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यूजर की निजता का उल्लंघन करने वाले सरकार के नये नियम को व्हाट्सएप ने दिल्ली हाई कोर्ट में दी चुनौती

Janjwar Desk
26 May 2021 6:41 AM GMT
यूजर की निजता का उल्लंघन करने वाले सरकार के नये नियम को व्हाट्सएप ने दिल्ली हाई कोर्ट में दी चुनौती
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यूजर की निजता का उल्लंघन करने वाले सरकार के नये नियम को व्हाट्सएप ने दिल्ली हाई कोर्ट में दी चुनौती 

सरकार ने कहा यूजर की जासूसी करो, व्हाट्सएप ने कहा नही करेंगे असंवैधानिक कार्य

जनज्वार ब्यूरो, दिल्ली। व्हाट्सएप ने दिल्ली हाई कोर्ट में सरकार के आईटी से संबंधित नये नियम को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। आपको बता दें कि आज से केंद्र सरकार के हालिया सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम 2021 लागू हो रहे हैं। इसके अनुसार सोशल मीडिया मैसेंजर कंपनियों को एप पर भेजे गये मैसेज के ओरिजिन यानि मूल स्रोत, जहाँ से सबसे पहले मैसेज भेजा गया का पता रखना होगा। इसके लिये इन कंपनियों को यूजर पर नज़र रखनी होगी। व्हाट्सएप ने इस नियम को मानने से इनकार कर दिया है।

व्हाट्सएप ने इसे यूजर के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है। कल 25 मई को इस मामले में व्हाट्सएप ने भारत सरकार के नये नियमों के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। व्हाट्सएप ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा है कि भारत सरकार के द्वारा आज से लागू होने वाली नई पॉलिसी से लोगों की प्राइवेसी खत्म हो रही है।

व्हाट्सएप ने दिल्ली हाई कोर्ट में कहा है कि सोशल मीडिया को लेकर भारत सरकार की नई गाइडलाइन भारत के संविधान के मुताबिक यूजर्स की प्राइवेसी के अधिकारों का उल्लंघन है। नई गाइडलाइन के मुताबिक सोशल मीडिया कंपनी को उस यूजर्स की पहचान बतानी होगी जिसने सबसे पहले किसी मैसेज को पोस्ट या शेयर किया है। इसके लिये उसे यूजर पर नजर रखनी होगी।

अपनी याचिका में व्हाट्सएप ने 2017 के न्यायमूर्ति के. एस. पुत्तास्वामी बनाम भारत संघ केस का हवाला दिया है। जिसके अनुसार पता लगाने/ नज़र रखने का प्रावधान असंवैधानिक है और लोगों के निजता के मौलिक अधिकार के खिलाफ है। इस मामले में विशेषज्ञों ने व्हाट्सएप के तर्कों का समर्थन किया है।

यह नियम निजता सम्बन्धी कानूनों का होगा उल्लंघन-

व्हाट्सएप ने कहा है कि इस नये नियम से निजता सम्बन्धी कानून का उल्लंघन होगा। यह नियम सोशल मीडिया कंपनियों को सूचना के पहले प्रवर्तक की पहचान करने को कहता है और अधिकारी द्वारा उसकी मांग की जाती है। जबकि कानून के अनुसार व्हाट्सएप को केवल उन लोगों को बेनकाब करने की आवश्यकता है जिन पर गलत काम करने का आरोप लगाया गया है। कंपनी अपनी प्राइवेसी से संबंधित एंड टू एंड एंड एन्क्रिप्शन के चलते ऐसा नहीं कर सकती है।

आपको बता दें कि सरकार के नये नियमों के पालन के लिये सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म जैसे- फ़ेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप को 25 मई तक का समय दिया था। यह समयसीमा कल समाप्त हो गयी थी।

फ़ेसबुक ने कल ही नये नियमों के पालन करने पर सहमति जता दी थी। कल फेसबुक के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी परिचालन संबंधी क्रियाओं को लागू करने के लिए काम कर रही है। इसका उद्देश्य आईटी नियमों के प्रावधानों का पालन करना है। कंपनी कुछ मुद्दों पर स्पष्टता को लेकर सरकार के लगातार संपर्क में है।

इस मामले पर ट्विटर की ओर से अब तक कोई बयान नही आया है। सरकार व मंत्रालय की तरफ से भी अभी तक कोई कदम नही उठाया गया है। ट्विटर, व्हाट्सएप अभी चल रहे हैं। हम समय के साथ इस मामले में स्पष्टता आने की उम्मीद करते हैं।


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