Top
राजनीति

पुलिस हिरासत में मौत मामले में 41 साल बाद तीन को उम्रकैद, 5 आरोपियों की हो चुकी है मौत

Prema Negi
2 Aug 2019 6:09 AM GMT
पुलिस हिरासत में मौत मामले में 41 साल बाद तीन को उम्रकैद, 5 आरोपियों की हो चुकी है मौत
x

प्रयागराज में पुलिस हिरासत में 16 साल के किशोर की मौत पर उसके परिजनों को न्याय मिलने में लग गये पूरे 41 साल, फैसला आने से पहले ही हत्या के 8 में से 5 आरोपी मर चुके हैं अपनी स्वाभाविक मौत...

जेपी सिंह की रिपोर्ट

जनज्वार। देशभर की सभी अदालतों में एक सूत्र वाक्य लिखा होता है ‘न्याय में विलम्ब अन्याय है’ इसके बाद फौजदारी के मुकदमे के अधीनस्थ अदालत से फैसला होने में चार दशक से ज़्यादा समय लग जाए तो इसे न्याय कहा जायेगा या अन्याय।

प्रयागराज में पुलिस हिरासत में 16 साल के किशोर की मौत पर उसके परिजनों को न्याय मिलने में पूरे 41 साल लग गए। फैसला आने से पहले ही हत्या के आठ में से पांच आरोपी अपनी स्वाभाविक मौत मर चुके हैं। इनमें एक आरोपी तत्कालीन थानाध्यक्ष धूमनगंज भी शामिल हैं। मृतक बुलाकी की मौत का मुकदमा भी पुलिस ने दर्ज नहीं किया था। अदालत ने स्वयं इस घटना का संज्ञान लेकर परिवाद कायम कर मामले की सुनवाई की।

कोर्ट ने अभियुक्त राम कुमार, लालचन्द और रामखेलावन को हत्या के आरोप में उम्रकैद और दस-दस हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। सजा का आदेश अपर सत्र न्यायाधीश आईडी दुबे ने दिया है।

फैसला आने से पूर्व इस हत्याकांड के अभियुक्तगण रामसरन उर्फ ननका, रामानन्द उर्फ नारद, रामसजीवन, दशरथ उर्फ चौबे और तत्कालीन एसओ धूमनगंज राम सागर यादव की दौरान मुकदमा मौत हो गई थी। इस मुकदमे में 1981 में ही तीन गवाहों को परीक्षित कराया गया था। इसके बाद 1981 से लेकर 2019 के बीच 38 साल बीत जाने के बाद भी अभियोजन ने एक भी गवाह पेश नहीं किया। 13 जून 2019 को कोर्ट ने गवाहों को पेश करने के लिए अंतिम अवसर देते हुए नोटिस जारी किया।

धूमनगंज पुलिस ने रिपोर्ट दी कि चाराें गवाहों की मौत हो चुकी है। हेडकांस्टेबल लक्ष्मी नारायण द्विवेदी ने कोर्ट में उपस्थित होकर मृतक गवाहों की रिपोर्ट को साबित किया। कोर्ट ने पुलिस रिपोर्ट के बाद साक्ष्य का अवसर समाप्त कर दिया और मुकदमे की अग्रिम सुनवाई शुरू की। 19 जून को हत्याकांड के जीवित बचे अभियुक्तगण का बयान दर्ज किया गया।

टना 6 फरवरी 1978 की धूमनगंज थाने के कसारी मसारी मत्तन का पूरा की है। वादी हरीलाल ने राम कुमार आदि के खिलाफ जिला न्यायालय में परिवाद दाखिल किया था। वादी का कहना था कि अभियुक्तगण से उसकी पुरानी रंजिश थी। छह फरवरी 1978 को रात दस बजे उसका पुत्र बुलाकी लाल घर आ रहा था। अभियुक्तगण ने उसे अकेला पाकर लाठी डंडों से पीटा। घायल हालत में ही उसे एसओ धूमनगंज रामसागर के हवाले कर दिया गया।

न्होंने बुलाकी को पीटा फिर थाने उठा ले गए। चोटों की वजह से उसकी थाने में ही मौत हो गई। एसओ ने घर वालों को घायल बुलाकी से मिलने भी नहीं दिया। वादी भाग कर डीएम के आवास पर गया तो पता चला कि डीएम माघ मेला चले गए हैं। दूसरे दिन कचहरी गया तो पता चला कि उसके पुत्र की मौत हो गई है।

ठ फरवरी को वह थाने गया तो उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। पोस्टमार्टम के बाद उसके पुत्र का शव दे दिया गया था। वादी ने घटना के संबंध में डीएम, एसपी और केंद्रीय गृहमंत्री को तार और रजिस्ट्री से सूचना दी थी। कोर्ट में परिवाद दाखिल करने के बाद 11 फरवरी 1978 को उसका बयान सीजेएम ने दर्ज किया था।

4 अगस्त 1979 को सीजेएम ने प्रकरण को सत्र न्यायालय में भेजा था। कोर्ट ने 1980 को अभियुक्तों के खिलाफ आरोप तय किया और 1981 में वादी हरी लाल, भुल्लन और मैकू लाल की गवाही हुई थी। इसके बाद से 38 साल तक मुकदमे में कोई सुनवाई नहीं हुई और अभियोजन गवाही नहीं करा सका। इसी दौरान कई अभियुक्तों और गवाहों की मौत हो गई।

धूमनगंज के करारी मसारी मत्तन का पूरा के हरीलाल ने कोर्ट में 11 फरवरी 1978 को परिवाद दाखिल कर आरोप लगाया कि आरोपी रामानंद, दशरथ, रामसागर, रामसरन, राम सजीवन लालचंद्र, राम खेलावन व रामकुमार से उसकी दुश्मनी है। छह फरवरी 1978 की रात उसका 16 वर्षीय बेटा बुलाकी घर आ रहा था तो रास्ते में आरोपी उसे रोककर लाठी-डंडे से मारने लगे।

बुलाकी के शोर मचाने पर गोकुल प्रसाद, भद्री लाल, लक्ष्मीचंद्र, कुंजन व बुदुल (चौकीदार) ने दौड़कर बचाया। यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने धूमनगंज थाने के दरोगा रामसागर यादव को बुला लिया। दरोगा ने बुलाकी को मारा—पीटा, फिर बुलाकी को थाने ले गए। थाने में उसे लड़के से मिलने नहीं दिया। इस पर डीएम को टेलीग्राम से सूचना दी।

8 फरवरी 1978 को पुलिस ने बुलाकी की लाश दी। 9 फरवरी को तत्कालीन गृहमंत्री को रजिस्ट्री पत्र भेजे पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। परिवाद में सभी आरोपियों को तलब कर दंडित करने की मांग गई। कोर्ट ने जांच कर आरोपियों को तलब किया। आरोपियों के हाजिर होने पर मामला सेशन कोर्ट को सुपुर्द कर दिया।

थाने में नाबालिग की मौत का अब तक का घटनाक्रम

6 फरवरी 1978 बुलाकी की हत्या

8 फरवरी 1978 थाने में सूचना

11 फरवरी 1978 कोर्ट में परिवाद दाखिल

14 अक्टूबर 1978 आरोपी तलब

4 अगस्त 1979 मामला सेशन कोर्ट को सुपुर्द

11 जनवरी 1980 रामसरन, लालचंद्र, रामानंद रामकुमार, राम सजीवन, राम खेलावन, दशरथ एवं रामसागर के विरुद्ध हत्या का आरोप तय

19 दिसंबर 1981 हरीलाल का बयान दर्ज

20 दिसंबर 1981 गवाह पुल्लन का बयान दर्ज

4 अक्टूबर 1981 मैकूलाल का बयान दर्ज

26 अप्रैल 2013 तीन आरोपी व दरोगा की मृत्यु रिपोर्ट दाखिल

14 जनवरी 2016 रामसरन व राम सजीवन की मृत्यु रिपोर्ट दाखिल

1 जून 2019 कोर्ट ने दिया गवाही के लिए अंतिम अवसर

11 जून 2019 चार गवाहों की मृत्यु की रिपोर्ट दाखिल

15 जून 2019 पुलिस कांस्टेबल लक्ष्मी नारायण द्विवेदी का बयान

19 जून 2019 जीवित बचे आरोपियों का बयान दर्ज

16 जुलाई 2019 बयान व साक्ष्य दाखिल

अब 31 जुलाई 2019 को फैसला सुनाया गया

Next Story

विविध

Share it