उत्तर प्रदेश

क्या है श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद, जिस पर मथुरा की अदालत ने शाही ईदगाह की सीसीटीवी कैमरे से 24 घंटे निगरानी के दिए हैं निर्देश

Janjwar Desk
19 May 2022 7:01 AM GMT
क्या है श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद, जिस पर मथुरा की अदालत ने शाही ईदगाह की सीसीटीवी कैमरे से 24 घंटे निगरानी के दिए हैं निर्देश
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क्या है श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद, जिस पर मथुरा की अदालत ने शाही ईदगाह की सीसीटीवी कैमरे से 24 घंटे निगरानी के दिए हैं निर्देश

अयोध्या के बाद काशी और मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर और शाही ईदगाह मस्जिद का विवाद भी चर्चा में आ गया है। मथुरा विवाद में भी स्थानीय अदालत में एक वाद दायर किया गया है, जिसमें ईदगाह मस्जिद का सर्वे कराने की मांग की गई है।

Sri Krishna मथुरा। अयोध्या में राम मंदिर के बाद अब बनारस में काशी विश्वनाथ मंदिर और मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि शाही ईदगाह विवाद ( Sri krishna Janambhumi dispute Mathura ) भी चरम पर पहुंच गया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद को लेकर आज मथुरा की अदालत ( Mathura court ) ने बड़ा फैसला सुनाया है। याचिकाकर्ता की इस शिकायत पर कि मथुरा के शाही ईदगाह ( Shahai Idgah ) में हिंदू मंदिरों के के अवशेषणों व प्रतीकों को हटाए जा सकते हैं। इस पर अदालत ने कहा कि शाही ईदगाह की सीसीटीवी कैमरे से 24 घंटे निगरानी के दिए निर्देश हैं। साथ ही शाही ईदगाह जमीन विवाद को लेकर 1 जुलाई की तिथि भी सुनवाई के मुकर्रर की है।

अयोध्या के बाद काशी और मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर ( Sri krishna Janambhumi dispute Mathura ) और शाही ईदगाह ( Shahai Idgah ) मस्जिद का विवाद भी चर्चा में आ गया है। मथुरा विवाद में भी स्थानीय अदालत में एक वाद दायर किया गया है, जिसमें ईदगाह मस्जिद का सर्वे कराने की मांग की गई है। अब इस बात की चर्चा है कि ​आखिर मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद है क्या, इसका इतिहास क्या है, जिस पर हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष में लोग विवादित जमीन पर अपना-अपना दावा पेश कर रहे हैं।

दरअसल, काशी और मथुरा का विवाद ( Sri krishna Janambhumi dispute Mathura ) भी कुछ-कुछ अयोध्या की तरह ही है। हिंदुओं का दावा है कि काशी और मथुरा में औरंगजेब ने मंदिर तुड़वाकर वहां मस्जिद बनवाई थी। औरंगजेब ने 1669 में काशी में विश्वनाथ मंदिर तुड़वाया था और 1670 में मथुरा में भगवा केशवदेव का मंदिर तोड़ने का फरमान जारी किया था। इसके बाद काशी में ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद बना दी गई।

पिछले साल मथुरा में इस विवाद की चर्चा तब शुरू हुई जब अखिल भारत हिंदू महासभा ने ईदगाह मस्जिद के अंदर भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति स्थापित करने और उसका जलाभिषेक करने का ऐलान किया था। हालांकि, हिंदू महासभा ऐसा कर नहीं सकी थी। इसके बाद यूपी चुनाव के दौरान अब मथुरा की बारी है जैसे नारे भी खूब चले।

ये है पूरा विवाद

औरंगजेब ने 1670 में मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान को ध्वस्त करने का फरमान जारी किया। जिस मंदिर को ध्वस्त किया गया उसे 1618 में बुंदेला राजा यानी ओरछा के राजा वीर सिंह बुंदेला ने 33 लाख मुद्राओं में बनवाया था। मुगल दरबार आने वाले इटालियन यात्री निकोलस मनुची ने अपनी किताब 'Storia do Mogor' यानी 'मुगलों का इतिहास' में बताया है कि कैसे रमजान के महीने में श्रीकृष्ण जन्मस्थान को ध्वस्त किया गया और वहां ईदगाह मस्जिद बनाने का फरमान जारी हुआ।

मुगलों का राज होने की वजह से यहां हिंदुओं के आने पर रोक लगा दी गई। नतीजा ये हुआ कि 1770 में गोवर्धन में मुगलों और मराठाओं में जंग हुई। इसमें मराठाओं की जीत हुई। इसके बाद वहीं पर मराठाओं ने फिर से मंदिर का निर्माण किया। मराठाओं ने ईदगाह मस्जिद के पास ही 13.37 एकड़ जमीन पर भगवान केशवदेव यानी श्रीकृष्ण का मंदिर बनवाया लेकिन धीरे-धीरे ये मंदिर भी जर्जर होता चला गया। कुछ सालों बाद आए भूकंप में मंदिर ध्वस्त हो गया और जमीन टीले में बदल गई।

1803 में अंग्रेज मथुरा आए और 1815 में उन्होंने कटरा केशवदेव की जमीन को नीलाम कर दिया। बनारस के राजा पटनीमल ने इस जमीन को खरीदा। उन्होंने ये जमीन 1,410 रुपये में खरीदी थी। राजा पटनीमल इस जगह पर फिर से भगवान केशवदेव का मंदिर बनवाना चाहते थे, लेकिन वो ऐसा नहीं कर सके। 1920 और 1930 के दशक में जमीन खरीद को लेकर विवाद शुरू हो गया। मुस्लिम पक्ष ने दावा किया कि अंग्रेजों ने जो जमीन बेची, उसमें कुछ हिस्सा ईदगाह मस्जिद का भी था।

फरवरी, 1944 में उद्योगपति जुगल किशोर बिरला ने राजा पटनीमल के वारिसों से ये जमीन साढ़े 13 हजार रुपये में खरीद ली। 1951 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट बना और ये 13.37 एकड़ जमीन कृष्ण मंदिर के लिए इस ट्रस्ट को सौंप दी गई। अक्टूबर 1953 में मंदिर निर्माण का काम शुरू हुआ और 1958 में पूरा हुआ। इस मंदिर के लिए उद्योगपतियों ने चंदा दिया। ये मंदिर शाही ईदगाह मस्जिद से सटकर बनाया गया।

1958 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान ट्रस्ट का गठन हुआ। कानूनी तौर पर इस संस्था का 13.37 एकड़ जमीन पर कोई हक नहीं था लेकिन 12 अक्टूबर 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान ने शाही मस्जिद ईदगाह ट्रस्ट के साथ एक समझौता किया। तय हुआ कि 13.37 एकड़ जमीन पर मंदिर और मस्जिद दोनों बने रहेंगे।

इस समझौते को श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट नहीं मानता है। वो इस समझौते को धोखा बताता है. ये पूरा विवाद 13.37 एकड़ जमीन को लेकर है, जिसमें 10.9 एकड़ जमीन श्रीकृष्ण जन्मस्थान और 2.5 एकड़ जमीन शाही ईदगाह मस्जिद के पास है। फिलहाल ये मामला अदालत में विचाराधीन है। हिंदू पक्ष ने पूरी 13.37 एकड़ जमीन पर मालिकाना हक देने की मांग की है।

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