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Breaking : योगी की कैबिनेट मंत्री की कोरोना से मौत, कल हुआ था कोरोना कन्फर्म

Janjwar Desk
2 Aug 2020 5:28 AM GMT
Breaking : योगी की कैबिनेट मंत्री की कोरोना से मौत, कल हुआ था कोरोना कन्फर्म
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ कमला रानी वरुण का फाइल फोटो।

कमला रानी वरुण ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत निचले स्तर के कार्यकर्ता के तौर पर की थी और अपने निष्ठा से आगे बढते र्गइंं...

कोरोना से संक्रमित पायी गईं उत्तरप्रदेश की मंत्री कमला रानी वरुण का निधन उत्तर प्रदेश सरकार की प्राविधिक शिक्षा मंत्री कमल रानी वरुण का निधन हो गया। कुछ दिन पहले वह कोरोना पॉजिटिव पाई गईं थी, तब से एक निजी असप्ताल में उनका इलाज चल रहा था। 3 मई 1958 को लखनऊ में जन्मी कमलरानी वरुण की शादी कानपुर निवासी एलआईसी में प्रशासनिक अधिकारी किशन लाल से हुई थी। किशनलाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रतिबद्ध स्वयंसेवक थे। बहू बनकर कानपुर आईं कमलरानी ने पहली बार 1977 के चुनाव में बूथ पर मतदाता पर्ची काटने के लिए घूंघट में घर की दहलीज पार की।

समाजशास्त्र से एमए कमलरानी को पति किशनलाल ने प्रोत्साहित किया तो वह आरएसएस द्वारा मलिन बस्तियों में संचालित सेवा भारती के सेवा केंद्र में बच्चों को शिक्षा और गरीब महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई और बुनाई का प्रशिक्षण देने लगीं। जनता से जुड़ी कमलरानी वरुण ने बूथ पर घूंघट में मतदाता पर्ची काटने से राजनीति की सीढ़ी चढऩी शुरू की और सांसद.विधायक बनने के साथ बाद में प्रदेश की मंत्री तक का सफर तय किया है।

साल 1989 में भाजपा ने उन्हें शहर के द्वारिकापुरी वार्ड से कानपुर पार्षद का टिकट दिया। चुनाव जीत कर नगर निगम पहुंची कमलरानी 1995 में दोबारा उसी वार्ड से पार्षद चुनी गईं। भाजपा ने 1996 में उन्हें उस घाटमपुर संसदीय सीट से चुनाव मैदान में उतारा जो एक सुरक्षित सीट मानी जाती थी। इस सीट पर अप्रत्याशित जीत हासिल कर लोकसभा पहुंची कमलरानी ने 1998 में भी उसी सीट से दोबारा जीत दर्ज की।

वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव में उन्हें सिर्फ 585 मतों के अंतराल से बसपा प्रत्याशी प्यारेलाल संखवार के हाथों पराजित होना पड़ा था। सांसद रहते कमलरानी ने लेबर एंड वेलफेयर, उद्योग, महिला सशक्तीकरण, राजभाषा व पर्यटन मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समितियों में रहकर काम किया।

वर्ष 2012 में पार्टी ने उन्हें रसूलाबाद, कानपुर देहात से टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा लेकिन वह जीत नहीं सकी। 2015 में पति की मृत्यु के बाद 2017 में वह घाटमपुर सीट से भाजपा की पहली विधायक चुनकर विधानसभा में पहुंची थीं। पार्टी की निष्ठावान और अच्छे बुरे वक्त में साथ रहीं कमलरानी को योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट में मंत्री पद उनकी सतत निष्ठा का परिणाम माना जाता था।

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