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उत्तर प्रदेश

UP के मिर्जापुर में भयंकर रूप से सूख रहा धान, किसान कर रहे प्रदर्शन

Janjwar Desk
12 Oct 2020 3:45 AM GMT
UP के मिर्जापुर में भयंकर रूप से सूख रहा धान, किसान कर रहे प्रदर्शन
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किसानों ने रास्ते से गुजर रहे एससी-एसटी आयोग के उपाध्यक्ष मनीराम कोल को समस्या से अवगत कराया...

संतोष देव गिरि की रिपोर्ट

जनज्वार, मिर्जापुर। जनपद के हलिया विकास खंड के पुरवा अवसान सिंह गांव के किसानों की सैकड़ों बीघा धान की फसल नहर में पानी न आने से सूखने के कगार पर पहुंच गई है। किसानों ने बताया कि पुरवा अवसान सिंह माइनर की दो वर्षों से साफ सफाई नहीं होने से फसलों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। अभी तक तो बारिश से फसल लहलहा रही थी, लेकिन अब पानी नही मिलने से फसल सूखने के कगार पर पहुंच गई है।

गांव के किसान सूर्य बली सिंह, सिद्धिनाथ, राजा राम बिंद, राम चंद्र बिंद, इंद्रजीत तिवारी, वीर बहादुर सिंह, धर्मेन्द्र सिंह ने रविवार को नहर में खड़े होकर प्रदर्शन करते हुए अविलंब नहर की साफ सफाई करते हुए पानी देने की मांग की है।

किसानों ने रास्ते से गुजर रहे एससी-एसटी आयोग के उपाध्यक्ष मनीराम कोल को समस्या से अवगत कराया तो उन्होंने फोन से सहायक अभियंता से बात कर नहर की साफ सफाई करवाते हुए अविलंब नहर में पानी देने के लिए कहा जिससे सूख रही फसलों को बचाया जा सके।

इस संबंध में एसडीओ किशलय कुमार ने जनज्वार से हुई बातचीत में कहा जल्द ही नहर की सफाई करवाकर किसानों को पानी उपलब्ध करा दिया जाएगा।

गौरतलब हो कि मिर्जापुर जनपद का हलिया विकास खंड पहाड़ी अंचल होने के साथ ही साथ अति पिछड़ा इलाका भी है। जहां सिंचाई संसाधनों के नाम पर नहरों इत्यादि के जरिए किसान अपनी खेती किसानी करते हैं, लेकिन समय से बिजली और नहरों में पानी ना आने से और नहरों के जर्जर तथा साफ सफाई ना होने से इस इलाके के किसानों को राम भरोसे खेती करनी पड़ती है।

नहरों की साफ सफाई ना होने से टेल तक पानी नही पहुंच पाता है। जिससे किसानों को खेतों की सिंचाई के समय निजी संसाधनों का सहारा लेना मजबूरी बन जाता है। ऐसे में ना केवल किसानों को दोहरी मार सहनी पड़ती है, बल्कि कभी-कभी खेत में बोए गए फसलों से भी हाथ धोना पड़ जाता है।

कागजों में खर्च की जाती है नहर सफाई के नाम पर लाखों की रकम

उत्तर प्रदेश के अति पिछड़े जनपद मिर्जापुर में सिंचाई विभाग और नहर विभाग की महिमा अपरंपार है नहरों के रखरखाव से लेकर सफाई के नाम पर प्रतिवर्ष लाखों रुपया कागजों में बहा दिया जाता है, जबकि हकीकत इससे इतर है। हकीकत देखनी हो तो जिले में नहरों के फैले हुए जाल को करीब से जाकर देखा जा सकता है सत्यता खुद-ब-खुद सामने आ जाती है कि नहर विभाग और सिंचाई विभाग किसानों की उन्नति और नहरों के रखरखाव के नाम पर कितना गंभीर है।

आंदोलित किसान कहते हैं, पिछले एक दशक पर नजर डाली जाए तो जिले के नहरों के रखरखाव के नाम पर और किसानों की उन्नति को दृष्टिगत रखते हुए शासन से आने वाले भारी-भरकम धनराशि का खर्च धरातल पर न कर सिर्फ कागजों में ही किया गया है। इससे न किसानों की उन्नति हो सकी है और न ही नहरों के जीर्णोद्धार में सुधार हो सका है, हां संबंधित महकमे और संबंधित ठेकेदारों की जरूर उन्नति हुई है यह किसी से छुपी हुई नहीं है। जिसकी यदि गहराई से जांच कराई जाए तो एक बड़ा घोटाला और भ्रष्टाचार सामने होगा।

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