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उत्तर प्रदेश

पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन पर खबर ट्वीट करने पर यूपी पुलिस ने रामपुर में दर्ज किया मुकदमा

Janjwar Desk
31 Jan 2021 6:19 AM GMT
पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन पर खबर ट्वीट करने पर यूपी पुलिस ने रामपुर में दर्ज किया मुकदमा
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सिद्धार्थ वरदराजन पर FIR 26 जनवरी को आइटीओ पर एक किसान की हुई मौत की खबर ट्वीट करने को लेकर को दर्ज किया गया है। उन्होंने एक खबर ट्वीट किया था जिसमें मृतक नवरीत सिंह के दादा के हवाले से सरकारी दावे से उलट दावे किए गए थे, जिसके बाद इसे उपद्रव फैलाने व लोगों को भड़काने की कोशिश बताकर रामपुर में एफआइआर दर्ज की गयी है...

जनज्वार। वरिष्ठ पत्रकार व द वायर के संपादक सिद्धार्थ वरदराजन पर उत्तरप्रदेश पुलिस ने एफआइआर दर्ज किया है। यह एफआइआर उनके द्वारा एक खबर को ट्वीट करने को लेकर दर्ज किया गया है। यह एफआइआर 26 जनवरी को किसान के ट्रैक्टर मार्च के दौरान आइटीओ पर एक युवा किसान की मौत की खबर को ट्वीट करने को लेकर दर्ज की गयी है, जिसे उस युवक के परिजनों से बातचीत के आधार पर लिखा गया था।

एफआइआर में लिखा गया है कि सिद्धार्थ एस वरदराजन ने 30 जनवरी को सुबह 10.08 बजे सोशल मीडिया ट्विटर पर पोस्ट डाला। इसमें कहा गया है कि कृषि कानून के खिलाफ दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान नवरीत सिंह डिबडिया गांव निवासी की मृत्यु हुई थी, जिसमें पोस्टमार्टम पैनल में शामिल एक डाॅक्टर द्वारा नवरीत के दादा हरदीप सिंह को बयान दिया गया है कि नवरीत की मौत गोली लगने से घायल होने के कारण हुई है, लेकिन चिकित्सक का हाथ अनुचित प्रभाव में बंधा हुआ है, इसलिए वह कुछ नहीं कर सका

एफआइआर में कहा गया है कि रामपुर जिले के बिलासपुर के डिबडिया गांव निवासी विक्रमजीत सिंह उर्फ साहिब सिंह के पुत्र नवरीत सिंह का पोस्टमार्टम तीन सदस्यी डाॅक्टरों की टीम द्वारा किया गया था और इसकी वीडियोग्राफी करवा कर इसकी रिपोर्ट एसपी को दी गयी थी, इस संबंध में चिकित्सा अधिकारियों द्वारा किसी को कोई बयान नहीं दिया गया है। तीन चिकित्सा पदाधिकारियों द्वारा उक्त वायरल बयान का खंडन किया गया है, इसके बावजूद उस सोशल मीडिया पोस्ट को हटाया नहीं गया है।

रामपुर के सिविल लाइंस थाने में दर्ज की गयी प्राथमिकी में इसे जन सामान्य को भड़काने, उप्रदव फैलाने, शासकीय पदाधिकारियो ंको गलत साबित करने व छवि धूमिल करने वाला पोस्ट माना गया है और आइपीसी की धारा 505 व 66ए आइटी एक्ट 2008 के तहत गंभीर अपराध बताया गया है।



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