कोई बात नहीं, पर मेरे काबिल सहकर्मियों को क़ानून का ज्ञान नहीं है ये देख कर दुःख हुआ। मुझे वीआरएस (VRS) लिए हुए 4 साल हो गए और मुझपर सरकारी कर्मचारियों पर लगाने वाली धाराएँ लगवायी गयीं, इस पर आईएएस एसोसिएशन संज्ञान ले और अधिकारियों की ट्रेनिंग एक बार फिर से करवायी जाए।'

इस मामले के सामने आने के बाद विपक्ष दल भी मैदान में कूद पड़े हैं और सरकार पर निशाना साध रहे हैं। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आईपी सिंह ने ट्वीट किया है' पूर्व वरिष्ठ आईएएस अफसर सूर्यप्रताप सिंह जी पर योगी सरकार ने कोरोना पर पूछे उनके सवाल पर मुकदमा कर दिया है। तानाशाही की सारी हदें पार करने वसलि योगी सरकार और उनके अधिकारियों से कोई डरने वाला नहीं है। सच हम बोलेंगे और आपको वह सच सुनना पडग्स। जय हिंद, जय समाजवाद।'

ज़ाहिर है कि यह मामला आगे तूल पकड़ने वाला है और पक्ष-विपक्ष के बीच बयानों के तीर आगे भी चलने वाले हैं।यह देखना भी दिलचस्प होगा कि मुकदमा के बाद सरकार और पुलिस का अगला कदम क्या होता है।

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