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चुनावी पड़ताल 2019

आखिरी चरण में पूर्वांचल की 13 सीटों पर मुश्किल से खिलेगा कमल

Prema Negi
17 May 2019 2:40 PM GMT
आखिरी चरण में पूर्वांचल की 13 सीटों पर मुश्किल से खिलेगा कमल
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भाजपा चाहे जितना दम लगा ले, मगर गठबंधन पूर्वी उत्तर प्रदेश में सब पर भारी है। गठबंधन प्रत्याशियों की चुनावी जनसभाओं में यादव, हरिजन, मुस्लिम के साथ-साथ पिछड़ी-अतिपिछड़ी जातियों के लोग भी भारी तादात में मौजूद रहे, भाजपा के लिए यहां मुकाबला कांटे की टक्कर का है...

देवरिया से अरविंद गिरि की रिपोर्ट

जनज्वार। लोकसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण के चुनाव प्रचार में सभी राजनीतिक पार्टियां पूरे दमखम से उतरीं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तो पूर्वी उत्तर प्रदेश की सभी 13 लोकसभा सीटों पर लगातार पार्टी प्रत्याशियों के लिए ताबड़तोड़ चुनावी सभाएं कीं। हर चुनावी सभा में गठबंधन में शामिल उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मायावती एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का नामों के साथ उनकी कमियां गिनाने से वे बाज नहीं आए।

राजनीतिक विश्लेषक कह रहे हैं कि गठबंधन की बढ़ी हुई ताकत का अहसास होने से मोदी समेत भाजपा डरी हुई है। भाजपा को डर है कि वह कहीं यहां से ज्यादा से ज्यादा सीटें गंवा न दें। वहीं गठबंधन प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, पूर्व मुख्यमंत्री मायावती और रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत सिंह की संयुक्त चुनावी जनसभाओं में बड़ी संख्या में भीड़ देखने को मिल रही है, जिससे भाजपा को हार का डर सता रहा है।

यही वजह है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, भू- तल सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, सांसद हेमा मालिनी, सांसद मनोज तिवारी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, विधायक पंकज सिंह व राजन तिवारी समेत वरिष्ठ भाजपा नेता और विधायक-सांसद लगातार 13 सीटों पर भाजपा को किसी भी हाल में चुनाव जिताने के लिए ताबड़तोड़ चुनावी रैलियां कर चुके हैं।

file photo

वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी चुनाव प्रचार में पूरी ताकत के साथ 13 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं और पूरे दमखम के साथ जातीय समीकरण बैठाते हुए चुनावी जनसभाएं कीं। कांग्रेस की पूर्वांचल प्रभारी प्रियंका गांधी ने लगातार हर लोकसभा सीट पर चुनावी रैली और रोड शो किए। उनके साथ पू्र्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी, पूर्व सांसद राजीव शुक्ला, पूर्व सांसद पीएल पुनिया, पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा, गुजरात से युवा नेता हार्दिक पटेल चुनावी प्रचार की कमान संभाले हुए नजर आए। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी पडरौना संसदीय क्षेत्र में कुंवर आरपीएन सिंह के लिए चुनावी जनसभा करने खुद पहुंचे।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक भाजपा चाहे जितना दम लगा ले, मगर गठबंधन पूर्वी उत्तर प्रदेश में सब पर भारी है। इसे समाजवादियों का गढ़ माना जाता है। गठबंधन प्रत्याशियों की चुनावी जनसभाओं में यादव, हरिजन, मुस्लिम के साथ-साथ पिछड़ी-अतिपिछड़ी जातियों के लोग भी भारी तादात में मौजूद रहे।

लोकसभा चुनाव के सातवें और आखिरी चरण में पूर्वांचल की 13 सीटों के लिए आज 17 मई को चुनाव प्रचार शाम 5 बजे थम गया है। गौरतलब है कि लोकसभा के लिए अंतिम चरण का मतदान 19 मई को होगा, जिसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश की 13 लोकसभा सीटों पर भाजपा के योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा दांव पर है और यह नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री की भी कठिन परीक्षा है? पूर्वी उत्तर प्रदेश की गोरखपुर, महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, बांसगांव (सु) घोसी, सलेमपुर, बलिया, गाजीपुर चंदौली, वाराणसी, मिर्जापुर और राबर्ट्सगंज (सु) संसदीय सीटों पर भाजपा के प्रत्याशियों को गठबंधन प्रत्याशी कड़ी टक्कर देते नजर आ रहे हैं।

19 को होने वाले चुनावों में सबसे महत्वपूर्ण सीट वाराणसी लोकसभा की है, जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद भाजपा उम्मीदवार हैं। इनके खिलाफ सपा से गठबंधन की प्रत्याशी शालिनी यादव और कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी अजय राय प्रमुख उम्मीदवार हैं। वाराणसी लोकसभा सीट पर पूर्व सांसद अतीक अहमद भी चुनावी मैदान में हैं, मगर उन्होंने अपने वकील के माध्यम से जेल से ही घोषणा कर दी है कि मैं चुनाव में प्रचार नहीं करुंगा और न ही मुझे वोट चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जनता सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए वोट करे। हालांकि वाराणसी सीट पर 30 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं।

वाराणसी लोकसभा सीट देशभर में चर्चा में है, क्योंकि नांमाकन में 100 प्रत्याशियों ने पर्चा दाखिल कर दिया था, जिनमें से ज्यादातर के पर्चे निरस्त कर दिए गये। यहां से बीएसएफ के पूर्व जवान तेज बहादुर यादव गठबंधन के प्रत्याशी थे, मगर चुनाव आयोग ने उनका पर्चा निरस्त कर दिया। वे प्रधानमंत्री मोदी पर सेना के साथ छल-कपट और दुर्भाग्यपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए अपना पर्चा निरस्त के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे।

दूसरी सबसे चर्चित लोकसभा सीट गोरखपुर संसदीय सीट है, जोकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का संसदीय क्षेच है। यहां से लगातार योगी आदित्यनाथ सांसद निर्वाचित होते चले आ रहे थे, मगर उपचुनाव में सपा के गठबंधन प्रत्याशी प्रवीण निषाद ने उनकी सीट से जीत दर्ज की। हालांकि प्रवीण निषाद भाजपा में चले गए हैं। इस समय गोरखपुर लोकसभा सीट पर भोजपुरी फिल्म अभिनेता रविकिशन उर्फ रविन्द्र श्याम नारायण शुक्ला भाजपा से उम्मीदवार हैं। उनका मुकाबला सपा के गठबंधन प्रत्याशी रामभुआल निषाद और कांग्रेस के एडवोकेट मधूसुदन त्रिपाठी से है।

गोरखपुर संसदीय क्षेत्र से कुल 10 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, जिनमें हिन्दू युवा वाहिनी के प्रदेशाध्यक्ष सुनील सिंह का पर्चा योगी आदित्यनाथ के इशारे पर खारिज कर दिया गया। सातवें चरण के चुनाव में चंदौली लोकसभा सीट भी कम महत्वपूर्ण नहीं है, क्योंकि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय इस सीट पर प्रत्याशी हैं, जो वर्तमान सांसद भी हैं। उनका मुकाबला सपा गठबंधन प्रत्याशी संजय चौहान और कांग्रेस के प्रत्याशी सुकन्या कुशवाहा से है। चंदौली लोकसभा सीट पर कुल 13 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।

मिर्जापुर लोकसभा सीट भी सातवें चरण के चुनाव में महत्वपूर्ण सीट है। यहां से मौजूदा सांसद और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल अपना दल सोनेलाल की उम्मीदवार हैं, जिन्हें भाजपा का समर्थन हासिल है। भाजपा ने अपना प्रत्याशी इस सीट पर नहीं उतारा है, अनुप्रिया पटेल का सीधा मुकाबला सपा गठबंधन प्रत्याशी रामचरित और कांग्रेस के ललितेशपति त्रिपाठी से है। इस संसदीय सीट पर कुल 9 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं।

गाजीपुर लोकसभा सीट से केन्द्रीय मंत्री मनोज सिन्हा भाजपा के प्रत्याशी हैं, जिनका सीधा मुकाबला अफजाल अंसारी पूर्व सांसद और बाहुबली मुख्तार अंसारी के भाई से है। इस लोकसभा सीट पर कुल 14 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं।

बलिया लोकसभा सीट पर भाजपा के विरेन्द्र सिंह मसरत प्रत्याशी हैं, जिनका मुकाबला सपा गठबंधन प्रत्याशी सश्नत पांडेय से हैं, यहां कुल प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। सलेमपुर लोकसभा सीट पर भाजपा के प्रत्याशी रविन्द्र कुशवाहा प्रत्याशी हैं, जो वर्तमान सांसद हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस पार्टी के वाराणसी के पूर्व सांसद राजेश मिश्रा, जो देवरिया जिले के कसीली से हैं और बसपा के गठबंधन प्रत्याशी बसपा प्रदेशाध्यक्ष आर एस कुशवाहा से है। कांग्रेस प्रत्याशी इस सीट पर मजबूती से लड़ रही है। यहां कुल 12 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।

देवरिया लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी पूर्व प्रदेशाध्यक्ष रमापति त्रिपाठी हैं और उनका सीधा मुकाबला बसपा के गठबंधन प्रत्याशी विनोद जायसवाल से है। यहां पर रमापति त्रिपाठी के पुत्र संतकबीरनगर के सांसद शरद त्रिपाठी के जूताकांड के बाद भाजपा की हालत खस्ता है। भाजपा विधायक राकेश बघेल और भाजपा सांसद शरद त्रिपाठी में यहां जमकर जूते—लात बरसे थे, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था है। ठाकुर विधायक को मारने से यहां भाजपा के ठाकुर जाति में मत विभाजन हो गया है जिस कारण ठाकुर मतदाता रमापति त्रिपाठी के विरोध में हैं। देवरिया में भाजपा विरोध इतना तगड़ा था कि पर्चे तक बांटे गए, ‘हेलमेट की करो तैयारी, आ गए हैं जूताधारी।’ यहां से पूर्व भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामाशीष राय भी चुनावी मैदान में निर्दलीय हैं और कांग्रेस के नियाज़ अहमद भी

देवरिया लोकसभा सीट पर पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र कि प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है। यहां कुल 11 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। (कुशीनगर) पडरौना लोकसभा सीट पर भाजपा के प्रत्याशी पूर्व विधायक विजय दूबे हैं, जिनका सीधा मुकाबला कांग्रेस पार्टी के पूर्व केंद्रीय मंत्री कुंवर आरपी एन सिंह से है। सपा गठबंधन प्रत्याशी नथुनी कुशवाहा हैं।

लोकसभा महाराजगंज में भाजपा के प्रत्याशी सांसद पंकज चौधरी हैं, जिनका सीधा मुकाबला कांग्रेस के प्रत्याशी सुप्रिया श्रीनेत से है। उनके पिता पूर्व सांसद हर्षबर्धन सिंह हैं और सपा गठबंधन प्रत्याशी कुंवर अखिलेश सिंह महराजगंज संसदीय सीट से मजबूत प्रत्याशी हैं।

घोसी लोकसभा सीट पर भाजपा के हरिनारायण राजभर प्रत्याशी हैं, जिनका सीधा मुकाबला बसपा गठबंधन के प्रत्याशी अतुल राय से है। इस लोकसभा सीट पर कुल 9 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं।

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