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आशा कार्यकर्ता ने बेच दिया 4 हजार में दलित परिवार का बच्चा

Janjwar Team
17 Aug 2017 11:27 AM GMT
आशा कार्यकर्ता ने बेच दिया 4 हजार में दलित परिवार का बच्चा
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जनज्वार, देवरिया। देवरिया के खुखुंदू थाना अंतर्गत एक दलित परिवार का बच्चा बेचा जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें पीड़ित मां ने कहा है कि उन्हें डरा—धमकाकर और अपने दबाव में लेकर दबंग जाति की आशा कार्यकर्ता महिला ने उनसे बच्चे का सौदा करवाया।

देवरिया जिले के धनौती गांव के अजय प्रसाद की पत्नी इंद्रावती ने 10 अगस्त की रात को घर में ही एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया, मगर यह कहते हुए आशा कार्यकर्ता जच्चा—बच्चा को सलेमपुर सरकारी हॉस्पिटल ले गई कि बच्चे की हालत थोड़ा ठीक नहीं लग रही है, इसलिए इसे डॉक्टर को दिखाना पड़ेगा।

सलेमपुर सरकारी हॉस्पिटल में जच्चा—बच्चा दोनों को यह कहते हुए अलग-कमरे में सुलाया गया कि बच्चे का स्वास्थ्य थोड़ा ठीक नहीं है, इसे नर्सरी में ले जाएंगे। सुबह जब बच्चा ठीक हो जाएगा तो मां को सौंप दिया जाएगा। अगली सुबह जब इंद्रावती ने अपने बच्चे के बारे में पूछा तो आशा कार्यकर्ता उर्मिला यादव ने कह दिया कि तुम्हारा बच्चा जिंदा नहीं बचा, मर गया है। मैंने उसे कूड़ेदान में फेंक दिया।

इंद्रावती बताती हैं कि जब मैं जिद करने लगी और रोने लगी कि मेरा बच्चा तो ठीक—ठाक था वो मर नहीं सकता। मेरे बच्चा मरने की बात न स्वीकार करने पर आशा कार्यकर्ता उर्मिला यादव ने बताया कि तुम्हारे बच्चे को बेच दिया गया है। चूंकि आशा कार्यकर्ता उर्मिला यादव दबंग परिवार से ताल्लुक रखती है तो उसने मुझे डरा—धमकाकर अपने दबाव में लिया और मेरे बच्चे का सौदा 10 हजार में करवा दिया गया।

उर्मिला यादव ने 10 हजार में से 5 अजय प्रसाद रुपए इंद्रावती के पति को दिए और 3 हजार दवाई का कहकर लिए और 2 दो हजार खुद रख लिया। 5 हजार में से भी 1 हजार रुपए आशा उर्मिला ने यह कहकर अजय प्रसाद से ले लिए कि एंबुलेंस और बाकी में इतना पैसा खर्च हो चुका है।

इस मामले की पड़ताल करने के लिए जब जनज्वार टीम धनौती गांव पहुंची तो ग्राम प्रधान राकेश सिंह की उपस्थिति में यह भी उजागर हुआ कि यह मामला स्थानीय मीडिया में कहीं भी उजागर नहीं हुआ है।

घटना को एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी अब तक न मीडिया और न ही पुलिस ने प्रशासन किसी तरह का कोई एक्शन लिया है।

बच्चे की मां इंद्रावती से जब इस बारे में पूछा गया तो उसने कहा कि आशा कार्यकर्ता उर्मिला यादव ने हमें धमकाया हुआ था कि गांव में इस बात को किसी से खुलासा न करें, नहीं तो पुलिस उन्हें जेल में डाल देगी।

उर्मिला यादव चूंकि दबंग परिवार से ताल्लुक रखती हैं, तो कोई भी उनके खिलाफ जाने की हिम्मत नहीं कर पाया। उर्मिला के देवर पूर्व प्रधान हैं, इसलिए दलित जाति के लोग अपनी बात मीडिया या थाने तक नहीं ले जा सके। इसी मामले में ही नहीं, अन्य मामलों में भी दलितों को दबंग जातियों के आगे दबकर रहना पड़ता है।

आरोपी उर्मिला यादव और उनके पति रमाशंकर यादव ने जनज्वार टीम के सामने वादा किया कि आज वह बच्चा हर कीमत पर शाम को 4:00 बजे तक उसकी मां और उसके परिवार को सौंप देंगे।

आरोपी उर्मिला यादव ने जनज्वार टीम और पूरे गांव के सामने स्वीकार किया कि हमने बच्चा बेचा है और शाम 4:00 बजे से पहले तक बच्चा उसके परिवार को सौंप देंगे।

आशा कार्यकर्ता उर्मिला के पति रमाशंकर यादव ने बताया कि उर्मिला एक रैकेट में फंस गई थी, जिस कारण उसने इंद्रावती और अजय प्रसाद का बच्चा इस तरह से बेचा है। साथ ही स्वीकार किया कि दलित जाति का यह बच्चा उर्मिला यादव ने अपने पड़ोसी झींगुर की साली के गांव सिंहई जो कि भटनी थाना में पड़ता है, बेचा है।

इस मामले में डीएम सुजीत कुमार से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो पायी।

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