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टिकटॉक के अलावा भी भारत में ड्रेगन का व्यवसाय, जिनको चीन करता है डायरेक्ट फंडिंग

Nirmal kant
2 Jun 2020 1:30 AM GMT
टिकटॉक के अलावा भी भारत में ड्रेगन का व्यवसाय, जिनको चीन करता है डायरेक्ट फंडिंग

टिकटॉक को न जानने वाले सिर्फ इतना जान लें कि यह चीनी एप वह बला है जो एक आम आदमी को अनजानी मायावी दुनिया मे भटका सकने का माद्दा रखता है। मसलन आप अगर सांवले अथवा काले दिखते हैं तो सुनील शेट्टी, नाना पाटेकर अथवा मिथुन की आवाज और स्टाइल में खुद को देख दिखा सकते हैं...

जनज्वार ब्यूरो। भारत मे टिकटॉक पर पाबंदी लगाने की डिमांड पिछले लगभग एक डेढ़ सालों से चल रही है। इसी तर्ज पर पिछले साल की अप्रैल में मद्रास हाईकोर्ट ने टिकटॉक के डाउनलोड को बन्द करने के लिए केंद्र सरकार को आदेश दिया था जिसको अमल करना अब तक न ही सुनिश्चित किया जा सका और न मुनासिब ही।

टिकटॉक को न जानने वाले सिर्फ इतना जान लें कि यह चीनी एप वह बला है जो एक आम आदमी को अनजानी मायावी दुनिया मे भटका सकने का माद्दा रखता है। मसलन आप अगर सांवले अथवा काले दिखते हैं तो सुनील शेट्टी, नाना पाटेकर अथवा मिथुन की आवाज और स्टाइल में खुद को देख दिखा सकते हैं। यूजर यदि कोई लड़की अथवा महिला है तो वो खुद में दीपिका पादुकोण व कभी कलाकार रही स्मृति ईरानी की वेषभूसा और आवाज बनाकर बोल सकती है। एक ऐसी बला जो खलनायक को नायक और और जीरो को फर्जी हीरो दिखा सकता है।

टिकटॉक एक सोशल मीडिया एप्लिकेशन है। इस एप के जरिये कोई भी स्मार्टफोन यूजर जिसने यह एप डाउनलोड किया हो वह 15-15 सेकंड के छोटे-छोटे वीडियो बनाकर शेयर कर सकता है। इसे 2016 सितंबर महीने को चीन में लॉन्च किया गया था। टिकटॉक बाइट डांस के स्वामित्व वाली चीनी कम्पनी है। टिकटॉक की लोकप्रियता साल 2018 में बेहद तेजी से बढ़ी और 2018 में ही यह एप अमेरिका में सबसे ज्यादा डाउनलोड किया जाने वाला एप बन गया।

भारत मे भी टिकटॉक डाउनलोड करने का आंकड़ा 100 मिलियन से भी अधिक का है। एक रिपोर्ट के मुताबिक गूगल प्ले स्टोर पर 8 मिलियन लोगों ने इसपर रिव्यु दिया है। जिससे आप इसकी लोकप्रियता का अंदाजा लगा सकते हैं। भारत मे अब इसे बैन किये जाने की शहरों और राज्यों में आवाजे उठ रही हैं यहां तक कि मामला अदालत के बाद सरकार तक पहुंचा और धरासाई हो गया। इस एप की व्यापकता देखते ही देखते इतनी बड़ी की हर कोई यही जान रहा है कि बस यही एक चीनी कंपनी है जिसको भगाकर हम चीन जैसे देश का आखेट कर सकते हैं। इसके अलावा भी भारत के अंदर ऐसी तमाम कम्पनियां और उनके प्रोडक्ट पूरी सल्तनत की जड़ तक समा चुके हैं। बाजार हो या कोई त्योहार हर कहीं चीनी धमक और इसके कद्रदान बने लोगों को खींच ही ले जाती है।

भारत मे और भी तमाम ऐसी कंपनियां चल रही हैं जिनमे ड्रेगन का डायरेक्ट फंडिंग प्रोसेस है, ऐसे में सिर्फ एक टिकटॉक को बैन करवाकर कौन से मजदूर गरीबों का पेट भर रहा। जबकि असल मे यह काम सरकार की नीतियों पर चलता है। जुड़ाव घटाव चोंचले सब सरकार के चाहने न चाहने से पूरा हो जाता है। फिलहाल उन कंपनियों को भी जानिए जो चीन की फंडिंग से भारत मे फल फूल रही हैं, और आपका समेटकर दृश्य अदृश्य हो जाती हैं।

की फंडिंग से चलने वाली कंपनी में 'बिग बास्केट' जिसकी कुल फंडिंग 1.1 बिलियन डॉलर जो इसे अलीबाबा ग्रुप तथा टीआर कैपिटल देती है। 'बीवाईजेयूएस' एड शाहरुख खान करते हैं, इस कंपनी को चीन की टेंसेन्ट होल्डिंग्स से 1.4 बिलियन डॉलर प्राप्त होते हैं। फिर है 'ड्रीम 11' इसे 934.6 मिलियन डॉलर चीन की फोसम नामक कंपनी से मिलते हैं। एक है 'दिल्लीवेरी' जिसे चीन की स्टीडवीव कैपिटल व टेंसेन्ट होल्डिंग्स से 100 मिलियन डॉलर की भारी राशि प्राप्त होती है। 'हाइक' चैट एप को चीनी कंपनी सी ट्रिप 261 मिलियन मिलते हैं।

भारत मे 'फ्लिपकार्ट को' 7.7 बिलियन की भारी भरकम धनराशि चीनी कंपनी स्टीडवीव कैपिटल तथा टेंसेन्ट होल्डिंग्स से मिलती है। 'मेक माई ट्रिप' जिसे अभी नए चीनी इन्वेस्टर के रूप में मीले टेंसेन्ट होल्डिंग्स व फैक्सकॉन रुपये देता है। टैक्सी व्हीकल सर्विस की अग्रणी कंपनी 'ओला' को चीन की टेंसेन्ट होल्डिंग्स, स्टीडवीव कैपिटल, सेलिंग कैपिटल, इटर्नल यील्ड इंटरनेशनल लिमिटेड के अलावा चाइना यूरेशियन व ईपीएफ मिलकर 3.8 बिलियन डॉलर देते हैं।

लोगों को होटल में कमरे दिलाते दिलाते भारतीय बाजार में पैठ बना चुकी कंपनी 'ओयो' को 3.2 बिलियन डॉलर दीदी चक्सीग (नाम भी अटपटे हैं) सहित चाइना लॉजिंग ग्रुप देता है। 'पेटीएम' को 2.2 बिलियन भारतीय करेंसी उपलब्ध कराई जाती है जो इसे अलीबाबा की इकाई अलीपे सिंगापुर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड व सैफ पार्टनर्स कराती है। 'पॉलिसी बाजार' को स्ट्रीडवीव कैपिटल 496.6 मिलियन डॉलर देता है। स्ट्रीडवीव कैपिटल ही भारत मे 424.2 मिलियन डॉलर देकर 'क्विकर' को चलवाता है। 'रिविगो' को चीनी सैफ पार्टनर्स कंपनी 257.4 मिलियन डॉलर देती है।

नलाइन सामान बेंचने की अग्रणी कंपनी स्नैपडील को अलीबाबा 1.8 बिलियन डॉलर की फंडिंग करता है। घर मे खाना खिलाकर जाने वाली 'स्विग्गी' को चाइना का मेल्तुअन डाइनपिंग, हिल हाउस कैपिटल, टेंसेन्ट होल्डिंग्स सहित सैफ पार्टनर्स 1.6 बिलियन डॉलर देता है। एक कोई 'उड़ान' कंपनी है जिसे चाइना की टेंसेन्ट होल्डिंग्स 899.9 मिलियन की धनराशि देता है। 'जोमैटो' को अलीबाबा ग्रुप, शनवे कैपिटल सहित ऐंट फाइनेंशियल सर्विस ग्रुप मिलकर 914.6 मिलियन डॉलर देती हैं।

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