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झारखंड में कोरोना से अब तक नहीं हुई एक भी मौत, लेकिन लॉकडाउन में भूख से 2 लोगों की मौत

Prema Negi
6 April 2020 11:34 AM GMT
झारखंड में कोरोना से अब तक नहीं हुई एक भी मौत, लेकिन लॉकडाउन में भूख से 2 लोगों की मौत
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भूख से मरने वाली एक महिला के पति ने कहा, 4 दिन पहले पड़ोसियों ने खिलाया था हम लोगों को खाना, उसके बाद से थे हम दोनों भूखे और इसी वजह से मेरी पत्नी की चली गयी जान....

रांची से राहुल सिंह की रिपोर्ट

जनज्वार। झारखंड में एक महीने के अंदर तीसरी ऐसी मौत हुई है, जिसे भूख से मौत का मामला बताया जा रहा है। इनमें दो मामले कोरोना महामारी को लेकर जारी लाॅकडाउन के दौरान की हैं और मात्र 48 घंटे की अवधि में घटित हुई हैं। इनमें पहली मौत गुरुवार 2 अप्रैल को रामगढ जिले में और दूसरी मौत शनिवार 4 अप्रैल को गढवा जिले में हुई।

झारखंड में इस बात का संतोष है कि कोरोना वायरस से अबतक किसी की जान नहीं गयी है, लेकिन कोरोना को लेकर जारी लाॅकडाउन का असर दूसरे रूप में दिख रहा है। लाॅकडाउन अवधि में इन 2 मौतों का कनेक्शन जहां भोजन से जोड़ा गया है, वहीं पलामू में एक ऐसे व्यक्ति की पीटकर हत्या कर दी गयी थी जिसने बाहर से आये दो युवकों को अपनी दुकान पर आने से मना किया था, क्योंकि प्रशासन व मेडिकल टीम ने उन्हें होम क्वारंटाइन में रहने को कहा था।

झारखंड के गढवा जिले के भंडरिया प्रखंड के करून गांव में एक वृद्ध महिला समरिया देवी की शनिवार 4 अप्रैल को मौत हुई है। इस मौत के बारे में एक स्थशनीय अखबार ने खबर दी है कि उस महिला के घर में तीन दिन से खाना नहीं बना था, उनके घर में अनाज भी नहीं था। पंचायत निकाय के जनप्रतिनिधियों ने कहा कि महिला के घर अनाज नहीं था और इस वजह से 3 दिन से खाना नहीं बना था।

बुजुर्ग महिला की मौत की खबर सुनने के बाद रामगढ़ की विधायक ममता देवी आईं गोला गांव (फोटो : टेलीग्राफ)

हिला के पति लक्षु लोहरा कहते हैं कि उनकी पत्नी की मौत भूख से हुई है। लक्षु लोहरा ने कहा कि 4 दिन पहले पड़ोसियों ने उन लोगों को खाना खिलाया था, उसके बाद से वे भूखे थे ओर इस वजह से उनकी पत्नी ने दम तोड़ दिया। हालांकि प्रशासन ने इस मामले को भूख से मौत का मामला मानने से इनकार किया है। गढवा के उपायुक्त हर्ष मंगला ने कहा है मामले की जांच एसडीओ से करायी गयी, यह भूख से मौत का मामला नहीं है।

स मामले में रंका के एसडीओ संजय पांडेय ने जनज्वार से हुई बातचीत में कहा महिला अपने भतीजे के पास रहती थी और काफी वृद्ध हो चुकी थी, इस वजह से उनकी मौत हुई है। उन्होंने कहा कि हमने मामले की जांच की है और मेडिकल टीम इसकी जांच कर रही है, लेकिन यह भूख से मौत का मामला नहीं है, उस महिला ने खाना खाया था और वे 80 साल की हो गयी थीं।

हालांकि इस मामले की संवेदनशीलता का पता इसी बात से चलता है कि शनिवार 4 अप्रैल को घटी इस घटना के बाद रविवार 5 अप्रैल को खुद बीडीओ सुलेमान मुंडारी गांव गए और मृतक वृद्धा के पति लक्षु लोहरा से मिले। लक्षु लोहरा ने उन्हें बताया कि 3 दिन से उनके यहां खाना नहीं बना था। लक्षु लोहरा भीख मांगकर अपना व पत्नी का गुजारा करते थे, लेकिन कोरोना लाॅकडाउन की वजह से वे पिछले कई दिनों से भीख मांगने नहीं जा पाते हैं। वे अपने भतीजे के घर में रहते हैं।

3 दिन पहले भतीजा ससुराल चला गया, जिससे उनकी दिक्कतें बढ गयी। वहीं बीडीओ ने कहा कि महिला लकवा पीड़ित थी और बीमारी की वजह से उनकी मौत हुई। उन्होंने कहा कि मृतका के पति को 6 हजार रुपये दिए गए हैं।

झारखंड में कोरोना लाॅकडाउन के दौरान भूख से मौत के दावे की यह इकलौती घटना नहीं है। इससे पहले रामगढ जिले के गोला प्रखंड के संग्रामपुर गांव में 70 वर्षीया उपासी देवी की मौत हो गयी थी। यह 2 अप्रैल का मामला है। उस महिला को कई महीने से वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिल पा रही थी और सरकारी खाद्य वितरण प्रणाली से अनाज भी नहीं मिल पा रहा था।

पासी देवी के बेटे जगन नायक व उनकी पत्नी संजू देवी ने कहा था वह दिहाड़ी मजदूर का कमा करते हैं, लेकिन लाॅकडाउन के कारण उनका रोजगार प्रभावित हुआ है और वे आसपास के लोगों पर निर्भर हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनका सरकारी अनाज बंद है और इसके लिए कई बार वे गोला ब्लाॅक आफिस गए और अफसरों व कर्मचारियों से गुहार लगायी, पर अनाज मिलना शुरू नहीं हो सका है।

नका आरोप था कि 2017 के बाद से ही उनका अनाज बंद है। जगन नायक के अनुसार, उनकी मां को वृद्धावस्था व विधवा पेंशन का भी लाभ नहीं मिल पा रहा था। इस मामले में भी बीडीओ ने गांव जाकर परिवार से मुलाकात की थी। इसके बाद इस मामले में रामगढ के उपायुक्त संदीप सिंह ने कहा था कि मृतक महिला उम्रजनित कई तरह की बीमारियों का शिकार थी और जब हमारी टीम उनके घर गयी तो वहां अनाज पाया था।

स मामले में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने आरोप लगाया था कि रामगढ में भूख से मौत मामले के लिए प्रदेश की हेमंत सरकार व रामगढ जिला प्रशासन जिम्मेवार है। केंद्र के निर्देश के बावजूद भी पीडीएस के माध्यम से अनाज के वितरण की व्यवस्था सुचारू नहीं हो सकी है।

रामगढ से सत्ताधारी दल कांग्रेस की विधायक ममता देवी ने भी गांव का दौरा किया था और कहा कि इसे भूख से मौत का मामला बताना जल्दबाजी होगी, हालांकि प्रशासन को ऐसे मामले में अधिक संवेदनशीलता बरतनी चाहिए।

झारखंड में खाद्यान्न संकट से जुड़ी घटनाएं आम हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कोरोना लाॅकडाउन को देखते हुए पीडीएस दुकानों के माध्यम से जरूरतमंदों को एडवांस में अप्रैल-मई का अनाज देने को कहा है। लेकिन यह भी एक सच है कि इस लाॅकडाउन के दौरान ही राज्य के अलग-अलग हिस्सों से पीडीएस अनाज वितरण की गड़बड़ियां खुलकर सामने आ रही हैं।

लाॅकडाउन के कारण कामबंदी की वजह से जरूतमंद लोग इस दौरान मुखर रूप से सामने आ रहे हैं, जो सामान्य दिनों में मजदूरी से रोज होने वाली कमाई के कारण अपनी जरूरतों को पूरा कर लेते हैं और इस इस तरह से विरोध नहीं करते। अलग-अलग जिलों में लाॅकडाउन के दौरान आयी ऐसी शिकायतों पर संबंधित जिला प्रशासन ने कार्रवाई भी की है।

हीं, लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए शहरों में सीएम किचन व ग्रामीण इलाकों में दीदी किचन आरंभ किया गया है। मुख्यमंत्री ने सरकारी अधिकारियों व कर्मियों एवं निकाय प्रतिनिधियों से यह अपील की है कि जरूरतमंदों को पक्के तौर पर भोजन मिल सके, यह सुनिश्चित करें। साथ ही उन्होंने इस संबंध में कमियों की सूचना भी देने की अपील लोगों से की है।

ध्यान रहे कि पिछले महीने छह मार्च को बोकारो जिले के कसमार प्रखंड के करमा शंकरडीह गांव में भूखल घासी की मौत हो गयी थी। उस मामले में भी यह बात सामने आयी थी कि उनके घर में 4 दिन से खाना नहीं बना था और घर में अनाज भी नहीं था। उस परिवार के पास राशन कार्ड भी नहीं था।

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