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चारधाम सड़क परियोजना में साल 2018 का सर्कुलर रहेगा लागू, सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

Janjwar Desk
9 Sep 2020 8:09 AM GMT
चारधाम सड़क परियोजना में साल 2018 का सर्कुलर रहेगा लागू, सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
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File photo

शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकार सर्कुलर से अलग नहीं हटे और 2018 के सर्कुलर के मुताबिक चलें, इस नोटिफिकेशन के मुताबिक पहाड़ी क्षेत्रों में 5.5 मीटर की चौड़ाई वाली सड़कें और दोनों तरफ डेढ़-डेढ़ मीटर चौड़े फुटपाथ बनाने का दिशानिर्देश है...

जनज्वार। उच्चतम न्यायालय ने चारधाम सड़क परियोजना मामले में 2018 में जारी सर्कुलर के दिशानिर्देशों को लागू करने का निर्देश दिया है। कोर्ट में सरकार ने कहा कि इसमें चीन से जुड़ा सीमा क्षेत्र भी है, ऐसे में सेना के वाहन भी जाएंगे। जिस कारण सड़क की चौड़ाई 5 मीटर की जगह 7 मीटर रखने की मंजूरी दी जाये, लेकिन अदालत ने कहा कि सरकार सर्कुलर से अलग नहीं हटे और 2018 के सर्कुलर के मुताबिक चलें।

जानकारी के अनुसार, इस नोटिफिकेशन के मुताबिक पहाड़ी क्षेत्रों में 5.5 मीटर की चौड़ाई वाली सड़कें और दोनों तरफ डेढ़-डेढ़ मीटर चौड़े फुटपाथ बनाने का दिशानिर्देश है। 11,700 करोड़ रुपये की इस परियोजना के जरिये चारों धामों को सड़क से जोड़ा जाना है।

इस परियोजना के तहत लगभग 250 किलोमीटर सड़क का काम पूरा हो चुका है, जबकि लगभग 400 किलोमीटर सड़क के लिए काम चल रहा है और लगभग 320 किलोमीटर सड़क का काम पर्यावरणीय मंजूरी को लेकर शुरू नहीं हो सका है।

इस केस की एक याचिकाकर्ता सुशीला भंडारी ने जनज्वार को बताया कि उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2018 के नोटिफिकेशन के आधार पर ही सड़क निर्माण का आदेश दिया है।

उन्होंने कहा 'पहाड़ों को काटना पर्यावरण की दृष्टि से उचित नहीं है। पहाड़ों और पेड़ों की लगातार कटाई के कारण पर्यावरणीय असंतुलन बढ़ रहा है, जिससे पहाड़ों में हादसे बढ़ गए हैं। पेड़-पौधे, पशु-पक्षी नष्ट हो रहे हैं, स्थानीय पहाड़ी लोगों के रोजगार भी छिन रहे हैं।'

मंगलवार, 8 अगस्त को शीर्ष अदालत में इसकी सुनवाई हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार की ओर से पेश हुये सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इसमें चीन से जुड़ा सीमा क्षेत्र भी है, ऐसे में सेना के वाहन भी जाएंगे तो सड़क की चैड़ाई 5 मीटर की जगह 7 मीटर रखने की मंजूरी दी जाये। इस पर न्यायालय ने कहा कि 2018 के सर्कुलर के मुताबिक चलें।

उल्लेखनीय है कि 2018 के सर्कुलर में रोड की चैड़ाई 5.5 मीटर अधिकतम रखी गई थी। शीर्ष अदालत द्वारा केंद्र को चार धाम निर्माण के कारण वन क्षेत्र के नुकसान की भरपाई के लिए पौधारोपण करने का भी निर्देश दिया गया है। हालांकि सरकार की तरफ से कहा गया कि पौधारोपण का काम लगातार चल रहा है।

याचिकाकर्ता सुशीला भंडारी ने कहा 'पहाड़ों में मशीनों के अधिक प्रयोग से भी संकट बढ़ रहा है। चार धाम यात्रा के लिए साढ़े पांच मीटर चौड़ी सड़क भी ठीक है। मैं सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से बहुत खुश हूं।'

उल्लेखनीय है कि इस चार धाम परियोजना का उद्देश्य हर मौसम में पहाड़ी राज्य के चार पवित्र स्थलों यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को जोड़ना है। परियोजना के तहत 900 किलोमीटर लम्बी सड़क का निर्माण हो रहा है। अभी तक 400 किलोमीटर सड़क का चैड़ीकरण किया जा चुका है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2016 में इस परियोजना की शुरुआत की थी। कुल 11,700 करोड़ रुपये की इस परियोजना के जरिये चारों धामों को सड़क से जोड़ा जाना है। इससे पहले सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने अति व्यस्त चंबा टाउन के नीचे हाईवे पर 440 मीटर लंबी सुरंग खोदने में सफलता हासिल की थी।

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