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पढ़िए क्यों पहुंचा ये सॉफ्टवेयर इंजीनियर घोड़े पर अपने आॅफिस

Janjwar Team
17 Jun 2018 4:10 AM GMT
पढ़िए क्यों पहुंचा ये सॉफ्टवेयर इंजीनियर घोड़े पर अपने आॅफिस
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मुझे नहीं पता था कि मेरी घोड़े वाली फोटो इतनी वायरल हो जाएंगी। यह मेरा ट्रैफिक जाम के प्रति भड़ास निकालने का तरीका था। कई बार तो ट्रैफिक जाम इतना भयानक होता है कि एक ही जगहों पर घंटों गुजर जाते हैं...

बेंगलुरू। सोशल मीडिया पर एक इंजीनियर का आॅफिस घोड़े पर जाते हुए फोटो खूब वायरल हो रहा है। कोई उसकी पहल को सराह रहा है तो कोई कह रहा है कि यह सिर्फ खबरों में बने रहने के लिए किया गया स्टंट है, खैर आइये जानते हैं आखिर क्यों पहुंचा एक इंजीनियर घोड़े पर अपने आॅफिस।

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक बेंगलुरु के ट्रैफिक जाम से खफा हो यह इंजीनियर घोड़े पर बैठकर आॅफिस गया। गौरतलब है कि पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर रूपेश कुमार वर्मा ने बतौर इंजीनियर आॅफिस में आखिरी दिन को यादगार बनाने और ट्रैफिक जाम का विरोध करने के लिए यह कदम उठाया और फॉर्मल कपड़ों, कंधे पर लैपटॉप बैग लटकाए घोड़े पर पहुंच गया आॅफिस। रूपेश ने अपने साथ एक प्लेकार्ड भी लिया था जिस पर लिखा था, 'लास्ट वर्किंग डे ऐज ए सॉफ्टवेयर इंजीनियर।' सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम का आखिरी दिन। क्योंकि अब रूपेश अपना स्टार्टअप शुरू करने जा रहे हैं।

मीडिया से हुई बातचीत में रूपेश ने कहा, 'मैं बेंगलुरु में पिछले 8 वर्षों से रह रहा हूं और वायु प्रदूषण और अन्य समस्याओं से आजिज आ चुका हूं। बेंगलुरु में जरूरत से ज्यादा भीड़ है। सड़कों पर गाड़ियां भी बहुत ज्यादा हैं, जिस कारण दिनभर भयानक जाम लगा रहता है। जाम का विरोध करने और आॅफिस दिन यादगार बनाने के लिए मैंने ये कदम उठाया।'

रूपेश कुमार वर्मा सोशल मीडिया पर उनका फोटो वायरल होने पर कहते हैं, 'मुझे नहीं पता था कि मेरी घोड़े वाली फोटो इतनी वायरल हो जाएंगी। यह मेरा ट्रैफिक जाम के प्रति भड़ास निकालने का तरीका था। कई बार तो ट्रैफिक जाम इतना भयानक होता है कि एक ही जगहों पर घंटों गुजर जाते हैं।

मूल रूप से वर्मा राजस्थान के रहने वाले रूपेश कुमार वर्मा कहते हैं कि ट्रैफिक से तंग आकर ही मैंने घुड़सवारी सीखी। साथ ही यह भी कहते हैं कि सॉफ्टवेयर इंजिनियर्स का भारत में बड़ी मल्टिनैशनल कंपनियां जमकर शोषण कर रही हैं, इसलिए अब मैं अब खुद का वेंचर शुरू करने जा रहा हूं। हालांकि रूपेश कुमार वर्मा का सपना आर्मी ज्वाइन करने का था, सपना पूरा न होने का उन्हें अफसोस है। कहते हैं हर सपना पूरा नहीं होता और मैं सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन गया।

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