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12 वर्षीय बच्ची के मां बनने के पीछे छुपी है भयावह दरिंदगी की कहानी

Prema Negi
19 Dec 2019 11:30 AM GMT
12 वर्षीय बच्ची के मां बनने के पीछे छुपी है भयावह दरिंदगी की कहानी
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वहशी हरक सिंह दुकान के अंदर ले जाकर रूपा पर भूखे भेड़िये की तरह टूट पड़ा, स्कूल बैग जमीन पर पटक दिया, शरीर से कपड़े फाड़ दिये, रूपा की सहायता के लिए पुकारती चीख, दर्द, कराह सब उसी दुकान के अंदर दफन हो गया...

हल्द्वानी से संजय ​रावत

जनज्वार। हैदराबाद में महिला डॉक्टर और उन्नाव में गैंगरेप पीड़िता को रेप के बाद मौत के घाट उतार दिया गया। ये तो वो घटनायें हैं जिन्होंने मीडिया में जगह पायी, देशभर में न जाने हर रोज कितनी बच्चियां महिलायें बलात्कार की शिकार होती हैं, यह सामने आने लगे तो अखबार के पन्नों में सिवाय रेप के कोई खबर ही न हो।

ऐसी ही बलात्कार की शिकार बनी थी उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर स्थित दिनेशपुर की 12 साल की बच्ची रूपा, जिसका बलात्कार 60 साल के एक वहशी दरिंदे ने किया। न सिर्फ बलात्कार किया, बल्कि मुंह खोलने को भी मना कर दिया, ताकि कोई उसकी करतूतों को जान न पाये। मगर अब उस वहशी बूढ़े की करतूतें एक बच्चे के जन्म लेने के बाद जगजाहिर हो चुकी हैं। मात्र 12 साल की उम्र में एक बच्ची मां बन चुकी है।

हल्द्वानी के सुशीला तिवारी चिकित्सालय में छठी कक्षा की 12 वर्षीय छात्रा मां बनी। उसके मां बनने की घटना के पीछे भयावह दरिंदगी की दास्तान है, जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

धमसिंह नगर जिले के दिनेशपुर नामक गाँव में पांचवी कक्षा की छात्रा रूपा (बदला हुआ नाम) के साथ पड़ोस में रहने वाले 60 वर्षीय बुजुर्ग ने अपनी दुकान में बुलाकर बलात्कार किया, जिसके परिणामस्वरूप आज 19 दिसंबर को मात्र 12 साल की छोटी सी उम्र में रूपा मां बन गई।

रूपा के साथ हुई दरिंदगी और इतनी छोटी सी उम्र में मां बनने की भयावह यात्रा की शुरुआत अपने हमउम्र बच्चों के साथ खेलते समय उस मैदान से हुई, जहां एक 60 वर्षीय वृद्ध उस पर लगातार नजरें जमाए रखता था। अन्य बच्चों से कद काठी में बेहतर 11 वर्षीय रूपा सुंदर थी। रस्सी कूदना उसे ज्यादा भाता था। जब वह रस्सी कूद रही होती थी, उस वक्त 60 वर्षीय वहशी बूढ़े की नजरें रूपा के शरीर का गौर से मुआयना कर रही होती थी।

जिस मैदान में इन बच्चों का जमघट लगा रहता था, वहीं सामने 60 वर्षीय हरक सिंह की एकमात्र दुकान थी। वहीं से हरक सिंह रूपा की उछलकूद पर गिद्धदृष्टि गढ़ाए रहता था और फिर बच्चों के बीच जाकर उन्हें टॉफी बांटता।

क दिन उसने रूपा के शरीर में हाथ फेरते हुए कहा कि कल रूपा सबके लिए मेरी दुकान से टॉफी लेकर आएगी, आएगी ना रूपा? हरक सिंह ने रूपा का हाथ पकड़ते हुए यह सवाल किया। मासूम रूपा बिना उसकी मंशा भांपे हाँ कर बैठी।

गले दिन गर्मियों की दोपहर में हरक सिंह रूपा के स्कूल से आने का इंतजार में भूखे जानवर सा दुकान के अंदर घूम रहा था कि अचानक उसे स्कूल से रूपा आती दिखी तो रूपा के लाख मना करने के बावजूद हरक सिंह बहला—फुसलाकर रूपा को अपनी दुकान के अंदर ले गया।

रक सिंह दुकान के अंदर ले जाकर रूपा पर भूखे भेड़िये की तरह टूट पड़ा। रूपा का स्कूल बैग जमीन पर पटक दिया गया, शरीर से कपड़े फाड़ दिये। रूपा की सहायता के लिए पुकारती चीख, दर्द कराह सब उसी दुकान के अंदर दफन हो गया। रूपा बेहोश हो गयी, मगर वहशी हरक सिंह उसके जिस्म को नोचता रहा। जब रूपा को होश आया तो सामने कुर्सी पर तमंचा लिए बैठा हरक सिंह, जिसे वो हमेशा दादू कह कर पुकारती थी उसे और उसके परिवार को खत्म करने और घर जला देने की धमकी दे रहा था।

रूपा ने किसी तरह खुद को सम्हाला तो हरक ने लात मारकर उसे दुकान से बाहर धकेल दिया। उस दिन खुद के साथ हुई दरिंदगी की घटना का जिक्र रूपा ने हरक की धमकियों के डर से किसी से भी नहीं किया। उसके माता पिता सुबह मजदूरी पर जाते और देर शाम लौट कर आते। करीब 4 महीने बाद एक दिन रूपा के पेट में तेज दर्द और उल्टियां हुईं तो सुबह उसे अस्पताल लाया गया।

हिला डॉक्टर ने संदेह होने पर उसके माता—पिता को अल्ट्रासाउंड की सलाह दी, रिपोर्ट सामने आई सबके होश उड़ गये। रूपा 4 माह के गर्भ से थी। घर पहुंच कर उसने सारी बात रो—रोकर बताई तो माता पिता सदमे में आ गए।

मारे समाज में ऐसी बातें भला छुपती कहां हैं, सो दास्तान ने लंबे पंखों के साथ उड़ान भरी और यह बात जगजाहिर हो गयी। पुरातनपंथियों ने रूपा और उसके घर परिवार को भला बुरा कहा तो अधिकांश संवेदनशील लोग रूपा के साथ खड़े हो गए।

'महिला कल्याण संस्था' की अध्यक्ष हीरा जंगपांगी के साथ स्थानीय जनता ने रूपा और उसके परिवार को ढांढस बंधाया और बलात्कारी हरक सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए प्रेरित किया, ताकि किसी और बच्ची के साथ ऐसी घटना ना घटे। थाने का घेराव कर मुकदमा दर्ज हुआ और बलात्कारी हयात सिंह जेल पहुंचा दिया गया।

साढ़े आठ महीने बाद आज 19 दिसंबर को रूपा ने 12 वर्ष की छोटी सी उम्र में एक पुत्र को जन्म दिया है। आज भी उसके साथ महिला कल्याण समिति के लोग स्थानीय पत्रकार रूपेश कुमार सिंह और 'जिंदगी जिंदाबाद' संस्था के दर्जनों लोग मौजूद थे। हर कोई नवजात शिशु और रूपा के उज्ज्वल भविष्य को लेकर अपनी अपनी तरफ से भविष्य की योजनाओं पर चर्चा कर रहे था।

रूपा के बेटे के जन्म लेने की खबर पर पत्रकार रूपेश कुमार सिंह कहते हैं, 'आज सुबह 11:25 पर हल्द्वानी सुशीला तिवारी अस्पताल में रूपा ने बेटे को जन्म दिया। बहुत मुश्किल था, रूपा के लिए भी और डाॅक्टरों की टीम के लिए भी। अब रूपा और बच्चे को कानूनी न्याय मिलना बाकी है। समाज में रूपा की वापसी, सम्मान और सुरक्षा का सवाल भी अहम है।'

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