आंदोलन

Mazdoor Adhikar Sangharsh Abhiyan:मासा के आह्वान पर देश भर के मज़दूरों का दिल्ली में प्रदर्शन कल, श्रम कानूनों के विरोध में होगा जमावाड़ा, उत्तराखंड के कई संगठन भी होंगे शामिल

Janjwar Desk
12 Nov 2022 3:19 PM GMT
Mazdoor Adhikar Sangharsh Abhiyan:मासा के आह्वान पर देश भर के मज़दूरों का दिल्ली में प्रदर्शन कल, श्रम कानूनों के विरोध में होगा जमावाड़ा, उत्तराखंड के कई संगठन भी होंगे शामिल
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MASA-Mazdoor Adhikar Sangharsh Abhiyan: मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) के आह्वान पर कल 13 नवम्बर रविवार को देश भर के मजदूरों का देश की राजधानी दिल्ली में विशाल प्रदर्शन होने जा रहा है।

MASA-Mazdoor Adhikar Sangharsh Abhiyan: मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) के आह्वान पर कल 13 नवम्बर रविवार को देश भर के मजदूरों का देश की राजधानी दिल्ली में विशाल प्रदर्शन होने जा रहा है। मजदूर विरोधी चार लेबर कोड्स को रद्द किये जाने की मांग के साथ न सिर्फ उत्तर भारतीय राज्यों से अपितु दक्षिण भारतीय राज्यों से भी मजदूर विभिन्न फैक्टरी यूनियनों और मजदूर संगठनों के नेतृत्व में रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में इकट्ठा होंगे। यहां से मजदूरों की रैली राष्ट्रपति भवन की ओर कूच करेगी।

इंकलाबी मजदूर केंद्र के रोहित रुहेला ने बताया कि मोदी शासन काल में लाए गए नये लेबर कोड्स के रूप में आज़ाद भारत के इतिहास में मजदूरों पर सबसे बड़ा हमला बोला गया है। घोर पूंजीपरस्त इन लेबर कोड्स में फैक्टरी की परिभाषा बदलकर और छोटी-छोटी फैक्टरियों को श्रम कानूनों के पालन से मुक्त कर संगठित क्षेत्र की एक बड़ी आबादी को असंगठित क्षेत्र में धकेल दिया गया है। इसके अलावा इन कानूनों में प्रशिक्षुओं को तो मजदूर की परिभाषा से ही बाहर कर दिया गया है। साथ ही पूंजीपतियों की मुंह मांगी मुराद "रखो और निकालो" ( हायर एंड फायर) को पूरा करते हुये स्थायी प्रकृति के कामों पर भी फिक्स्ड टर्म इंप्लॉयमेंट (एफटीई) के तहत अस्थायी नियुक्तियों का कानून पास कर दिया गया है। ठेकेदारी प्रथा को बेलगाम बनाया गया है और पूंजीपतियों को नीम ट्रेनी के तहत बेहद सस्ते मजदूर और प्रधानमंत्री कौशल विकास परियोजना के तहत मुफ्त के मजदूर उपलब्ध कराने का इंतजाम कर दिया गया है।

रोहित ने इन नये कानूनों को मजदूरों के लिए विनाशकारी बताते हुए कहा कि इसमें फैक्टरियों में सुरक्षा संबंधी मापदंडों को पहले से भी अधिक ढीला कर दिया गया है जिसके परिणामस्वरूप अब औद्योगिक दुर्घटनाएं और अधिक बढ़ेंगी। इसके अलावा 300 से कम मजदूरों वाली फैक्टरियों में एक तरफा छंटनी, तालाबंदी की छूट पूंजीपतियों को दे दी गई है साथ ही स्टैंडिंग ऑर्डर लागू करने की बाध्यता से भी उन्हें मुक्त कर दिया गया है। मजदूरों के हड़ताल के कानूनी अधिकार पर भांति-भांति के पहरे बैठाकर वैध कानूनी हड़ताल को असंभव प्राय: बना दिया गया है। साथ ही गैरकानूनी घोषित हड़तालों में शामिल मजदूरों एवं उनका सहयोग समर्थन करने वाले लोगों पर जुर्माने, मुकदमें और जेल की सज़ा तक के प्रावधान कर दिये गये हैं जो कि सीधे-सीधे मजदूर आंदोलन के अपराधीकरण और उसे उसके सामाजिक आधार से काटने की साजिश है। इन लेबर कोड्स में ट्रेड यूनियन के गठन एवं संचालन को भी बेहद मुश्किल बना दिया गया है। इसके अलावा महिला मजदूरों से रात की पाली और खतरनाक उद्योगों में भी काम कराने का अधिकार पूंजीपतियों को सौंप दिया गया है। पूंजीपतियों के हित में एकदम नंगे होकर काम कर रही मोदी सरकार द्वारा इन लेबर कोड्स के तहत उदारीकरण-निजीकरण-वैश्वीकरण की नीतियों के तहत जारी 'श्रम सुधार' को एक मुकाम पर पहुंचा दिया गया है। इन लेबर कोड्स के कारण देश भर के मजदूरों में भारी आक्रोश है। इसी के चलते कल रविवार को देश भर के सभी राज्यों से आने वाले मजदूर राजधानी दिल्ली में जुटकर एक बड़ा प्रदर्शन करेंगे।

मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) की केन्द्रीय मांगें

मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताए तत्काल रद् हों। श्रम कानूनों में मजदूर-पक्षीय सुधार किए जाएं। बैंक, बीमा, कोयला, गैस-तेल, परिवहन, रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि समस्त सार्वजनिक क्षेत्र-उ़द्योगों-संपत्तियों का किसी भी तरह का निजिकरण बंद किया जाए। बिना शर्त सभी श्रमिको को यूनियन गठन व हड़ताल-प्रदर्शन का मौलिक व जनवादी अधिकार दिया जाए। छंटनी-बंदी-ले ऑफ तत्काल गैरकानूनी घोषित किया जाए। ठेका प्रथा, फिक्स्ड टर्म-नीम ट्रेनी आदि संविदा आधारित रोजगार बंद किए जाएं। सभी मजदूरों के लिए 60 साल तक स्थायी नौकरी, पेंशन-मातृत्व अवकाश सहित सभी सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल पर सुरक्षा की गारंटी हो। गिग-प्लेटर्फाम वर्कर, आशा-आंगनवाड़ी-मिड डे मील आदि स्कीम वर्कर, आई टी, घरेलू कामगार आदि को 'कर्मकार' का दर्जा व मजदूर को मिलने वाले समस्त अधिकार दिए जाएं। देश के सभी मजदूरों के लिए दैनिक न्यूनतम मजदूरी 1000 रुपए (मासिक 26000 रुपए) और बेरोजगारी भत्ता महीने में 15000 रुपए लागू किया जाए। समस्त ग्रामीण मजदूरों को पूरे साल कार्य की उपलब्धता की गारंटी दी जाए। प्रवासी मजदूर सहित सभी मजदूरों के लिए कार्य स्थल से नजदीक पक्का आवास-पानी-शिक्षा-स्वास्थ्य-क्रेच की सुविधा और सार्वजिनक राशन की सुविधा सुनिश्चित की जाए।

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